खनन पर रोक के बावजूद बालू माफियाओं का धंधा बेरोकटोक

Published at :09 Aug 2017 12:15 PM (IST)
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खनन पर रोक के बावजूद बालू माफियाओं का धंधा बेरोकटोक

लुकाछिपी. सरकार के ओदश का अनुपालन कराने में प्रशासन विफल डेहरी सोन नदी से उत्तर प्रदेश जाता है बालू सासाराम नगर : प्रदेश सरकार ने बालू खनन पर एक जुलाई से 30 सितंबर तक रोक लगा दी है. रोक के बाद भी जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर डेहरी स्थित सोन नदी में बालू का […]

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लुकाछिपी. सरकार के ओदश का अनुपालन कराने में प्रशासन विफल
डेहरी सोन नदी से उत्तर प्रदेश जाता है बालू
सासाराम नगर : प्रदेश सरकार ने बालू खनन पर एक जुलाई से 30 सितंबर तक रोक लगा दी है. रोक के बाद भी जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर डेहरी स्थित सोन नदी में बालू का अवैध तरीके से खनन धड़ल्ले से हो रहा है. इससे सरकार को लाखों रुपया राजस्व का नुकसान हो रहा है.
खनन माफिया फल -फुल रहें है. एक जुलाई से पहले एक ट्रैक्टर बालू की कीमत दो हजार पांच रुपये थी और अब इसकी कीमत छह हजार हो गयी है. एक माह में बालू की कीमत दोगुना से ज्यादा हो गया है. आने वाले 15 दिनों में कीमत तिगुना हो जायेगी. खनन पर रोक से बालू माफिया फायदे में है और सरकार को हर तरह से नुकसान हो रहा है. एक जुलाई से 30 सितंबर तक रोक लगने के कारण बालू का कीमत बढ़ा है. दरअसल इस समयावधि में नदी में बाढ़ कि स्थिति रहती है और बालू घाट डूब जाते है. कोई अनहोनी न हो इसलिए सरकार हर वर्ष खनन पर रोक लगा देती है.
खनन पर रोक के बाद सरकार को हो रहा राजस्व का नुकसान: खनन माफिया सरकारी आदेश से पहले की तरह अब भी बालू खनन से लेकर उसके स्टोरेज व बिक्री तक सब कुछ कर रहे हैं. लेकिन लिखा पढ़ी में केवल पहले से जमा किये हुए बालू का पुराना स्टॉक ही दिखाते है. वह ऐसा स्टॉक होता है जो कभी खत्म नहीं होता है.
बालू की बिक्री लगातार चल रही है. यानी सरकारी आदेश का पालन करने के लिए कागज में बालू की बिक्री बंद रहती है. इससे सरकार व लोगो को काफी नुकसान हो रहा है. स्थानीय प्रशासन कि लापरवाही से खनन माफिया मालामाल हो रहे है. सबसे बड़ी बात है कि सोन ब्रिज के समीप से बालु का खनन हो रहा है. नेशनल ग्रिन ट्रिब्यूनल ब्रिज से एक चिह्नित एरिया है जहां उसके अंदर बालु का खनन नहीं करना है. इससे ब्रिज के पाये पर सीधा असर पड़ेगा.
जिला मुख्यालय है बालू का बड़ा बाजार
जिला मुख्यालय सासाराम बालू का बड़ा बाजारहै. धर्मशाला चौंक से लेकर बौलिया मोड़ तक पुरानी जीटी रोड के दोनों तरफ करीब पांच दर्जन बालू लदे ट्रैक्टर व ट्रक खड़ा रहते है.
भले ही इन दिनों वाहनों की संख्या कम हो गयी है. रेलवे मैदान में बालू व्यवसायी हर वक्त सैकड़ों ट्रक बालू का स्टॉक रखते है. इस मंडी से कैमूर जिले में बालू ले जाया जाता है. करीब चौदह प्रखंडों के लोग सासाराम से बालू खरीद कर ले जाते है. जिला बालू का बड़ा बाजार है. सोन नदी के लाल बालू का दूसरे प्रदेशों में अच्छी डिमांड है. मुनाफा ज्यादा है इससे माफिया पुलिस से उलझने में भी संकोच नहीं करते.
सोन नदी के बालू की उत्तर प्रदेश में बड़ी डिमांड
सोन नदी के बालू का पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में काफी डिमांड है. प्रतिदिन तीन से पांच सौ ट्रक बालू उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाता है. खनन पर प्रतिबंध के बाद वाहनों की संख्या कम हो गयी है. लेकिन प्रतिदिन बालू लदे वाहन सोन नदी से निकल अपने गंतव्य की ओर जा रहे है. सोन नदी के डेहरी , भड़कुड़िया, अमियावर , तिलौथू आदि घाटों से चोरी छिपे बालू का खनन हो रहा है.
ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं है. जानकारों कि माने तो बालू का खेल उच्च स्तर पर होता है. जिले में बालू व पत्थर दोनों मलाईदार धंधा है. पत्थर पर पिछले 10 साल से प्रतिबंध है. बालू पर तीन महीने के लिए प्रतिबंध है. बावजूद बालू का धंधा चरम पर चल रहा है. क्योंकि पत्थर से जुड़े लोग भी बालू माफियाओं से रिश्तेदारी जोड़ ये लोग भी खनन में लगे हैं.
बालू घाट पर पुलिस व माफिया के बीच झड़प
दरिहट थाना क्षेत्र के अकोढ़ीगोला पडुहार घाट पर अवैध बालू निकासी कि सूचना पर छापेमारी करने गयी पुलिस व बालू माफियाओं के बीच झड़प हो गयी
बालू माफिया पुलिस से जबरन बालू लदे चार ट्रेक्टर छुड़ा ले गये. थानाध्यक्ष सियाराम सिंह पुरी तैयारी से बालू घाट पर अवैध खनन के विरूद्ध कार्रवाई की, लेकिन माफिया पुलिस पर भारी पड़े और ट्रैक्टर उनके कब्जे से जोर जबरजस्ती कर ले गये. जानकार बताते है कि जब बड़े साहब ही मैनेज है तो थानाध्यक्ष बेचारे क्या कर लेंगे. यह सही भी है तीन दिन बाद भी पुलिस इस मामले में दोषियों को नहीं पकड़ सकी है.
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