स्थापना के आठ साल बाद भी नहीं खुला विद्यालय

Published at :20 Mar 2017 12:44 AM (IST)
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स्थापना के आठ साल बाद भी नहीं खुला विद्यालय

परेशानी. शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप हाल उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय देवरिया टोला का दिनारा (रोहतास) : शिक्षा पर देश भर में बड़ी रकम खर्च की जाती है. बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापन लगाये जाते हैं. कई स्वयंसेवी संस्थाओं सहित कई सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं अशिक्षा रूपी अंधकार […]

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परेशानी. शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप

हाल उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय देवरिया टोला का
दिनारा (रोहतास) : शिक्षा पर देश भर में बड़ी रकम खर्च की जाती है. बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापन लगाये जाते हैं. कई स्वयंसेवी संस्थाओं सहित कई सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं अशिक्षा रूपी अंधकार को दूर करने के लिए लगातार काम करती हैं. लेकिन पढ़ाई के लिए पाठशाला की जरूरत होती है. जब पाठशाला ही न हो तो पढ़ाई कैसे होगी. देवरियां टोला के लोगों का दर्द देखा जाये, तो शिक्षा के प्रति शिक्षा विभाग की गंभीरता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. गुप्तेश्वर चौधरी उर्फ साधु चौधरी कहते हैं कि दूसरे चरण में शिक्षक नियोजन में दो रिक्तियां प्राप्त थीं पर नियोजन ही नहीं हो सका. वहीं तीसरे चरण के नियोजन में शिक्षा विभाग द्वारा कोई रिक्ति नहीं निकाली गयी है. जिसके चलते विद्यालय संचालित नहीं हो रहा है.
लगभग पांच सौ अतिपिछड़ी आबादी वाला गांव देवरियां टोला बिक्रमगंज- दिनारा पथ पर स्थित है. ग्रामीणों की मांग पर शिक्षा विभाग द्वारा 2008 में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की गयी, पर स्थापना के आठ साल बाद भी कोई शिक्षक योगदान नहीं कर पाया. गांव के सभी बच्चे राजपुर मध्य विद्यालय में नामांकित हैं. राजपुर मध्य विद्यालय की दूरी देवरियां टोला से लगभग एक किमी है. राजपुर जाने के लिए दिनारा-बिक्रमगंज मुख्य सड़क से होकर जाना पड़ता है. रफ्तार से जाने वाली गाड़ियों वाली सड़क पकड़ कर जाना बच्चों के लिए कितना कठिन है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं. इसी से डर कर कितने लोग अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजते व जो भेजते भी हैं वो दिल पर पत्थर रख कर.
ग्रामीणों की व्यथा : ग्रामीण योगेश्वर चौधरी कहते हैं कि विद्यालय की स्थापना के बाद आस जगी कि अब हमारे बच्चे गांव में ही आसानी के साथ पढ़ सकेंगे ,पर स्थापना के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी विद्यालय संचालित नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई अधर में है. उपेंद्र चौधरी कहते हैं कि शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी शिक्षकों का योगदान नहीं हो सका, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है. धनजी चौधरी कहते हैं कि नजदीक के विद्यालयों में मेन सड़क से होकर जाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. ग्रामीण लाला चौधरी कहते हैं कि हमलोग मजदूरी करते हैं, आर्थिक तंगी के चलते स्कूल गाड़ियों से अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में नहीं भेज सकते व सरकारी विद्यालय में पढ़ाई ही शुरू नहीं हो सकी. गांव के बच्चों का भविष्य अंधकार मय है.
क्या कहते हैं अधिकारी
दूसरे चरण के शिक्षक नियोजन में देवरियां टोला में दो रिक्ति प्राप्त थी, पर नियोजन ही नहीं हो सका. इससे विद्यालय चालू नहीं हो सका. वहीं तीसरे चरण के शिक्षक नियोजन में देवरिया टोला का नाम ही नहीं था. इस विषय में विभाग के वरीय पदाधिकारियों से पत्राचार भी किया गया था, पर अभी तक मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हो सका है.
रामजी राय, प्रखंड़ शिक्षा पदाधिकारी
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