फॉर्मर रजिस्ट्री में पूर्णिया राज्य में तीसरे पायदान पर पहुंचा

Published by :ARUN KUMAR
Published at :03 May 2025 6:29 PM (IST)
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फॉर्मर रजिस्ट्री में पूर्णिया राज्य में तीसरे पायदान पर पहुंचा

फॉर्मर रजिस्ट्री

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पूर्णिया. पूर्णिया जिला फॉर्मर रजिस्ट्री में राज्य में तीसरे स्थान पर है. दरअसल, एग्री स्टैक योजना अंतर्गत फॉर्मर रजिस्ट्री किया जा रहा है. इसके अंतर्गत पूर्णिया जिले के 107 गांवों में 2 लाख तीस हजार दो सौ तेइस किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री करने का लक्ष्य केंद्र सरकार से प्राप्त है. इसके अंतर्गत किसानों का सर्वप्रथम ई केवाइसी किया जाता है तथा उसके पश्चात फॉर्मर रजिस्ट्री किया जाता है. वर्तमान में जिले में कुल 10192 किसानों का ई केवाइसी किया गया है तथा 4236 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री पूर्ण कर लिया गया है. फॉर्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य कृषि तंत्र में चुनौतियों का समाधान करने हेतु एक डिजिटल सार्वजनिक ढांचा तैयार करना है. डीएम कुंदन कुमार ने जिला कृषि पदाधिकारी को किसानों के बीच में इसके लाभ के बारे में तथा फॉर्मर रजिस्ट्री कराने के लिए किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया.जिला पदाधिकारी ने बताया कि फॉर्मर रजिस्ट्री से किसानों का एक समेकित डेटाबेस तैयार होगा जो किसानों की भूमि, फसल का प्रकार आदि की जानकारी उपलब्ध होगी. इससे सरकार किसानों के लिए बेहतर योजना बना सकेगी तथा विभिन्न लाभों को बिना किसी देरी के उपलब्ध करा पायेगी. जिला पदाधिकारी ने किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री के लिए अपनी जमीन से संबंधित कागजातों, आधार कार्ड तथा मोबाइल नंबर के साथ अपने क्षेत्र में कृषि समन्वयक, कृषि सलाहकार एवं संबंधित हल्का के राजस्व कर्मचारी से संपर्क कर अपना फॉर्मर रजिस्ट्री करने को कहा है. जिला पदाधिकारी ने सभी राजस्व कर्मचारी, सभी अंचल अधिकारी तथा कृषि विभाग के सभी कर्मियों एवं पदाधिकारियों को निदेश दिया है कि प्रतिदिन कैंप में ससमय उपस्थित हो कर अधिक से अधिक किसानों का फॉर्मर आईडी बनाना सुनिश्चित करें.

फार्मर रजिस्ट्री के लाभ

-फॉर्मर रजिस्ट्री से किसानों को फसल ऋण, फसल बीमा और आपदा राहत प्रदान करने में सुविधा उपलब्ध होगी.

-पीएम किसान योजना अंतर्गत लाभ हेतु फॉर्मर रजिस्ट्री आवश्यक है.

-किसान रजिस्ट्री का उपयोग कृषि के साथ-साथ गन्ना, उद्यान, मत्स्य, खाद्य एवं विपणन आदि अन्य सम्बन्धित विभागों द्वारा अपनी योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए किया जा सकेगा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज के विपणन में आसानी होगी.

-किसानों को समय पर वांछित सलाह उपलब्ध कराना, विभिन्न संस्थाओं द्वारा किसानों से सम्पर्क के अवसर बढ़ाना तथा नवीन कार्यक्रमों के विस्तार में सफलता प्राप्त करना.

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