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मार्च माह के पहले दिन मनाया जाएगा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त

Updated at : 26 Feb 2026 7:53 AM (IST)
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Ravi Pradosh Vrat 2026

इस दिन है रवि प्रदोष व्रत

Ravi Pradosh 2026: रवि प्रदोष व्रत 2026 में 1 मार्च को रखा जाएगा. जानें त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल, पूजा विधि और इस दिन शिव कृपा पाने के विशेष धार्मिक महत्व.

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Ravi Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. जब यह व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘रवि प्रदोष’ कहा जाता है. इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में रवि प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और इसकी पूजा विधि क्या है.

कब है रवि प्रदोष व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी 2026, शनिवार की रात 8 बजकर 43 मिनट से प्रारंभ होगी. यह तिथि 1 मार्च 2026, रविवार को शाम 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. प्रदोष व्रत में उदयातिथि का महत्व नहीं होता, बल्कि प्रदोष काल में पड़ने वाली त्रयोदशी को मान्यता दी जाती है. चूंकि 1 मार्च, रविवार को प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा. रविवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.

रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें. मंदिर या पूजा स्थान के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें. सूर्यास्त से पहले पुनः स्नान करें और प्रदोष काल में भगवान शिव का गंगाजल व दूध से अभिषेक करें. शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन और अक्षत अर्पित करें. माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित कर विधिपूर्वक पूजा करें. इसके बाद दीपक जलाकर प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें. पूजा के दौरान हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना अवश्य करें. इस दिन तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए.

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव पूजा का विधान है. मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थनाएं शीघ्र स्वीकार करते हैं. श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने से जीवन के दुख-दर्द और बाधाएं दूर होती हैं. साथ ही सुख-शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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