प्रत्याशी के तेवर नहीं, विकास के मीटर पर होगा चुनाव

Published at :05 Mar 2017 3:18 AM (IST)
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प्रत्याशी के तेवर नहीं, विकास के मीटर पर होगा चुनाव

अधूरे कार्य को निबटाने में लगे हैं वर्तमान पार्षद सहरसा : नगर परिषद चुनाव को ले विभागीय स्तर पर तैयारी आरंभ कर दी गयी है. जून में सत्र समाप्त हो रहा है. ऐसे में मई 17 तक मतदान व मतगणना प्रक्रिया समाप्त कर ली जायेगी. वार्ड में वर्तमान पार्षद अभी नियमित रूप से जनसेवा में […]

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अधूरे कार्य को निबटाने में लगे हैं वर्तमान पार्षद

सहरसा : नगर परिषद चुनाव को ले विभागीय स्तर पर तैयारी आरंभ कर दी गयी है. जून में सत्र समाप्त हो रहा है. ऐसे में मई 17 तक मतदान व मतगणना प्रक्रिया समाप्त कर ली जायेगी. वार्ड में वर्तमान पार्षद अभी नियमित रूप से जनसेवा में लगे हुए हैं. वहीं संभावित प्रत्याशी वोटरों के घर सुख व दुख में पहुंचने का कोई मौका गवांना नहीं चाह रहे हैं. सामान्य श्रेणी के वार्ड में वर्तमान पार्षदों को पुराने सहयोगी बागी बन परेशान करने की जुगत लगा रहे हैं
. हालांकि जनता किसी भी संभावित को निराश नहीं कर रही है. लोग बताते हैं कि तेवर व जोरदार अपील के बजाय विकास ही पैमाना होगा. गत पांच वर्ष में किये गये कार्य का जनता लेखा जोखा लेगी. इसके अलावा नगर निकाय के चुनाव में हमेशा से दखलअंदाजी रखने वाले मठाधीशों के दरबार की रौनक लौटने लगी है. उनलोगों के यहां पहुंचने वाले संभावित प्रत्याशियों को जोड़ तोड़ का नुस्खा भी मुफ्त में बांटने की होड़ मची हुई है.
नगर में बढ़ी चुनाव की सरगर्मी
नगर परिषद सहरसा के अलावा नगर पंचायत सिमरी बख्तियारपुर में चुनाव होना है. चुनाव को ले वार्ड के गली-मोहल्लों के दीवार व बिजली, टेलीफोन के खंभों पर संभावित प्रत्याशी अभी वोटर भगवान का अभिवादन कर रहे हैं. भले बाद में जीत के बाद जो हो. शहर में ज्यादा पोस्टर संभावित उम्मीदवारों के नजर आ रहे हैं. सभापति राजू महतो का वार्ड आरक्षण की श्रेणी में आ गया है. उपसभापति भी वार्ड नंबर 22 से चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर कर चुकी है. चाय दुकानों पर भी चुनावी चर्चा के साथ जीत-हार की समीक्षा होने लगी है.
होली पर हावी रहेगा चुनावी रंग
होली के मौके पर नगर क्षेत्र में चुनावी रंग के ज्यादा गहरा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. होली के मौके पर क्षेत्र की जनता का अभिवादन करने के लिए नये व पूराने खिलाड़ी तैयारी में जुट चुके है. कही भोज तो कही होली मिलन के बहाने शहर में अधिकांश जगह वोटरों को अपने पाले में करने की जोर आजमाइस होगी. हालांकि राज्य में शराबबंदी के बाद पहली बार लोग नशा मुक्त होली का आनंद लेंगे. कई पार्षदों ने बताया कि होली में शराब की अनुपस्थिति से चुनावी फायदा मिलेगा.
अभी सक्रिय हैं नये उम्मीदवार
जून 2017 में समाप्त हो जायेगा पुराना सत्र
