डॉ रीभा को पटना में मिला रामधारी सिंह ''दिनकर'' सम्मान

Updated at : 29 Aug 2018 4:40 AM (IST)
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डॉ रीभा को पटना में मिला रामधारी सिंह ''दिनकर'' सम्मान

सासाराम ऑफिस : बिहार के ख्यातिनाम दिव्यांग संगठनों के तत्वावधान में मंगलवार को पटना के स्काडा बिजनेस, होटल चाणक्या, सोन भवन में हुए 18वें बिहार सम्मान समारोह में सासाराम जिला रोहतास की बेटी डॉ. रीभा तिवारी को उनकी कृति ‘दिव्यांगता एक वरदान’ के लिए रामधारी सिंह दिनकर सम्मान से विभूषित किया गया. डॉ रीभा तिवारी […]

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सासाराम ऑफिस : बिहार के ख्यातिनाम दिव्यांग संगठनों के तत्वावधान में मंगलवार को पटना के स्काडा बिजनेस, होटल चाणक्या, सोन भवन में हुए 18वें बिहार सम्मान समारोह में सासाराम जिला रोहतास की बेटी डॉ. रीभा तिवारी को उनकी कृति ‘दिव्यांगता एक वरदान’ के लिए रामधारी सिंह दिनकर सम्मान से विभूषित किया गया. डॉ रीभा तिवारी को यह सम्मान बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माझी के करकमलों से प्रदान किया गया. इस अवसर पर संजय कांत प्रसाद उप आयुक्त दिव्यांगजन, नयी दिल्ली तथा बिहार के आयुक्त दिव्यांगजन डॉ शिवाजी कुमार सहित बड़ी संख्या में स्वैच्छिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे. इस सम्मान समारोह में उन शख्सियतों को भी सम्मानित किया गया जोकि दिव्यांगजनों की सेवा के क्षेत्र में लगे हुए हैं.

गौरतलब हो कि लेखन के क्षेत्र में सक्रिय डॉ रीभा तिवारी जहां अब तक दो पुस्तकें लिख चुकी हैं. वहीं इन्होंने दो पुस्तकों का संपादन भी किया है. इतना ही नहीं डॉ रीभा द्वारा लिखित रचनाएं देश की ख्यातिनाम पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं. डॉ रीभा तिवारी की दिसंबर, 2017 में प्रकाशित ‘दिव्यांगता एक वरदान’ पुस्तक अपने प्रकाशन समय से ही राष्ट्रीय चर्चा का विषय है. देश के 55 सफल दिव्यांगों पर लिखी गई इस कृति के लिए डॉ रीभा तिवारी को रामधारी सिंह दिनकर सम्मान से पूर्व जबलपुर की साहित्यिक संस्था ‘वर्तिका’ द्वारा राष्ट्रीय दिव्यांग चेतना अलंकरण, प्रभात खबर द्वारा अपराजिता सम्मान, भारतीय साहित्यकार संसद समस्तीपुर, बिहार द्वारा ‘महर्षि अष्टावक्र साहित्य शिखर सम्मान’ मिल चुके हैं. डॉ रीभा तिवारी का कहना है कि किसी भी तरह के सम्मान से जहां खुशी मिलती है वहीं कुछ और करने का जज्बा भी पैदा होता है.

उन्होंने प्रभात खबर को बताया कि आज मैंने देखा कि किस तरह लोगों ने निःशक्तता को अपनी ताकत बनाया है. ‘दिव्यांगता एक वरदान’ पुस्तक के माध्यम से ही मैं उन लोगों से रू-ब-रू हो सकी जिन्होंने अपने अदम्य साहस से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है. मैं अब बिहार के उन दिव्यांग साथियों के बारे में भी लिखना चाहती हूं जोकि देश-दुनिया में बिहार और देश का नाम रोशन कर रहे हैं. मैं बिहार सिविल सोसाइटीज समर्पण, बिहार विकलांग खेल अकादमी, पैरालम्पिक कमेटी आफ बिहार, बिहार स्पेशल ओलिंपिक, बिहार नेत्रहीन खेल संघ, बिहार डेफ स्पोर्ट्स एसोसिएशन, बिहार विकलांग छात्र संगठन, इंडियन स्पोर्ट्स फेडरेशन आफ आटिज्म,

एक्शन फार आल, तलाश व इंडियन स्पोर्ट्स फेडरेशन फार सेरेब्रल पाल्सी के पदाधिकारियों की आभारी हूं जिन्होंने मेरी कृति को रामधारी सिंह दिनकर सम्मान के लायक माना. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माझी ने कहा कि ‘दिव्यांगता एक वरदान’ पुस्तक उन लोगों के लिए नजीर है जोकि थोड़ी सी परेशानी आने पर हौसला हार जाते हैं. उप आयुक्त दिव्यांगजन संजयकांत प्रसाद ने कहा कि ऐसी पुस्तकें हर किसी को पढ़नी चाहिए.

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