सांसद ने संसद में केंद्र की आर्थिक नीतियों पर किया प्रहार

Edited by ARUN KUMAR
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पूर्णिया को स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं क्या गया?

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आखिर क्या वजह है कि पूर्णिया को स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं क्या गया? पूर्णिया. पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से पूर्णिया को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने की मांग की. उन्होने मंगलवार को लोकसभा में इस मसले को उठाते हुए कहा कि भागलपुर, मुज्जफरपुर, दरभंगा जैसे शहरों में अबतक मेट्रो नहीं है. उन्होने सवालिया लहजे में पूछा कि आखिर पूर्णिया को स्मार्ट सिटी में अबतक शामिल क्यों नहीं किया गया? उन्होंने पूर्णिया को स्मार्ट सिटी का दर्जा देने का आग्रह किया ताकि बुनियादी सुविधाएं बढ़ायी जा सके. सांसद ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि किसानों, मध्यम वर्गों और गरीबों पर जीएसटी का बोझ असहनीय हो गया है. उन्होंने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रसोई से जुड़ी वस्तुओं पर से जीएसटी पूरी तरह हटाये जाने से आग्रह किया. पप्पू यादव ने कहा कि आज किसान को 6,000 रुपये देकर सरकार उससे जीएसटी के रूप में कई गुना वसूल रही है. उन्होंने एमएसएमइ क्षेत्र में बंद हो रही 37,468 इकाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि 2024-25 में अकेले 17,639 एमएसएमइ बंद हुईं, जो 169% की भयावह वृद्धि है. उन्होंने सरकार से पूछा क्या यह आर्थिक विकास है या विनाश? स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता जताते हुए पप्पू यादव ने कहा कि अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांचों की लागत आम आदमी के लिए बहुत ज्यादा है. उन्होंने आयुष्मान कार्ड योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह घोटाला है, असली मदद नहीं मिल रही. उन्होंने सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारी जाए और निजी अस्पतालों पर नियंत्रण लगे. शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए पप्पू यादव ने कहा कि “आज डेढ़ करोड़ में मेडिकल, एक करोड़ में आइआइटी- आइआइएम और 50 लाख में इंजीनियरिंग की डिग्री मिल रही है. उन्होंने पूछा क्या इस बजट में गरीब, एससी-एसटी, ओबीसी और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए कोई ठोस प्रावधान है? उन्होंने मांग की कि शिक्षा पूरी तरह मुफ्त होनी चाहिए और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें मिडिल क्लास के बच्चों को पढ़ाना है. क्या उनके लिए बजट में कोई प्रावधान रखा गया है? पप्पू यादव ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों और मध्यम वर्ग की अनदेखी कर रही है. महंगी शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाएं और बंद होते उद्योग साबित करते हैं कि नीतियां जनविरोधी हैं. उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की.

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