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वीके ठाकुर ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को दिखाया आइना, कहा-गठबंधन की राजनीतिक मजबूरी कबतक?

कहा-गठबंधन की राजनीतिक मजबूरी कबतक

मौजूदा हाल में कांग्रेस का वजूद बचाने के लिए बतायी कड़ी मशक्कत की जरूरत

उठाया कार्यकर्ताओं के सम्मान का सवाल, खामियों को दुरुस्त करने की दी सलाह

पूर्णिया. इस साल के अक्टूबर-नवंबर माह में बिहार विधानसभा का चुनाव होने वाला है. प्राय: सभी पार्टियों ने चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है. सत्ता और विपक्ष अपने-अपने तरीके से तैयारी में जुटे हुए हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस भी अपनी जमीन तलाशने मे जुटी हुई है. कभी यह इलाका कांग्रेस का गढ़ माना जाता था लेकिन गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस अब इक्के-दुक्के सीटों पर नजर आती है. पूर्णिया जिले की सात में से एक सीट पर कांग्रेस टिमटिमा रही है. ऐसे में पार्टी को अपना वजूद बचाने के लिए कड़ी मशक्कत की जरूरत है. यह अहसास तो पहले से ही कांग्रेसियों को है लेकिन अब यह सवाल पार्टी के अंदर से भी उठने लगे हैं. गुरुवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में जिस तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीके ठाकुर ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को आइना दिखाया उससे एक बात स्पष्ट हो गयी है कि पार्टी कार्यकर्ताओं में पार्टी के कार्यकलाप से बहुत खुश नहीं है.

आखिर कमेटी के विस्तार में इतनी देरी क्यों

दरअसल, बीते गुरुवार को जिला कांग्रेस के संगठन का विस्तार होना था. इस मौके पर बिहार प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी शहनवाज आलम समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता पहुंचे हुए थे. इसी दौरान कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता वी के ठाकुर ने पार्टी की मौजूदा हालात और लचर संगठन पर खरी-खरी सुनायी. उन्होंने कहा कि लोग पार्टी से जुड़ना चाहते हैं पर हमलोग सोये हुए हैं. न संगठन है और न कोई कार्यक्रम. कई जिलों में कमेटियां नहीं है. अध्यक्ष के चुनाव और जिला कमेटी के विस्तार में इतना बड़ा गेप क्यों है?

जिला कांग्रेस के विस्तार में आखिर इतना वक्त क्यों लग गया?

पिछले साढे आठ सालों से प्रदेश कांग्रेस कमेटी नहीं है. पार्टी दंतहीन, विषहीन हो गयी है. आखिर कांग्रेस किस ओर जा रही है. इन सब चीजों क दुरूस्त करने की जरूरत है. प्रखंड कमेटी सक्रिय नहीं है. संगठन का सत्यानाश हो गया है. लोग पार्टी से जुड़ने के लिए आतुर हैं लेकिन हम हैं कि कुछ करते ही नहीं है. पार्टी के नेताओं को भला-बुरा कह रहे हैं? पहले तो कांग्रेस के स्लीपर सेल को ठीक करने की जरूरत है. मंडल कमेटी के गठन की बात कही गयी थी. जानना चाहते हैं कि कितने जिलों में मंडल कमेटी गठित हुई. गांव-देहात में कितने जगह कार्यकर्ता सम्मेलन हुए. आखिर यह किसकी जवाबदेही है.

‘माल महराज का मिर्जा खेले होली’

श्री ठाकुर ने कहा कि राजनीतिक दृष्टि से सीमांचल का यह इलका पूरे प्रदेश में महत्वपूर्ण है.आपको हंसकर-रोकर यहां के कार्यकर्ताओं को सम्मान देना होगा और आपको लेना होगा. जहां तक गठबंधन की बात है. अगर गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस को साथ देते हैं तो उनके साथ, अगर वे साथ नहीं देते हैं तो उनके बिना और अगर वे विरोध करते हैं तो इसके बावजूद कांग्रेस को अपने बलबूते पर चुनाव की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. आखिर कबतक यह सिलसिला चलता रहेगा. नामांकन की अंतिम तारीख तक उम्मीदवार टिकट के लिए आस लगाये बैठे रहते हैं. यह स्थिति मत रखिये. आप पहले ही तय कर लीजिये कि पार्टी किस-किस सीट पर लड़ेगी. एक कहावत है ‘माल महराज का मिर्जा खेले होली’. वोट कांग्रेस का और मजा ले कोई और. अगर गठबंधन की राजनीतिक मजबूरी है तो उसे पहले ही क्लियर कर लीजिये. पार्टी के कार्यकर्ता अभी से चुनाव की तैयारी में जुट जायेंगे. एक बात तय है कि सीट आयेगी तो पार्टी का ही भला होगा वरना जैसे हैं वैसे रहेंगे.

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Prabhat Khabar News Desk
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