लाल होती रही है धरती जमीन की सौदेबाजी. छल-प्रपंच का होता रहा है खेल

Published at :01 Aug 2016 5:25 AM (IST)
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लाल होती रही है धरती जमीन की सौदेबाजी. छल-प्रपंच का होता रहा है खेल

रविवार को दिन दहाड़े सदर थाना क्षेत्र के बटराहा बाइपास के समीप सलखुआ प्रखंड के कबिरा निवासी राजदेव महतो (45) को बाइक सवार अपराधियों ने गोली मार जख्मी कर दिया. इस इलाके में इन दिनों यह खेल आम हो गया है. सहरसा : एक ही जमीन का टुकड़ा, दो केवाला, दो मालिक व दर्जनों दलाल […]

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रविवार को दिन दहाड़े सदर थाना क्षेत्र के बटराहा बाइपास के समीप सलखुआ प्रखंड के कबिरा निवासी राजदेव महतो (45) को बाइक सवार अपराधियों ने गोली मार जख्मी कर दिया. इस इलाके में इन दिनों यह खेल आम हो गया है.

सहरसा : एक ही जमीन का टुकड़ा, दो केवाला, दो मालिक व दर्जनों दलाल की कारगुजारी देखनी हो ,तो इन दिनों आप शहर के वाशिंग पिट इलाके में हो रहे विवादों को देख समझ सकते हैं. सदर थाना में उन जमीनों से जुड़े दर्जनों मामले अब तक दर्ज भी हो चुके हैं. इस क्षेत्र में सक्रिय दलालों द्वारा जमीन मालिक से ओने पोने दाम में विवादित जमीन खरीद ग्राहकों को ऊंची कीमत पर बेची जा रही है.

सलखुआ निवासी राजदेव महतो पर हुए जानलेवा हमले में वाशिंग पिट की जमीन से जुड़ा विवाद भी बताया जा रहा है. मिली जानकारी के अनुसा,र राजदेव बीते दो दिनों से जिले में तैनात पुलिस विभाग के किसी कर्मी को जमीन खरीदवाने में मध्यस्थता कर रहा था. पुलिस को इस बिंदु पर गहनता से जांच करनी होगी कि आखिर जमीन किसी है और कौन है वे लोग, जिन्हें राजदेव के मध्यस्थता से परेशानी हो रही थी. हालांकि उस पुलिस वालें का नाम अभी तक सामने नहीं आया है.

कही विवादित जमीन का तो नहीं था सौदा: गोलीकांड में जख्मी का इलाज व फर्द बयान के अलावा भी कई बिंदु है. जिस पर स्थानीय पुलिस तकनीकी छानबीन कर सकती है. कई बार जमीन के दो दावेदार अलग-अलग ग्राहकों से जमीन बेचने का सौदा करते हैं. लेकिन इस मामले में दोनो पक्षों के हिट लिस्ट पर भूमाफियाओं द्वारा क्षेत्रवार नियुक्त किये गये दलाल ही सामने आते हैं. उक्त जमीन के कागजात व पक्षों से मिल कर भी मामले का खुलासा हो सकता है.

नक्शे पर नहीं, मुंह पर सड़क: वाशिंग पिट इलाके में ज्यादातर जमीन नगरपरिषद के वार्ड नंबर 39 व सुलिंदाबाद पंचायत क्षेत्र के तहत आती है. इस धड़ल्ले से बिक रही अधिकांश जमीन का अभी तक नक्शे पर अंकित नहीं है, लेकिन जमीन बेचने के लिए दलाल गलत तरीके से रास्ते का उल्लेख भी कर रहे है. इसका खामियाजा जमीन पर दखल के वक्त क्रेता को झेलना पड़ रहा है. ऐसे कई मामले हैं, जिनकी तफ्तीश के बाद राजदेव पर हुए जानलेवा हमले को लेकर होने वाले अनुसंधान के जरिये इस क्षेत्र से विवादों को समाप्त किया जा सकता है.

राजदेव का कबिरा कनेक्शन : सूर्या अस्पताल में मौजूद राजदेव को जानने वाले लोग बीते पंचायत चुनाव की रंजिश को भी घटना से जोड़कर बता रहे है. उनका कहना था कि कबिरा पंचायत की सीट रिजर्व होने के बाद राजदेव समर्थक प्रत्याशी की जीत हुई थी. जिसके बाद से दूसरे पक्ष के हरेराम यादव से मनमुटाव चल रहा था. हालांकि पुलिस को दिये बयान में राजदेव ने भी हमलावर में हरेराम के शामिल होने की आशंका व्यक्त की है. फिलवक्त लोगों की नजर पुलिसिया अनुसंधन पर टिकी है. इसके अलावा राजदेव के साथ दो दिनों से हमेशा साथ रहने वाला युवक सुभाष चंद्र भी कबिरा का ही रहने वाला है. जो हमले के वक्त मौजूद नहीं था.

वाशिं पिट इलाके में कई विवादास्पद जमीन पर मुकदमा

बढ़ रही कीमत भी जिम्मेवार

बीते सात वर्ष पहले वाशिंग पिट इलाके की जमीन कृषि भूमि के तौर पर बेची जा रही थी. जिसे भूमाफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद कर आवासीय स्वरूप में बेचा जाने लगा. शहर के स्थानीय बाशिंदे भी उक्त जमीन को निवेश के रूप में खरीदने में दिलचस्पी दिखाने लगे. इसके बाद जमीन का मूल्य भी आसामन को छूने लगा. नतीजतन पूर्व में बिक चुके जमीन के दूसरे दावेदार भी रुपये के लालच में सामने आने लगे. शुरुआती दौर में कब्जे को लेकर होने वाली झड़प अब जानलेवा हमले व हत्या तक पहुंच चुकी है.

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