डेंगू व चिकनगुनिया की जांच की व्यवस्था नहीं

Published at :21 Sep 2016 4:04 AM (IST)
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डेंगू व चिकनगुनिया की जांच की व्यवस्था नहीं

सहरसा : सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल से दो चिकनगुनिया के मरीज के सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद ले रहा है, वही दूसरी ओर आमलोगों में चिकनगुनिया व डेंगू के आगमन से डर का माहौल व्याप्त है. मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व दिल्ली से लौटे सिमरी बख्तियारपुर निवासी विकास और शिव […]

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सहरसा : सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल से दो चिकनगुनिया के मरीज के सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद ले रहा है, वही दूसरी ओर आमलोगों में चिकनगुनिया व डेंगू के आगमन से डर का माहौल व्याप्त है. मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व दिल्ली से लौटे सिमरी बख्तियारपुर निवासी विकास और शिव दयाल कुमार को बुखार और जोड़ो के दर्द के बाद सिमरी बख्तियारपुर के स्थानीय चिकित्सक को दिखाने के बाद जांचोपरांत चिकनगुनिया की पुष्टि हुई थी.

जिसके बाद लोगों के बीच दोनों बीमारी को लेकर भय का माहौल व्याप्त है. बावजूद दोनो रोगो की जांच के लिये कोसी का प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल में जांच की कोई व्यवस्था नहीं है. जांच घर के कर्मी आनंद ने बताया कि सीबीसी द्वारा सिर्फ प्लैटलैट्स की जांच की जाती है. यदि कोई मरीज इस रोग के संदेह में अस्पताल आएंगे तो उनका सैंपल लेकर पीएमसीएच भेजा जायेगा. उन्होंने बताया कि अभी तक एक भी मरीज अस्पताल नही आया है.

क्या है चिकनगुनिया : चिकनगुनिया लंबे समय तक चलने वाला जोडों का रोग है. जिसमें जोडों में भारी दर्द होता है तथा इस रोग का उग्र चरण तो मात्र दो से पांच दिन के लिये चलता है, लेकिन जोडों का दर्द महीना व हफ्तों तक तो बना ही रहता है. जानकारी मुताबिक चिकनगुनिया मानव में एडिस मच्छर के काटने से प्रवेश करता है. यह विषाणु ठीक उसी लक्षण वाली बीमारी पैदा करता है. जिस प्रकार की स्थिति डेंगू रोग मे होती है. इस रोग को शरीर में आने के बाद दो से चार दिन का समय फैलने में लगता है. रोग के लक्षणों में तेज बुखार, धड़ और फिर हाथों एवं पैरों पर चकते बन जाना, शरीर के विभिन्न जोड़ों में पीड़ा होना शामिल है. इसके अलावा सिरदर्द, प्रकाश से भी डर लगना, आंखों मे पीड़ा भी होती है. बुखार आम तौर पर दो से ज्यादा दिन नहीं चलता तथा अचानक समाप्त होता है. लेकिन अन्य लक्षण जिनमें अनिद्रा तथा निर्बलता आम तौर पर पांच से सात दिन तक चलतें है. रोगियों को लंबे समय तक जोडों की पीड़ा हो सकती जो उनकी उम्र पर निर्भर करती है.
हाल प्रमंडलीय अस्पताल का
कैसे करें बचाव
चिकित्सक बताते हैं कि बचाव का सबसे प्रभावी तरीका रोग के वाहक मच्छरों के संपर्क में आने से बचना है. इस के लिये उन दवाओं का प्रयोग करना चाहिए जिनसे मच्छर दूर भाग जाते है उदाहरण हेतु ओडोमोस लम्बी बाजू के कपड़े तथा पतलून पहन लेने से कपड़ों को पाइरोर्थोइड से उपचारित करने से मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती लगा लेने, जालीदार खिड़की दरवाजों के प्रयोग से भी लाभ होता है. घर से बाहर होने वाले संक्रमण से बचने के लिए मच्छर आबादी नियंत्रण ही सबसे प्रभावी तरीका है.
… जिला में एक भी मरीज सामने नही आया है. जांच की सुविधा है, अफवाह पर लोग ध्यान नही दे.
डॉ अशोक कुमार सिंह, सिविल सर्जन
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