बेटी के बाप ने कहा, परेशानी है, पर करेंगे समर्थन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Nov 2016 1:26 AM (IST)
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परेशानी के बाद भी संयम बरत रहे लोग सहरसा : नोट बैन के छठे दिन भी लोगों को कैश के लिए मशक्कत करनी पड़ी है. इस बीच गुरुनानक जयंती के अवकाश को रद्द कर सोमवार जिले में बैंक की सेवा बहाल रखी गयी. हालांकि इसके बावजूद लोग सुबह से एटीएम के सामने पैसे निकालने के […]
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परेशानी के बाद भी संयम बरत रहे लोग
सहरसा : नोट बैन के छठे दिन भी लोगों को कैश के लिए मशक्कत करनी पड़ी है. इस बीच गुरुनानक जयंती के अवकाश को रद्द कर सोमवार जिले में बैंक की सेवा बहाल रखी गयी. हालांकि इसके बावजूद लोग सुबह से एटीएम के सामने पैसे निकालने के लिए खड़े रहे. उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वे सरकार के इस प्रयास से खुश नजर आ रहे हैं.
नोटबैन के छठे दिन आज जिला मुख्यालय के थाना चौक में बेटी की शादी के लिए रुपये निकालने पहुंचे एक पिता ने पीएम मोदी के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मैं सुबह 5 बजे से कतार में लगा हूं… यह दिक्कत केवल कुछ दिनों की है… हमें पीएम मोदी का समर्थन करना चाहिए… यदि अभी हम पीएम मोदी का साथ देंगे तभी हमारा भविष्य सुंदर होगा…
इधर, नोटबंदी के पांचवें दिन भी 500 और 1000 के नोट बंद होने से जहां एक ओर लोग अपने काले धन को सफेद करने की जुगाड़ में लगे हैं, वहीं कोसी इलाके में कर चोरी की प्रवृत्ति और अचानक नोट बंद होने से मची अफरातफरी में अनेक लोगों की मेहनत का सफेद धन भी कालेधन में बदल गया है. आइए नजर डालते हैं कपड़ा कारोबार पर ग्रहण कुछ केस स्टडी पर….
केस स्टडी 1
पूरब बाजार की एक महिला ने अपना मकान 30 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया. महिला ने सरकारी कर की चोरी और मकान बेचने की लिखा-पढ़ी का खर्च बचाने के लिए खरीदार से मकान को कानूनी तौर पर 8 लाख रुपये में बेचने और बाकी का 22 लाख रुपये नकदी में लेने की शर्त रखी. शर्त के आधार पर दोनों के बीच मकान खरीद-बिक्री का सौदा हो गया, लेकिन इस बीच सरकार द्वारा पुराने नोटों का चलन बंद किये जाने के निर्णय से जानकारी अभाव में अब मकान मालकिन को पूरे 22 लाख रुपये की चपत लग गयी. नोट बंद होने के निर्णय के बाद अब खरीदार तो 22 लाख रुपये देने के लिए खुशी-खुशी राजी है, लेकिन महिला आयकर छापे और इसे वैध नहीं कर पाने के डर से पैसा लेने से खुद ही मुकर गयी.
केस स्टडी-2
एक पुलिस अधिकारी ने सेवानिवृत्ति से मिलनेवाली राशि को शहर में जमीन खरीदने के लिए अपने दो बेटों के बीच 15-15 लाख रुपये में बांट दिया. जमीन बेचनेवाले दलाल ने भी सरकारी कर की चोरी और खरीद-बिक्री के खर्च से बचने के लिए खरीदारों को 60 प्रतिशत राशि नकदी और 40 प्रतिशत राशि चेक के जरिये अदा करने का प्रस्ताव दिया. अपना-अपना सरकारी खर्च बचाने के लिए खरीदारों ने 60 प्रतिशत राशि नकदी में दे दी, जो अब प्रधानमंत्री की अचानक नोट बंद करने की घोषणा के बाद सफेद होने के बावजूद अपने आप ही कालेधन में बदल गयी.
नोटबंदी के बाद कपड़ों की खरीद: फरोख्त में भारी कमी आयी है. शादियों के मौसम में यह कारोबार हर साल शबाब पर रहता है, लेकिन इस बार बाजार में रौनक नहीं है. नोटबंदी के चलते बाजार में नकदी का प्रवाह रुकने से कपड़ों का कारोबार बुरी तरह गिरा है.
रेस्तरां कारोबार भी चौपट: नोटबंदी का असर रेस्टोरेंट और होटल पर भी दिख रहा है. लोगों के पास नकदी की कमी होने से वे रेस्तरां और होटल में खाने के लिए नहीं जा पा रहे हैं. हालांकि, अनेक रेस्टोरेंट अपने ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान का आग्रह कर रहे हैं.
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