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पर्चा धारियों के साथ नहीं होगा कोई गैर इंसाफ वाला कामः डीएम

Updated at : 15 Dec 2025 5:37 PM (IST)
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पर्चा धारियों के साथ नहीं होगा कोई गैर इंसाफ वाला कामः डीएम

पर्चा धारियों के साथ नहीं होगा कोई गैर इंसाफ वाला कामः डीएम

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पर्चाधारियों के समस्या को लेकर डीएम से मिला सीपीएम प्रतिनिधिमंडल सहरसा . जिले के संपूर्ण पर्चाधारियों की समस्यायों को लेकर सीपीएम का एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जिलाधिकारी दीपेश कुमार से मिलकर ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य बिनोद कुमार, जिला सचिव रणधीर यादव व अशोक केसरी के नेतृत्व में सोनवर्षा अंचल के मौजा कोपा, बराही, मौरा, भभड़ा, मोहनपुर, सौर बाजार अंचल के ठेंगहा जंगल मुसहरी, रामपुर कबैला, नवहट्टा अंचल के हाटी पंचायत, महिषी अंचल के राजनपुर पंचायत, सिमरी बख्तियारपुर अंचल के कठडूमर पंचायत सहित संपूर्ण जिले के पर्चाधारियों की समस्यायों को लेकर ज्ञापन सौंपा. डीएम से ज्ञापन के माध्यम से मांग की गयी कि संपूर्ण जिले में पर्चाधारियों को पर्चा की जमीन का जमाबंदी कायम कर लगान रसीद काटी जाये. साथ ही विशेष भूमि सर्वे में पर्चा धारियों का सर्वे किया जाये. वहीं बेदखल पर्चा धारियों को दखल दिहानी दिलाया जाये. ज्ञापन के माध्यम से कहा कि संपूर्ण जिले में बिचौलियों एवं भू माफियाओं के गठजोड़ से अंचल प्रशासन को प्रभाव में लेकर सरकार द्वारा सीलिंग में अर्जित जमीन व गरीबों के बीच वितरित पर्चा की जमीन को फर्जी तरीके से केबाला कराकर अंचल प्रशासन की मिलीभगत कर जमाबंदी भी कायम हो रहा है. इस गोरखधंधे में बिचौलिया, भू माफिया माला माल हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि भूमि का पहला सर्वे अंग्रेजी हुकूमत के समय 1902 में व दूसरा सर्वे आजाद भारत में 1965 में फाइनल हुआ. सीलिंग एक्ट कानून नौ सितंबर 1970 से लागू हुआ. सरकार भू हथबंदी सीलिंग एक्ट कानून के तहत जमींदार की जमीन अधिग्रहण कर 1970 – 71 से गरीबों के बीच जमीन का वितरण किया. अधिकांश पर्चा धारियों द्वारा लगभग 50 से 55 वर्षों से पर्चा की जमीन पर दखल कब्जा है. कुछ को सामंतों एवं नवधनाढ्यों व भूमाफियाओं द्वारा बेदखल भी किया गया है. उन्होंने कहा कि सीलिंग से पहले ही दोनों सर्वे हुआ, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों सर्वे का खतियान जमींदारों के नाम ही है. अंचल कार्यालयों से बिचौलियों व भू माफियाओं के सहयोग से सीलिंग गजट नोटिफिकेशन को गुम कर पुराने सर्वे के आधार पर जमींदारों की जमीन दिखा कर बिचाैलियों एवं भू माफियाओं द्वारा पर्चा की जमीन को धड़ल्ले से खरीद ब्रिकी की जा रही है. अंचल प्रशासन को प्रभाव में लेकर जमाबंदी भी कायम किया जा रहा है. और तो और बिहार विशेष भूमि सर्वे में सर्वे कर्मी भी मोटी रकम लेकर जमींदारों व फर्जी केबाला धारियों के नाम सर्वे कर रहा है. जबकि पर्चा धारियों द्वारा पर्चा की काॅपी आफलाइन व ऑनलाइन रसीद व भौतिक सत्यापन में भी जमीन पर दखल कब्जा दिखाया है. बावजूद एक तरह से फिर से नयी जमींदारी प्रथा को कायम किया जा रहा है. इस व्यापक लूट व पर्चा धारियों पर हो रहे ज़ुल्म के खिलाफ सीपीएम के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा है. साथ ही फर्जी केबालाधारियों का केबाला रद्द करने की मांग की है. सीपीएम के राज्य सचिव मंडल सदस्य बिनोद कुमार एवं पार्टी जिला सचिव रणधीर यादव ने कहा कि डीएम के स्तर से आश्वासन मिला है कि पर्चा धारियों के साथ कोई गैर इंसाफ वाला काम नहीं होगा. पर्चा की जमीन पर पर्चा धारियों का अधिकार कायम रहेगा. पार्टी नेताओं ने कहा कि समुचित पहल नहीं हुई तो पर्चाधारी अपनी जमीन को बचाने के लिए संघर्ष एवं जान की बाजी लगाने को भी तैयार रहेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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