ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है पटाखा

Published at :02 Nov 2015 6:43 PM (IST)
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ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है पटाखा

ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है पटाखा चलो मनायें मीठी दिवालीसहरसा नगर. पर्यावरण को हरा भरा रखने के लिए सरकार पौद्यरोपण पर ध्यान केंद्रित कर रही है. इसके बावजूद पर्यावरण को दूषित कर रहे आतिशबाजी पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है. दीपावली पर आतिशबाजी का बहिष्कार कर पर्यावरण को बचाने का संकल्प ही आने वाली […]

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ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है पटाखा चलो मनायें मीठी दिवालीसहरसा नगर. पर्यावरण को हरा भरा रखने के लिए सरकार पौद्यरोपण पर ध्यान केंद्रित कर रही है. इसके बावजूद पर्यावरण को दूषित कर रहे आतिशबाजी पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है. दीपावली पर आतिशबाजी का बहिष्कार कर पर्यावरण को बचाने का संकल्प ही आने वाली पीढ़ी के लिए सौगात हो सकती है.बगैर लाइसेंस के खुली दुकानेंदीपावली के मौके पर होने वाली आतिशबाजी को देखते ही सुनायी देने वाली बच्चों की किलकारी कही इस बार चीख में न बदल जाये. स्थानीय बाजार में उपलब्ध पटाखों को बेचने के लिये न तो जिला प्रशासन से किसी ने अनुज्ञप्ति ही ली है और न ही प्रशासन ने पटाखों के मानकों की जांच ही की है. जिसकी वजह से सामूहिक रूप से दीपावली के मौके पर आतिशबाजी का मजा लेने वाले लोगों के घर पटाखों से होने वाले विस्फोट से इंकार नही किया जा सकता है. स्थानीय डीबी रोड, शंकर चौक, दहलान चौक, स्टेशन रोड में दर्जनों पटाखा की दुकान सजी हुई है. राजस्व का लगाया चूना जिला प्रशासन के संबंधित विभाग द्वारा शिथिलता बरते जाने के कारण पटाखा के दुकानदारों ने बगैर लाइसेंस के ही विस्फोटक पदार्थों की दुकानें सजा ली है. मालूम हो कि शिवकाशी व पटना से मंगाये जाने वाले पटाखों की दुकानों पर कंपनी द्वारा निर्माण में बरती गयी मानक का विवरण भी उपलब्ध नही है. शहरी क्षेत्र के दर्जनों जगहों सहित ग्रामीण इलाकों में खुलेआम विस्फोटक पटाखों की बिक्री हो रही है. लेकिन छोटे से बड़े किसी भी दुकानों में सीज फायर या अन्य विस्फोटक रोधी संयंत्रों को नहीं लगाया गया है. जबकि पूर्व में भी कई बार पटाखों की दुकान में आग लग चुकी है और लाखों की संपत्ति राख होने के साथ आम व्यक्ति भी जख्मी हो अस्पताल पहुंच चुके हैं. क्या है नियमकिसी भी विस्फोटक अथवा बारूद के उपयोग से बने सामानों की ब्रिकी के लिये जिला प्रशासन द्वारा लाइसेंस निर्गत कया जाता है. लेकिन दुर्भाग्य है कि शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों की दर्जनों दुकानों में बगैर अनुज्ञप्ति के पटाखों की ब्रिकी बेरोकटोक चल रही है. नियमों में स्पष्ट उल्लिखित है कि विस्फोटक विक्रताओं के यहां सीज फायर या आग पर त्वरित कार्रवाई पाने वाले यंत्रों का होना आवश्यक है.प्रभात अभियान: क्या बिना पटाखे के दीवाली नही मनाई जा सकती है ? ग्लोबल वार्मिंग और बच्चों की मौत को रोकने में इस दीवाली पर आपकी क्या भूमिका होगी. आप हमें फोन या व्हाट्सएप के जरिये 94318-07274 पर मैसेज व इससे जुड़ी तस्वीर भी भेज सकते है.

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