ePaper

कोर्ट परिसर की सुरक्षा पर सवाल बेधड़क प्रवेश हो रहे अवांछित वाहन

Updated at : 20 Dec 2019 8:11 AM (IST)
विज्ञापन
कोर्ट परिसर की सुरक्षा पर सवाल बेधड़क प्रवेश हो रहे अवांछित वाहन

सासाराम कोर्ट : उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पिछले दिन सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हत्याकांड के एक आरोपित की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. इस हत्याकांड के बाद इलाहाबाद हाइकोर्ट ने न्यायालय की सुरक्षा को लेकर स्वत: संज्ञान ले लिया है. यह तो हुई उत्तर प्रदेश के न्यायालय की सुरक्षा की […]

विज्ञापन

सासाराम कोर्ट : उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पिछले दिन सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हत्याकांड के एक आरोपित की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. इस हत्याकांड के बाद इलाहाबाद हाइकोर्ट ने न्यायालय की सुरक्षा को लेकर स्वत: संज्ञान ले लिया है. यह तो हुई उत्तर प्रदेश के न्यायालय की सुरक्षा की बात.

लेकिन, उससे भी संवेदनशील है सासाराम व्यवहार न्यायालय, जहां बीते दिनों बाइक में बम विस्फोट की घटना सहित कई बार कैदी भी भाग निकले हैं. हर बार घटना के बाद न्यायालय की सुरक्षा की समीक्षा होती है और सुरक्षा को लेकर कुछ नया या फिर बदलाव होता है. लेकिन, वह कितना असरदार है, इसकी बानगी पेश कर रहे हैं.
गुरुवार को न्यायालय परिसर में खड़ी वैसी बाइकें, जिस पर न्यायालय द्वारा जारी सुरक्षा स्टीकर भी नहीं लगा है, न्यायालय से सिर्फ चार चक्का वाहनों के लिए स्टीकर की व्यवस्था दी गयी थी. फिर बाइक न्यायालय परिसर में लग रहे हैं, तो सुरक्षा कैसी है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. यह हो सकता है कि बाइक किसी अधिवक्ता की हो, लेकिन उसकी जांच कितनी मुस्तैदी से हो रही है, यह तो देखने व समझने की बात है.
गेट पर ही है मेटल डिटेक्टर : व्यवहार न्यायालय के गेट पर मेटल डिटेक्टर लगा है. उससे गुजरने पर आवाज भी आती है. तीन-चार महिला व पुरुष बल भी तैनात हैं. पर, उनकी मुस्तैदी कितनी है, इसकी बानगी यही है कि मशीन की आवाज पर ही पूरी तरह निर्भर हैं. किसी भी आंगतुक को कभी रोकने व टोकने की जहमत नहीं उठाते. हां, ड्यूटी जरूर समय से निभाते रहते हैं.
न्यायालय के बाहर बाइकों की भीड़ से खतरा
व्यवहार न्यायालय के सामने सड़क के किनारे बड़ी संख्या में बाइकें खड़ी रहती हैं. पार्किंग के अभाव में खड़ी बाइकों के कारण पुराने जीटी रोड का यातायात भी प्रभावित होता है. जबकि इसी जगह पर बाइक में बम का विस्फोट की घटना घट चुकी है.
उस समय सुरक्षा कारणों से न्यायालय परिसर से सटे एक ओर की जमीन को पुलिस ने खाली रखने का इंतजाम किया था. बाइको के लिए बनी पार्किंग इतनी छोटी और अतिक्रमित है कि वहां की अपेक्षा चार गुना अधिक बाइकें सड़क पर खड़ी हो जाती हैं.
कहते हैं अधिवक्ता
यह बड़ी समस्या है. न्यायालय परिसर में बाइक का खड़ा होना खतरे से खाली नहीं है. विधिज्ञ संघों के अधिकारियों को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए. अगर बेहद जरूरी है, तो बाइकों के लिए भी स्टीकर के साथ जांच की व्यवस्था होनी चाहिए. मेटल डिटेक्टर लगे तो हैं, पर वहां पुलिस बल की मुस्तैदी उतनी नहीं, जीतनी होनी चाहिए. पूर्णत: मशीन पर निर्भर रहना ठीक नहीं है.
राजेश कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता
घटनाक्रम
फरवरी 2003 में निवर्तमान जिला पार्षद सुदामा यादव को टारगेट बना बम से हमला, पार्षद बचे, पर तीन लोग घायल
जुलाई 2004 में सिविल कोर्ट परिसर में अधिवक्ता पर बम से हमला, अधिवक्ता बचे, पर तीन पैरवीकार घायल
फरवरी 2006 में कोर्ट हाजत परिसर में बम से हमला कर छह कुख्यात अपराधियों को भगाया
11 मार्च 2016 को कचहरी के सामने बाइक में बम विस्फोट, बाइक सवार दरिगांव थाना क्षेत्र के रजोखर गांव निवासी एक अधिवक्ता का लिपिक विजय शंकर कुशवाहा घायल
13 जुलाई 2016 में न्यायालय परिसर के सामने बाइक में बम विस्फोट, बाइक सवार नगर थाना क्षेत्र के भारतीगंज मुहल्ला निवासी सचिन महतो उर्फ गुड्डू की मौत
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन