मिली संबद्धता, डीएलएड की डिग्री अब सहरसा में

Updated at : 04 Oct 2017 4:28 AM (IST)
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मिली संबद्धता, डीएलएड की डिग्री अब सहरसा में

सहरसा : बीते 20 सितंबर को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना के शासी निकाय की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य के गैर अनुदानित निजी 120 महाविद्यालय में संचालित डीएलएड कोर्स के संचालन एवं अध्यापन के लिए सत्र 2017-19 से संबद्धता प्रदान की जाती है. जिसमें सहरसा जिले का एकमात्र कॉलेज ईस्ट एन […]

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सहरसा : बीते 20 सितंबर को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना के शासी निकाय की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य के गैर अनुदानित निजी 120 महाविद्यालय में संचालित डीएलएड कोर्स के संचालन एवं अध्यापन के लिए सत्र 2017-19 से संबद्धता प्रदान की जाती है. जिसमें सहरसा जिले का एकमात्र कॉलेज ईस्ट एन वेस्ट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज शामिल है.

मालूम हो कि यह कॉलेज सहरसा जिले का पहला ट्रेनिंग कॉलेज है, जहां डीएलएड की पढ़ाई होगी. जिले के स्थापना काल से आज तक न तो किसी सरकारी और न ही किसी प्राइवेट संस्थान में डीएलएड कोर्स की पढ़ाई की व्यवस्था थी. जिलावासियों में हर्ष का माहौल है कि अब इस कोर्स के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं है एवं नियोजित शिक्षकों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब सवैतनिक सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिए बाहर जाना नहीं पड़ेगा. कॉलेज के चेयरमैन डॉ रजनीश रंजन ने बताया कि हमारे महाविद्यालय को एनसीटीई ने सत्र 2016-18 से ही मान्यता दी है. लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में वैधानिक शून्यता के कारण अभी 2017-19 सत्र से संबद्धता दी गयी है.

महाविद्यालय द्वारा उच्च न्यायालय पटना में याचिका दायर कर सत्र 2016-18 की मांग रखी गयी है. लेकिन वर्तमान सत्र से संबंधन मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए बिहार बोर्ड को साधुवाद दिया गया. डॉ रंजन ने बताया कि वर्तमान चालू सत्र में नामांकन के लिए विज्ञप्ति वेबसाइट पर जारी कर दी गयी है. साथ ही नामांकन की प्रक्रिया 14 अक्तूबर तक पूरी करते हुए 16 अक्तूबर से वर्ग संचालन किया जायेगा. वैसे अभ्यर्थी जिनकी आयु न्यूनतम 17 वर्ष है, साथ ही इंटरमीडिएट में 50 प्रतिशत अंक है. नामांकन ले सकते हैं. साथ ही सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षक सवैतनिक प्रशिक्षण ले सकते हैं. उनके लिए कोई बंधन नहीं है. मालूम हो कि एनसीइइ अधिनियम 2014 के अनुसार अब प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में डीएलएड डिग्री वाले ही नियोजित हो सकते हैं. इसके लिए बीएड की डिग्री लेने की जरूरत नहीं है. जबकि बीएड डिग्री प्राप्त अभ्यर्थी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में नियोजित हो सकते हैं. प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय के अप्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों के लिए बीएड की जगह डीएलएड डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन की डिग्री अनिवार्य हो गयी है. प्राइमरी व मिडिल स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को हर हाल में डीएलड की डिग्री लेनी होगी. राज्य सरकार ने अप्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों को सवैतनिक ट्रेनिंग लेनी की छूट दे रखी है. मालूम हो कि जिले में 7300 नियोजित शिक्षक हैं जिनमें से करीब 2500 से ज्यादा नियोजित शिक्षक अप्रशिक्षित हैं. जिन्हें समय रहते ट्रेनिंग लेना अनिवार्य है. जिले में ईस्ट एन वेस्ट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज को संबंधित मान्यता मिलने से इन अप्रशिक्षित शिक्षकों को काफी फायदा पहुंचेगा.

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