टीबी मरीजों को फूड पैकेट देने से पहले ही व्यवस्था हुई बीमार, घंटों फर्श पर बैठे और लेटे रहे मरीज

सुविधा के अभाव में जमीन पर बैठे संक्रमित टीबी मरीज
सहरसा में टीबी मुक्त अभियान के तहत निक्षय पोषण सामग्री वितरण कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई. मरीज घंटों फर्श पर बैठे और लेटे रहे, जिससे संक्रमण नियंत्रण पर भी सवाल उठे.
सहरसा : जिला स्वास्थ्य समिति, सहरसा की ओर से शुक्रवार को स्थानीय प्रेक्षागृह में टीबी मुक्त अभियान के तहत टीबी मरीजों के बीच निक्षय पोषण सामग्री (फूड पैकेट) वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाना था. कार्यक्रम में दोपहर तीन बजे जिलाधिकारी दीपेश कुमार द्वारा मरीजों के बीच फूड पैकेट वितरित किए जाने थे. लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे. आरोप है कि अधिकांश मरीजों को सुबह करीब 11 बजे ही बुला लिया गया, जबकि उनके बैठने की समुचित व्यवस्था कार्यक्रम शुरू होने से महज एक से डेढ़ घंटे पहले की गई.
चार घंटे तक परेशान रहे मरीज
जानकारी के अनुसार, लंबे इंतजार के दौरान कई टीबी मरीज खुले परिसर में फर्श पर बैठे और लेटे रहे. कई मरीज बीमारी और शारीरिक कमजोरी के कारण असहज स्थिति में समय बिताने को मजबूर दिखे. कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त संख्या में कुर्सियां उपलब्ध नहीं थीं. दूर-दराज से आए मरीजों और उनके परिजनों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा. इस दौरान पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी कमी महसूस की गई.
संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर भी उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान टीबी जैसे संक्रामक रोग से पीड़ित मरीजों को एक ही स्थान पर काफी नजदीक बैठाया गया. संक्रमण नियंत्रण के मानकों के अनुसार ऐसे मरीजों के बीच पर्याप्त दूरी, बेहतर वेंटिलेशन और भीड़ प्रबंधन जरूरी माना जाता है, लेकिन आयोजन स्थल पर इन व्यवस्थाओं का समुचित पालन होता नहीं दिखा. इसे लेकर मरीजों की सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण पर भी सवाल उठ रहे हैं.
परिजनों ने जताई नाराजगी
मरीजों के परिजनों का कहना है कि सुबह से बुलाए जाने के बावजूद लंबे समय तक बैठने की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी. कई मरीज शारीरिक रूप से कमजोर थे, फिर भी उन्हें फर्श पर बैठकर या लेटकर समय बिताना पड़ा. उनका कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों में मरीजों की गरिमा और सम्मान के अनुरूप व्यवस्थाएं होनी चाहिए.
बेहतर व्यवस्था की उठी मांग
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को बेहतर उपचार, पोषण सहायता और सम्मानजनक सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है. निक्षय योजना का उद्देश्य भी मरीजों के पोषण स्तर में सुधार कर उपचार को सफल बनाना है. ऐसे में जिस कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों का मनोबल बढ़ाना था, वहीं बुनियादी सुविधाओं की कमी चर्चा का विषय बन गई.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी मरीजों के सामूहिक कार्यक्रमों में पर्याप्त कुर्सियां, अलग प्रतीक्षा स्थल, स्वच्छ वातावरण, पेयजल, शौचालय और संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पहले से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को असुविधा न हो और अभियान अपने उद्देश्य के अनुरूप प्रभावी ढंग से संचालित हो सके.
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लेखक के बारे में
By अंजन आर्यन सिंह
पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.
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