ओवरब्रिज बनाना जरूरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Jan 2017 8:32 AM (IST)
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मुख्यमंत्री की यात्रा के बाद रिंग रोड बनाने की कवायद तेज सासाराम नगर : शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए रिंग रोड बनाने की 10 वर्षों से कवायद चल रही थी. इधर, 22 दिसंबर को मुख्यमंत्री निश्चय यात्रा के बाद थोड़ी हलचल बढ़ गयी है. अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री भी प्रमुखता […]
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मुख्यमंत्री की यात्रा के बाद रिंग रोड बनाने की कवायद तेज
सासाराम नगर : शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए रिंग रोड बनाने की 10 वर्षों से कवायद चल रही थी. इधर, 22 दिसंबर को मुख्यमंत्री निश्चय यात्रा के बाद थोड़ी हलचल बढ़ गयी है. अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री भी प्रमुखता से रिंग रोड बनाने के लिए डीएम को निर्देश दिये थे.
मगर रिंग रोड की राह में बेदा व दयालपुर रेलवे क्रॉसिंग सबसे बड़ी बाधा बन सकता है. रिंग रोड शहर से उत्तरी दिशा में बननी है. दक्षिण में पहले से ही सड़क है. एसपी जैन कॉलेज गेट से ताराचंडी धाम फोरलेन में मिल जाता है. वहीं, शहर के सटे मिनी बाइपास है. जिससे शहर में बिना इंट्री किये वाहन आ जा सकते हैं. उत्तर की दिशा में जेल के समीप सतसंग ब्यास के सटे उत्तर रेलवे क्रॉसिंग (दयालपुर) पार कर जगजीवन कैनाल पार कर नहर मार्ग से लालगंज पुल स्थित सासाराम-आरा पथ में मिल जायेगा. यहां से दो रास्ता हो जा रहा है. पहला जगजीवन कैनाल के रास्ते बेदा नहर पुल तक व दूसरा मोकर पुल से गारा लाइन नहर के रास्ते बाराडीह पुल होते हुए बेदा डग स्थित रेलवे क्रॉसिंग पार कर पुराने जीटी रोड से मिल जायेगा. यहीं नये बस पड़ाव का निर्माण होना है.
रिंग रोड बनने से पटना व बक्सर से आने जानेवाली गाड़ियां सुगमता से बिना शहर में इंट्री किये आ जा सकती है. डेहरी आने-जानेवाले वाहनों के लिए भी यह रोड कारगर साबित होगा. शहर के बीचो-बीच रेलवे लाइन गुजरी है. रिंग रोड की राह में रेलवे क्रॉसिंग बाधा बन सकती है. ग्रांड ट्रैक के गया-मुगलसराय रेल खंड पर प्रतिदिन लगभग 180 से दो सौ ट्रेनें अप-डाउन में गुजरती है. यानी पांच से सात मिनट पर एक ट्रेन गुजरती है. उस स्थिति में गुमटी बंद रहेगा. गुमटी बंद होने पर परिचालन प्रभावित होगा, तो जाम लगेगा ही. जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ही रिंग रोड का निर्माण होना है. फिर वहीं समस्या आ सकती है. शहर में पहले से ही दो रेलवे ओवरब्रिज तकिया व गौरक्षणी है. रिंग रोड के कारगर बनाने के लिए दो ओवरब्रिज बनाना होगा, तभी रिंग रोड सार्थक हो सकता है.
जीटी रोड से पांच सौ मीटर की दूरी पर गुमटी
पुराने जीटी रोड से पांच सौ मीटर दूरी पर दोनों ही जगह बेदा डग व सतसंग ब्यास नगर दयालपुर गुमटी है़ अगर पांच मिनट भी गुमटी बंद रही, तो वाहनों की कतार जीटी रोड तक पहुंच जायेगी. जैसे ही वाहनों की कतार जीटी रोड तक पहुंची इस रोड पर दबाव बन जाता है़ इस समस्या से निजात दिलाने के लिए यह कवायद चल रही है. हालांकि, फिलहाल इससे छूटकारा मिलना मुश्किल दिख रहा है.
ओवरब्रिज का निर्माण इतनी धीमी गति से होता है कि उसमें वर्षों लग जाता है. शहर की पुरानी ओवरब्रिज का निर्माण करने में 10 वर्ष लगे थे. इसी तकिया ओवरब्रिज का निर्माण करने में सात वर्ष लग गये. यानी अभी शहरवासियों को आनेवाले 10-12 वर्षों तक जाम से मुक्ति नहीं मिलनेवाली है. तब तक शायद रिंग रोड का निर्माण हो जाये. उस पर वाहनों का परिचालन भी शुरू हो जाये, मगर जिस उद्देश्य को ले कर रिंग रोड बनना है. उसमें सफलता कि गुंजाईश नहीं दिख रहा है. आनेवाले एक-दो वर्षों में मालवाहक लाइन (फ्रेट कॉरिडर) शुरू हो जायेगा. उस समय तो शायद ही कभी रेलवे क्रॉसिंग खुला रहे. पांच ट्रैक से ट्रेन का परिचालन शुरू होने पर हर मिनट एक ट्रेन गुजरेगी. अभी तो तीन ट्रैक पर प्रति पांच मिनट पर एक ट्रेन गुजरती है.
ओवरब्रिज का प्रस्ताव सरकार को भेजा जायेगा
रिंग रोड में कोई बाधा नहीं है. दो जगह रेलवे क्रॉसिंग है. उस पर ब्रिज बनेगा. इस योजना को हरी झंडी मिलते ही ओवरब्रिज का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा जायेगा. जिस रास्ते पर रेलवे क्रॉसिंग होता है. वहां ओवरब्रिज बनाया जाता है. इस लाइन पर फ्रेट कॉरिडोर लाइन निर्माणाधीन है. इसके शुरू होते ही रेलवे क्रॉसिंग का कोई मतलब नहीं रह जायेगा. चूंकि हर मिनट एक ट्रेन का गुजरना तय है. फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण माल ढुलाई के लिए किया जा रहा है. ताकि, बिना बाधा के मालवाहक ट्रेन का परिचालन हो. जहां जरूरत होगी ओवरब्रिज बनेगा.
अनिमेष कुमार पराशर, डीएम, रोहतास
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