पत्थर माफियाओं पर पुलिस की नजर

Published at :28 Apr 2017 5:29 AM (IST)
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पत्थर माफियाओं पर पुलिस की नजर

रात 11 बजे के बाद गिट्टी लदे वाहनों को कराया जाता है पास सासाराम नगर : शहर में चौक-चौराहों पर पत्थर माफियाओं की हर गतिविधि पर पुलिस की नजर है. क्रशर मंडी में कार्रवाई के बाद पुलिस गिट्टी आपूर्ति को टारगेट कर कार्रवाई करेगी. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिट्टी लदे वाहनों को […]

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रात 11 बजे के बाद गिट्टी लदे वाहनों को कराया जाता है पास

सासाराम नगर : शहर में चौक-चौराहों पर पत्थर माफियाओं की हर गतिविधि पर पुलिस की नजर है. क्रशर मंडी में कार्रवाई के बाद पुलिस गिट्टी आपूर्ति को टारगेट कर कार्रवाई करेगी. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिट्टी लदे वाहनों को पार करवाने को लेकर पत्थर माफियाओं व उनके लोग चौक चौराहों पर खड़े होकर पुलिस की रेकी करते हैं. शहर में जेल गेट, न्यू एरिया, धर्मशाला पोस्ट ऑफिस चौक, करगहर मोड़, संतपॉल मोड़, गैस एजेंसी फजलगंज, बेदा नहर, ताराचंडी धाम, बुढ़न मोड़ आदि जगहों पर पत्थर माफिया बाइक लिए खड़ा रहते हैं. इनका नेटवर्क क्रशर मंडी से गंतव्य तक सक्रिय रहता है.
पुलिस गतिविधि की जानकारी मोबाइल से गिट्टी लदे वाहनों के चालकों को देते हैं. इनके नेटवर्क में पुलिस के लोग भी शामिल हैं. एसपी के निर्देश पर इन को दबोचने के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया है. वहीं, चौक-चौराहों पर जमे माफियाओं की गुप्त तरीके से वीडियो फुटेज भी बनाया जा रहा है. गौरतलब है कि क्रशर मंडी से शहर में आनेवाले वाहनों को माफिया अपने देख रेखे में गंतव्य तक पहुंचाते है. सुबह के चार बजे सात बजे तक मात्र तीन घंटे के समय में गिट्टी लदे सैकड़ों वाहनों को पार कराया जाता है. यही स्थिति रात में भी देखा जाता है. आरा पटना व बक्सर के लिए रात 11 बजे के बाद गिट्टी लदे वाहनों को दोनों ओवरब्रिज से पार कराने का खेल शुरू होता है. सूत्र बताते हैं कि रात पेट्रोलिंग में निकले पुलिसकर्मी पत्थर माफियाओं के सबसे बड़े सहायक होते हैं. बंधी बंधाई मोटी रकम प्राप्त होती है. आखिर क्या कारण है कि 15 किलोमीटर, तीन थाना क्षेत्र व बीच शहर से होते हुए दर्जनों ट्रक, डंपर व हाइवा गिट्टी लोड कर आराम से निकल जाते हैं. पुलिस दिखावे की कार्रवाई करती है. इससे आहत एक पुलिस अधिकारी ने कहा सोमवार की रात क्रशर मंडी में हुई में बंद पड़े क्रशर ही मंडी में देखे जाते थे. इस से साफ जाहिर है कि पुलिस के अधिकारी ही माफियाओं के सहयोगी हैं.
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