जिसने की थी सिफारिश, वही बने जांचकर्ता
Updated at : 11 Jan 2018 5:34 AM (IST)
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बीएड नामांकन. जांच को आरएम कॉलेज नहीं पहुंची टीम, लीपापोती की हो रही आशंका नामांकन नहीं लेने पर प्रॉक्टर ने प्राचार्य से की थी धक्का-मुक्की मामले का वीडियो वायरल होने पर मामले ने पकड़ा तूल नामांकन के लिए प्रतिकुलपति ने की थी अनुशंसा अब प्रतिकुलपति ही बनाये गये हैं मामले की जांचकर्ता उठने लगे विरोध […]
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बीएड नामांकन. जांच को आरएम कॉलेज नहीं पहुंची टीम, लीपापोती की हो रही आशंका
नामांकन नहीं लेने पर प्रॉक्टर ने प्राचार्य से की थी धक्का-मुक्की
मामले का वीडियो वायरल होने पर मामले ने पकड़ा तूल
नामांकन के लिए प्रतिकुलपति ने की थी अनुशंसा
अब प्रतिकुलपति ही बनाये गये हैं मामले की जांचकर्ता
उठने लगे विरोध के स्वर, विद्यार्थी संगठनों ने किया प्रदर्शन
सहरसा : राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय के बीएड में नामांकन को लेकर मचा घमसान सिर्फ स्पष्टीकरण तक ही सीमित होता दिख रहा है. विश्वविद्यालय अधिकारी से लेकर महाविद्यालय स्तर के अधिकारी लीपापोती की साजिश में लगे हैं. कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय द्वारा बनायी गयी कमेटी भी जांच के लिए अब तक नहीं पहुंच पायी है. दबंग कुलानुशासक प्रो डॉ अरविंद कुमार अपने पुत्र तंजीव कात्यायन का नामांकन कराने में सफल रहे हैं. जबकि बीएड में नामांकन में हुई अनियमितता की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आंदोलनरत है. ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा इसे ठंडे बस्ते में डाला जाना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है.
संदेह के घेरे में है कमेटी: कुलपति डॉ राय द्वारा बनायी गयी जांच कमेटी में प्रतिकुलपति प्रो डॉ फारूक अली को रखा गया है. जबकि मामले की जड़ में प्रति कुलपति की अनुशंसा ही संदेह के घेरे में हैं. ऐसे में उनके द्वारा जांच प्रभावित होने की आशंका भी लोगों द्वारा जाहिर की जा रही है. प्रतिकुलपति के पत्र के आलोक में ही समय बीत जाने के बाद तंजीव का नामांकन लिया गया था.
सही जांच से हो सकता है बड़ा खुलासा: विश्वविद्यालय द्वारा आरएम कॉलेज के बीएड विभाग में नामांकन की जांच अगर सही तरीके से की जाती है तो बड़ा खुलासा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. बीएड में नामांकन के लिए यह कॉलेज अधिकारियों का शुरू से ही चरागाह रहा है. शुरू से ही यहां अवैध नामांकन होते रहे हैं. कुलपति अगर इसकी जांच निष्पक्ष जांच कमेटी से कराते हैं तो बड़ा खुलासा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. इसकी चपेट में विश्वविद्यालय से लेकर कॉलेज प्रशासन तक आ सकता है.
आनन-फानन में लिया गया नामांकन
बीएड में नामांकन को लेकर प्रधानाचार्य एवं कुलानुशासक के बीच हुए घमसान के बाद कुलानुशासक के पुत्र तंजीव का नामांकन आनन फानन में लिया गया. अगर यह प्रावधान अनुसार होता तो समय पर ही नामांकन लिया जा सकता था. ऐसी कौन सी मजबूरी आ गयी थी जिसके कारण आनन-फानन में नामांकन लेना पड़ा. आपसी घमसान की जानकारी मिलने पर प्रतिकुलपति डॉ अली द्वारा दोनों को मधेपुरा बुलाकर समझाया गया एवं उसके बाद वहां से लौटने के बाद ही नामांकन की प्रक्रिया की गयी, ऐसे में संलिप्तता का संदेह होना लाजिमी है.
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