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संगीत में आज भी जीवित है गुरु-शिष्य परंपरा

Updated at : 11 Aug 2024 6:26 PM (IST)
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संगीत में आज भी जीवित है गुरु-शिष्य परंपरा

संगीत में आज भी जीवित है गुरु-शिष्य परंपरा

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स्वर संगम संगीतालय में गुरु सम्मान कार्यक्रम का आयोजन सहरसा. हकपाडा वार्ड नंबर 5 स्थित स्वर संगम संगीतालय में शुक्रवार को गुरु सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन संगीतालय के संरक्षक प्रमोद आनंद, संगीत शिक्षक बी के ठाकुर, किशोर शर्मा, सज्जन कुमार, सिकंदर यादव और प्रमोद कश्यप ने दीप प्रज्वलित कर किया. उद्घाटन के दौरान प्रमोद आनंद ने संस्था की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वर संगम संगीतालय पिछले तीस वर्षों से निशुल्क संगीत शिक्षा प्रदान कर रहा है. उन्होंने कहा कि संगीत हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है और इसमें गुरु-शिष्य परंपरा आज भी जीवित है. इस तरह के आयोजन से युवा पीढ़ी का भारतीय संगीत से जुड़ाव होगा. कार्यक्रम के दौरान संगीत के छात्रों ने अपने शिक्षकों का पारंपरिक तरीके से सम्मान किया. छात्रों ने अपने संगीत गुरुओं को मिथिला का पारंपरिक पाग और चादर भेंट कर आदर व्यक्त किया. इस भावपूर्ण सम्मान समारोह में छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. जिसने दर्शकों का मन मोह लिया. सांस्कृतिक कार्यक्रम में कृति कुमारी और सृष्टि कुमारी ने हे मान्य अतिथि मेरे व कृष्ण कुमार ने राग भोपाली, सृष्टि कुमारी ने राग मालकोश में अपने सुरों का जादू बिखेरा. नव्या कसौधन, पमपम कुमार, काजल कुमारी, गुड़िया कुमारी, आरती कुमारी, पूजा कुमारी, शशिकला कुमारी, शुभम कुमार, मुकेश कुमार, पुष्पराज पुष्पेश, छोटी सिंह, शोभा कुमारी, परमेश्वर कुमार और निभाष राजेश कुमार ने भी गीत और नृत्य के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया. इनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा. कार्यक्रम को सफल बनाने में संचालक शुभम कुमार और नाल वादक पंकज कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही. मंच संचालन भूषण भारती ने किया.

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