Bihar News: पटना में अटल पथ पर नाबालिग दौड़ा रहे थे कार, असिस्टेंट कमिश्नर को रौदा, मौके पर ही हुई मौत

Updated at : 27 Dec 2021 8:03 AM (IST)
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Bihar News: पटना में अटल पथ पर नाबालिग दौड़ा रहे थे कार, असिस्टेंट कमिश्नर को रौदा, मौके पर ही हुई मौत

हादसा इतना भीषण था कि आसपास के लोग भी देख घबरा गये. दरअसल, करीब 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड रही बेकाबू कार अनियंत्रित होकर पहले रेलिंग से टकरायी और इसके बाद स्कूटी सवार असिस्टेंट कमिश्नर व एक बाइक सवार को रौद दिया.

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पटना के पाटलिपुत्र थाने के इंदपुरी रोड नंबर चार के सामने अटल पथ पर रविवार की देर शाम हुए हादसे में सेल्स टैक्स के असिस्टेंट कमिश्नर असीम कुमार (37 वर्ष) की मौत हो गयी और एक अन्य घायल हो गया. हादसा इतना भीषण था कि आसपास के लोग भी देख घबरा गये. दरअसल, करीब 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड रही बेकाबू कार अनियंत्रित होकर पहले रेलिंग से टकरायी और इसके बाद स्कूटी सवार असिस्टेंट कमिश्नर व एक बाइक सवार को रौद दिया.

मौके पर ही असिस्टेंट कमिश्नर की मौत हो गयी. वही दूसरे को पाटलिपुत्र स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. पुलिस ने बताया कि जिस स्विफ्ट डिजायर कार से हादसा हुआ है, वह पटना की नागेश्वर कॉलोनी के उदय कुमार सिन्हा के नाम पर है. स्थानीय लोगों के मुताबिक कार नाबालिग चला रहे थे. हादसे मे घायल बाइक सवार विश्वास आर्या (36 वर्ष) दीघा थाने के रामजीचक बाटा में रहते है. प्रत्यकदर्शियो ने बताया कि कार में फंसने के बाद स्कूटी और बाइक तीन-चार बार गेद की तरह पलटी. इस बीच कार स्कूटी और बाइक को काफी दूर तक घसीटते हुए ले गयी, जिससे दोनों स्कूटी व बाइक के परखचे उडं गये.

बीपीएससी 56वीं परीक्षा में था 26वां रैंक

हादसे के बाद मृत असिस्टेंट कमिश्नर के ऑफिस के साथी भी मौके पर पहुंचे. ऑफिस के दोस्तों ने बताया कि असिम 11 पशासनिक नौकरी को छोड़कर सेल्स टैक्स विभाग को ज्वाइन किया था. उन्होंने बीपीएससी 56वी परीक्षा मे 26वां रैक लाया था और बिहार वित सेवा मे टॉपर रहे थे. अस्पताल पहुंचे पिता, पत्नी और छोटे भाई का रो-रोकर बुरा हाल था. असीम के दो बच्चे है. एक आठ साल का बेटा अंकुर व चार साल की बेटी है. उनकी पत्नी स्वपना रानी पटना मे एसबीआइ बैक में अधिकारी है.

पिता ने साइकिल से फेरी कर बेटे को बनाया था अधिकारी

दोस्तों ने बताया कि असीम हमेशा कहता रहता था कि मेरे पिता (विजय कुमार पसाद) ने मुझे पढ़ाने के लिए काफी मेहनत की है. वह साइकिल से फेरी कर मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया है. मै आज जो भी हूं, अपने माता- पिता की वजह से हूं. लेकिन आज वह मां-बाप व बीवी-बच्चों को छोड़ चला गया. कभी भाई तो कभी पत्नी असीम के शव को पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे.

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