वर्तमान पार्षद अपने-अपने वार्ड की समस्याओं व विकास कार्य को ससमय पूरा कर चुनाव मैदान में जाने की तैयारी में लगे हुए हैं. वहीं नये प्रत्याशी सुबह-शाम लोगों को अपने उम्मीदवारी के लिए समर्थन मांग रहे हैं. फिलवक्त कई संभावित जनता के रुख को देखते चुनाव में नहीं जाने का मन बना चुके हैं तो कई नये चेहरे फिर से दांव लगाने की कोशिश में हैं. वार्ड पार्षदों ने बताया कि जनता पांच वर्ष के कार्य का मूल्यांकन व उम्मीदवारों के व्यक्तित्व को खंगालेगी. ऐसे में सिर्फ बैनर व पोस्टर से नगर की जनता को द्विगभ्रमित नहीं किया जा सकता है.
चढ़ने लगी होली की खुमारी
तैयारी . 30 करोड़ के कारोबार का है अनुमान
रंगों का त्योहार होली परवान चढ़ने लगा है. होली के गीत गांव से लेकर शहर तक की फिजां में गूंजने लगे हैं. बाजारों में रंग-अबीर, पिचकारी के साथ पकवान सामग्री की दुकानें भी सजने लगी हैं. थोक व खुदरा खरीदारों की भीड़ से बाजार गुलजार होने लगे हैं. ऐसे में त्योहारों की खुशियां पहले से ही सिर चढ़ कर बोलने लगी हैं. जिले में बनगांव की होली प्राचीन काल से विख्यात रही है. बनगांव में होली को लेकर होली समिति भी तैयारी में जुट गयी है.
सहरसा : होली को लेकर थोक बाजार मारुफगंज, चांदनी चौक में कतरनी, बासमती, लक्ष्मी-गणेश सुगंधित चावल, लाल किला चावल के साथ तेल, घी, चीनी, हर्बल गुलाल, रंग व सूखे फल की दुकानें सज गयी हैं. शहर के कचहरी चौक, रिफ्युजी चौक में रंग-गुलाल की दुकानें भी सजने लगी हैं. होली पर ब्रांडेड कपड़ों से लेकर पठानी कुरता की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटने लगी है. होली की मस्ती के लिए मास्क व राजस्थानी टोपी सहित आधुनिक पिचकारी की दुकानों पर भीड़ ज्यादा दिख रही है. इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में कम से कम 20 फीसदी अधिक कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है.
दुकानों में बजने लगे हैं फागुन के गीत
वैसे तो मां सरस्वती की विदाई के साथ ही फाग के गीत आरंभ हो जाते हैं, लेकिन यह सिलसिला अब परवान चढ़ने लगा है. कहीं-कहीं गांव के चौपाल पर ढोल-मंजीरे के थाप पर होली के गीत भी गूंजने लगे हैं. बदलते समय के साथ होली के त्योहार का स्वरूप भी बदल गया है. पहले जहां होली में परंपरागत गीत गूंजते थे. वहीं अब दिलीप दरभंगिया, विकास झा, गुड्डू रंगीला, कल्पना, छैला बिहारी, पवन सिंह जैसे भोजपुरी गायकों के गीत बाजार में बज रहे हैं. नयी पीढ़ी के बीच इन गायकों के गीत तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.
पिछले वर्ष की तुलना में 20 फीसदी अधिक कारोबार का अनुमान
गांवों में सुनाई पड़ने
लगा जोगीरा
बदलते समय के साथ होली का ट्रेंड भी बदल रहा है. बीते कुछ वर्षों से सामूहिक होली का आयोजन होने लगा है. इन आयोजनों में पुष्प, चंदन, हर्बल अबीर का प्रचलन भी बढ़ा है. इतना ही नहीं नये बदलाव के बाद भी इस तरह के आयोजनों में होली के पारंपरिक गीत अब भी बरकरार हैं. हालांकि अब पारंपरिक गीत तेजी से गुम भी हो रहे हैं. दरअसल तेजी से हो रहे बदलाव में जहां एक तरफ पश्चिमी सभ्यता हावी हो रही है, वहीं पुरानी परंपराओं को जीवंत रखने का भी प्रयास जारी है. शहर में होली से पूर्व विभिन्न जगहों पर व्यापार संघ, स्वयंसेवी संगठन व राजनीतिक दलो के द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है.
कारोबार का अनुमानित आंकड़ा
सरसों तेल 4-5 करोड़
चीनी-गुड़ 3-4 करोड़
घी, रिफाइन, मैदा 5-6 करोड़
चावल सुगंधित 4-5 करोड़
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