सदर अस्पताल बीमार !

न दवा-पानी, न ही डॉक्टर सासाराम (ग्रामीण) : मुख्यालय का सदर अस्पताल खुद बीमार हो गया है. वह अपनी इलाज का रोना रो रहा है. अधिकारियों की लापरवाही से मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. समुचित देखभाल के अभाव में मरीजों के बेडों पर जानवरों का कब्जा है. समायानुसार पेयजल आपूर्ति, मरीजों […]
न दवा-पानी, न ही डॉक्टर
सासाराम (ग्रामीण) : मुख्यालय का सदर अस्पताल खुद बीमार हो गया है. वह अपनी इलाज का रोना रो रहा है. अधिकारियों की लापरवाही से मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. समुचित देखभाल के अभाव में मरीजों के बेडों पर जानवरों का कब्जा है. समायानुसार पेयजल आपूर्ति, मरीजों को दी जाने वाली सुविधाएं भी नदारद हैं और अस्पताल परिसर में जलजमाव व कचड़ों का अंबार लगा हुआ है. यही नहीं अस्पताल की व्यवस्थाएं कागजी घोड़े बन कर दौड़ रही हैं.
सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये संसाधन भी बंद पड़े हैं. चिकित्सकों व इसके अधिकारियों की लापरवाही से व्यवस्था में दिनोदिन गिरावट आयी है. इससे सदर अस्पताल से मरीजों का विश्वास उठता नजर आ रहा है. ऐसी स्थिति में इस अस्पताल का वजूद खतरे में पड़ा हुआ है. अस्पताल में नियमित बेडों को भी नहीं बदला जा रहा है.
बंद पड़ी हैं कई सेवाएं
अल्ट्रासाउंड, एक्सरे मशीन व ब्लड बैंक लंबे समय से बंद पड़े हैं. सूत्रों के अनुसार, विभाग पर बकाया राशि व लापरवाही से आल्ट्रा साउंड व एक्सरे मशीन बंद पड़े है. इससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
थमी एंबुलेंस की रफ्तार
सदर अस्पताल में उपलब्ध 102 एंबुलेंस सेवा भी ठप है. अधिकारियों के मुताबिक एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर चले गये हैं. लेकिन, विभाग ने आजतक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाया, इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
गंदगी का पर्याय
अस्पताल में परिसर में कूड़े का ढेर लगा है और सड़कों पर पानी लगा है. ऐसी स्थिति में अस्पताल मच्छरों का प्रजनन केंद्र बन गया है. इससे इलाज को कौन कहे, संक्रामक बीमारी फैलने की संभावनाएं बन गयी हैं.
डॉक्टरों की भी कमी
सदर अस्पताल में महिला चिकित्सकों के छह पद सृजित हैं, जिसमें हाल में दो चिकित्सकों ने योगदान किया है अन्य चिकित्सकों की भी है कमी है. अनुबंध के आधार पर चिकित्सक बहाल हैं जिनका वेतन लंबित है.
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