लंपी बीमारी से पशुपालक परेशान, 50 हजार से अधिक पशुओं वाले क्षेत्र में टीकाकरण पर उठे सवाल

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लंपी स्किन डिजीज का बढ़ता प्रकोप, हर साल हजारों पशु हो रहे बीमार<bha>;</bha> पशुपालकों में चिंता

सहरबा गांव में लंपी वायरस से ग्रसित पशु

लंपी स्किन डिजीज तेजी से फैल रही है, जिससे 50 हजार से अधिक पशुओं वाले क्षेत्र में पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. प्रभावी बचाव के उपायों की कमी से मवेशी इस वायरल बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

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सहरसा : प्रखंड की 12 पंचायतों और नगर निगम के दो वार्डों में लंपी स्किन डिजीज पशुपालकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है. क्षेत्र में 50 हजार से अधिक पशु हैं, जिनमें करीब 35 हजार गौवंश शामिल हैं. पशुपालकों का कहना है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में मवेशी इस वायरल बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

संक्रामक वायरल बीमारी से बढ़ी चिंता

लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गौवंशीय पशुओं में फैलने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है. यह मच्छर, मक्खी और अन्य रक्त चूसने वाले कीड़ों के माध्यम से फैलती है. पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार यह पॉक्सविरिडे परिवार के वायरस से होती है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह बीमारी 80 से 90 प्रतिशत तक संवेदनशील पशुओं को प्रभावित कर सकती है, जबकि मृत्यु दर सामान्यतः एक से पांच प्रतिशत तक रहती है.

हर साल हजारों पशुओं के प्रभावित होने का दावा

स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि प्रखंड में हर वर्ष बड़ी संख्या में पशु इस बीमारी की चपेट में आते हैं. उनका आरोप है कि प्रभावी टीकाकरण और जागरूकता अभियान के अभाव में बीमारी लगातार फैल रही है. सहरबा गांव के किसान मनोज यादव, जगदीश यादव, अरुण यादव और राजकुमारी देवी ने बताया कि संक्रमित पशुओं के शरीर पर गांठें निकल आती हैं, तेज बुखार रहता है और वे चारा-पानी छोड़ देते हैं. कई मामलों में घाव बनने के बाद पशुओं की मौत भी हो जाती है. दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन घटने और गर्भवती पशुओं में गर्भपात जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं.

बचाव के लिए टीकाकरण और साफ-सफाई जरूरी

पशु चिकित्सक डॉ. शिव शरण पंत ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है. संक्रमित पशु को अलग रखना, घावों की नियमित सफाई करना तथा मच्छर और मक्खियों से बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाएं दी जाती हैं. साथ ही कुछ आयुर्वेदिक उपाय भी राहत पहुंचा सकते हैं, लेकिन किसी भी उपचार से पहले पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए.

क्या बोले अधिकारी

टीवीओ सह नोडल पशुपालन पदाधिकारी डॉ. शिव शरण पंत ने बताया कि विभाग को लंपी स्किन डिजीज की स्थिति की जानकारी है. उन्होंने कहा कि पूर्व में पॉक्स वैक्सीनेशन कराया गया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. फिलहाल वैक्सीन और रोकथाम की आगे की रणनीति पर विभाग स्तर पर मंथन किया जा रहा है.


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लालबहादुर कुमार

लेखक के बारे में

By लालबहादुर कुमार

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. प्रिंट मिडिया में वर्ष 2012 से लगातार कार्यरत हैं. वर्तमान में मैं सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड में समाचार संकलन के कार्य में जुटे हैं.उनकी रूचि शिक्षा एवं समाज सेवा है.

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