एसटीएफ से भी लिया सहयोग

Published at :21 Aug 2016 1:28 AM (IST)
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एसटीएफ से भी लिया सहयोग

डॉक्टर से रंगदारी मामला . घटना के पीछे कौन, उठ रहे सवाल सहरसा : डॉक्टर मामले में पुलिस ने भले ही पूर्ण उद्भेन कर समाज में सुरक्षा की अलख जगाने का काम किया है. इसकी प्रशंसा चारों ओर हो भी रही है. लेकिन लोगों के मन में एक सवाल है, जिसके उत्तर की तलाश की […]

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डॉक्टर से रंगदारी मामला . घटना के पीछे कौन, उठ रहे सवाल

सहरसा : डॉक्टर मामले में पुलिस ने भले ही पूर्ण उद्भेन कर समाज में सुरक्षा की अलख जगाने का काम किया है. इसकी प्रशंसा चारों ओर हो भी रही है. लेकिन लोगों के मन में एक सवाल है, जिसके उत्तर की तलाश की जा रही है कि आखिर जब इन दोनों का कोई अापराधिक इतिहास नहीं है तो फिर इनका आका कौन है. जो इन्हें सभी सुविधा मुहैया करा रहा था. लोगों ने कहा कि डॉक्टर के विरुद्ध ऐसा कदम उठाना बिना किसी आका के संभव नहीं है.
लोगों ने कहा कि भले ही दोनों ने पुलिस के समक्ष अपना जूर्म कबूल कर लिया है, लेकिन पुलिस के लिए घटना के मास्टरमाइंड व अपराधियों के आका का पता लगाना भी जरूरी है. लोगों ने दबी जुबान से कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि घटना के पीछे किसी सफेदपोश का हाथ हो. जिस पर हाथ देने से तो कहीं पुलिस गुरेज नहीं कर रही है. लोगों ने कहा कि छोटू के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है.
नया बाजार में सपरिवार एक छोटे व पुराने घर में किराया पर रहता है. यही स्थिति संतोष की भी है. लेकिन इस सबसे ऊपर पुलिस को अपराधियों के आका व घटना के मास्टरमाइंड को भी समाज के सामने लाना चाहिए. लोगों को यह बात कहीं से भी पच नहीं रही है कि इन दोनों ने मिल कर ही घटना का ताना-बाना बुना और अंजाम दिया. वह भी एक माफिया की तरह जो लगातार छह माह तक प्रशासन से लेकर आम लोगों को परेशानी में डाले हुआ था, जिसको खोजने में पुलिस के बाद एसटीएफ तक को लगाना पड़ा.
एसटीएफ एसपी की भी थी नजर
अपराधियों को पकड़ कर पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन परदे के पीछे का राज कुछ और ही है. सूत्रों के अनुसार मामला गर्म होने के बाद स्थानीय पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की मदद ली. जो काम पुलिस छह माह में नहीं कर पायी, एसटीएफ ने उसे कुछ दिनों में ही कर लिया. सूत्रों के अनुसार मामले की भयावहता को देखते हुए एसटीएफ के जवानों को लगाया गया. हड़ताल के दौरान ही जवानों ने मोरचा संभाल अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए कार्य शुरू कर दिया. पूरे मामले पर तेजतर्रार अधिकारियों में चुने जाने वाले पुलिस कप्तान शिवदीप लांडे नजर बनाये रखे थे.
स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ के दो जवान भी हरेक गतिविधि पर नजर बनाये थे. हालांकि इस दौरान सदर थानाध्यक्ष व टेक्निकल सेल भी पूरी सतर्कता बरत अपराधियों तक पहुंचने में कामयाब रहे. सूत्रों के अनुसार एसटीएफ ने ही कार्तिक चौधरी उर्फ छोटू को दबोचा. इसके बाद संतोष सम्राट को बलुआहा महिषी पुल से पकड़ा गया. इसके बाद संतनगर स्थित घर से हथियार व अन्य सामान को बरामद किया गया.
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