सहरसा के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर में दर्शन मात्र से मिलती है आध्यात्मिक शांति, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 25 May 2026 7:15 AM

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सहरसा का बाबा वाणेश्वर मंदिर

Aaj Ka Darshan : सहरसा का बाबा वाणेश्वर मंदिर जहां सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होने की है मान्यता, सावन और शिवरात्रि में उमड़ता है जनसैलाब

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Aaj Ka Darshan : सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट. बाबा वाणेश्वर मंदिर कोसी क्षेत्र की धार्मिक आस्था का एक ऐसा केंद्र है जहां हर दिन शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है. कहरा प्रखंड के देवना गांव में स्थित यह प्राचीन मंदिर वर्षों से श्रद्धा, शिवभक्ति और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. मान्यता है कि बाबा वाणेश्वर सच्चे मन से की गयी पूजा-अर्चना स्वीकार करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यही कारण है कि बिहार के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और पूजा के लिए पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को एक अलग आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है. शिवलिंग के दर्शन के साथ ही हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा वाणेश्वर की कृपा से लोगों के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. सुबह की आरती से लेकर शाम की पूजा तक मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

सावन और महाशिवरात्रि में दिखती है अद्भुत भक्ति

श्रावण मास में बाबा वाणेश्वर मंदिर का नजारा बेहद भव्य हो जाता है. दूर-दराज से कांवरिया यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं. मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन लगातार चलता रहता है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु जुटते हैं और पूरा इलाका शिवमय हो उठता है.

विशेष बात यह है कि शिवरात्रि के दौरान कला संस्कृति विभाग की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. शाम की आरती और भक्ति संगीत श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखता है. हाल के वर्षों में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे इसकी भव्यता और बढ़ी है.

धार्मिक पर्यटन का भी बन रहा बड़ा केंद्र

देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर अब धार्मिक पर्यटन के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा-अर्चना ही नहीं बल्कि मंदिर की प्राचीन परंपरा और शांत वातावरण का भी अनुभव करते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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