नहीं मिली एंबुलेंस, दर्द से छटपटा रही प्रसूता को उठा कर ले गये परिजन

Published at :23 Aug 2017 3:50 AM (IST)
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नहीं मिली एंबुलेंस, दर्द से छटपटा रही प्रसूता को उठा कर ले गये परिजन

सहरसा : सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सकों व नर्सों की लापरवाही के कारण सोमवार को प्रसव कराने के लिए भर्ती निक्की देवी के गर्भ में पल रहा बच्चा बाहर की दुनिया देखने से पहले ही मौत के मुंह में समा गया. जबकि गर्भवती निक्की भी जीवन व मौत के भंवर में फंस कर कई घंटे […]

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सहरसा : सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सकों व नर्सों की लापरवाही के कारण सोमवार को प्रसव कराने के लिए भर्ती निक्की देवी के गर्भ में पल रहा बच्चा बाहर की दुनिया देखने से पहले ही मौत के मुंह में समा गया. जबकि गर्भवती निक्की भी जीवन व मौत के भंवर में फंस कर कई घंटे सदर अस्पताल में तड़पती रही. गर्भवती निक्की की गंभीर हालत देख उसके परिजन आक्रोशित हो गये और सदर अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया.

नहीं मिली एंबुलेंस…
बावजूद इसके सदर अस्पताल प्रशासन की तत्काल निंद्रा नहीं टूटी. अस्पताल में ड्यूटी करने पहुंचे चिकित्सक डॉ आर मोहन, निक्की को को राहत देने की बजाय उसे रेफर कर अस्पताल से चलते बने. रेफर के बाद भी मरीज को ले जाने के लिए अस्पताल की ओर से एंबुलेंस की सुविधा नहीं दी गयी. परिजन मरीज को किसी तरह टांग कर अस्पताल से ले गये.
मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज प्रखंड अंतर्गत डोमराही वार्ड-2 में रहनेवाले आजाद मंडल अपनी गर्भवती पत्नी निक्की को प्रसव कराने के लिए सोमवार को सदर अस्पताल पहुंचे. उनकी पत्नी को यहां भर्ती कर नर्स द्वारा इलाज शुरू किया गया. इसी बीच निक्की को अधिक दर्द होने पर ड्यूटी पर तैनात नर्स उसका प्रसव कराने में जुट गयी. इस दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे का अगला भाग तो बाहर निकल गया. लेकिन शरीर का शेष भाग मां के गर्भ में ही फंसा रह गया. निक्की की गंभीर हालत देख नर्सों ने मोबाइल से संबंधित चिकित्सक को मामले की जानकारी देकर अस्पताल आने का आग्रह किया. लेकिन संवेदनहीन चिकित्सक ने सूचना मिलने के बाद भी अस्पताल आना उचित नहीं समझा. इस बीच निक्की बच्चे सहित स्वयं भी दर्द से घंटों कराहती रही. अस्पताल के चिकित्सक द्वारा रेफर कर देने के बाद पीड़ित परिजन किसी तरह टांग कर निक्की को साथ लेकर स्थानीय निजी हॉस्पिटल की ओर कूच कर गये. उसे एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं दी गयी. दूसरी जगह पहुंचने तक मृत हो चुके बच्चे को निकाला गया. जबकि प्रसूता की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.
सहरसा सदर अस्पताल की घटना
बच्चे की हो गयी थी मौत, जच्चा की हालत गंभीर होने पर कर दिया रेफर
डॉक्टर व नर्स पर कराया मामला दर्ज
सदर अस्पताल में प्रसव कराने आयी महिला के गर्भ में ही नवजात की मौत हो गयी. इस मामले में महिला निक्की देवी की मां सौरबाजार प्रखंड अंतर्गत कचरा निवासी विमला देवी ने सदर अस्पताल के चिकित्सक व एएनएम कर्मियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए सदर थाने में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया है. आवेदन में उन्होंने बताया कि सोमवार की सुबह दस बजे उसने अपनी लड़की को प्रसव कराने के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया. जहां सोनू नर्स ने कहा कि बाहर से खून जांच कराकर लाओ. हम गरीब एक सौ चालीस रुपये में बाहर से
डॉक्टर व नर्स…
खून जांच कराये. फिर नर्स बोली कि अल्ट्रासाउंड कराओ तो सुपर बाजार जाकर 700 रुपये में अल्ट्रासाउंड भी कराया. उसके बाद जब अस्पताल पहुंचे तो नर्स ने कहा तीन हजार रुपये दो, डाॅक्टर साहब आयेंगे तब अॉपरेशन होगा. बच्चा उल्टा हो गया है. उसके कुछ देर बाद मेरी बेटी के बच्चे का दो पैर बाहर निकल गया और वह दर्द से छटपटाने लगी तो नर्स बोली डॉक्टर साहब आते होंगे. जब डॉक्टर आर मोहन आये तो बोले कि जल्दी प्राइवेट क्लिनिक भागो, नहीं तो मार लगेगी. जल्दी अस्पताल से निकल जाओ. इसके बाद मैं पूरे शहर में दो तीन डॉक्टर के पास गयी, लेकिन बिना पैसे के किसी ने भर्ती नहीं किया. तब नया बाजार के एक चिकित्सक ने भर्ती कर एक सूई दी और मरे बच्चे को बाहर निकाला. उन्होंने बताया कि नर्स सोनू और सुनीता बच्चे का जबरदस्ती पैर खींच रही थी. उन्होंने नर्स और चिकित्सक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए सदर थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है.
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