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पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया मकर संक्रांति

Updated at : 14 Jan 2026 6:29 PM (IST)
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पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया मकर संक्रांति

प्रखंड क्षेत्र में बुधवार को अधिकांश जगहों पर मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया.

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कुछ जगह 15 जनवरी को भी मनाया जायेगा त्योहार

लोगों ने जम कर दही-चूड़ा, तिलकुट का भोजन किया ग्रहण

सलखुआ. प्रखंड क्षेत्र में बुधवार को अधिकांश जगहों पर मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. वहीं पंचांग को मानने वाले कुछ परिवारों द्वारा यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जायेगा. दो दिनों तक पर्व मनाये जाने की स्थिति बनने से इस बार उत्साह में थोड़ी कमी जरूर देखी गयी, लेकिन लोगों की आस्था और परंपरा में कोई कमी नहीं आयी. मकर संक्रांति के अवसर पर सुबह से ही लोगों ने स्नान-ध्यान कर भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की. घर-घर में तिल, गुड़, चूड़ा, दही और खिचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए गये. बच्चों और युवाओं में पतंगबाजी का भी उत्साह देखा गया, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इसकी रौनक कुछ कम रही. ग्रामीण इलाकों में लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर तिलकुट और मिठाइयों का का आदान-प्रदान किया तथा बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया. पर्व को लेकर महिलाओं में भी विशेष उत्साह देखा गया और पूजा-पाठ के बाद परिवार के साथ सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि तिथि को लेकर असमंजस के कारण पर्व दो दिन में बंट गया, जिससे सामूहिक उत्सव की चमक कुछ फीकी पड़ी. इसके बावजूद मकर संक्रांति की पारंपरिक गरिमा और सांस्कृतिक महत्व पूरे क्षेत्र में देखने को मिला.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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