माता शम्बुकेश्वरी काली मंदिर में पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं, दूर-दराज से उमड़ती है भक्तों की भीड़

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मंदिर | Prabhat Khabar Network

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पूर्णिया का माता शम्बुकेश्वरी काली मंदिर सीमांचल प्रमंडल के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस पावन देव आनंदालय परिसर में माता काली के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. यहाँ आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है, जिससे यह स्थान दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है.

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पूर्णिया शहर का माता शम्बुकेश्वरी काली मंदिर सिर्फ जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे सीमांचल प्रमंडल के श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है. फोर्ड कंपनी चौक से सटे देव आनंदालय परिसर में स्थित इस पावन मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों भक्त माता के दर्शन और पूजन-अर्चन के लिए पहुंचते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से मां की शरण में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है और कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता.

देव आनंदालय: एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन

जिला मुख्यालय की मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित यह मंदिर पूर्णिया के प्राचीन और ऐतिहासिक देव स्थलों में से एक माना जाता है.

  • प्रतिमाएं: इस मंदिर परिसर में माता काली के अलावा भगवान श्री कृष्ण, माता राधा, भगवान भोलेनाथ और अन्य कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं.
  • नामकरण: एक ही प्रांगण में अनेक देव स्वरूपों के विराजमान होने के कारण ही इस स्थान का नाम ‘देव आनंदालय’ रखा गया है.

विद्वान पंडितों द्वारा यहां रोजाना शास्त्रोक्त विधि और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नियमित पूजन अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है.

कष्टों का निवारण और सुख-समृद्धि का प्रतीक

माता शम्बुकेश्वरी काली मंदिर के प्रति समाज के हर वर्ग के लोगों में गहरी श्रद्धा है. स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां माता के दर्शन मात्र से ही जीवन के तमाम कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं.

शांति और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर लोग यहां नियमित रूप से आते हैं. विशेष रूप से प्रत्येक अमावस्या की रात को तांत्रिक व वैदिक रीति से महापूजा और विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है, जिसमें भाग लेने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

काली पूजा और नवरात्र पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

शारदीय व चैत्र नवरात्र के साथ-साथ दीपावली के अवसर पर आयोजित होने वाली वार्षिक काली पूजा के दौरान मंदिर की छटा दर्शनीय होती है.

  • आकर्षक सजावट: त्योहारों के मौकों पर पूरे मंदिर परिसर को भव्य विद्युत सज्जा और ताजे फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है.
  • लाखों की भीड़: इन विशेष पर्वों पर पूर्णिया ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में शीश नवाते हैं.


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अखिलेश चंद्रा

लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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