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ऑटो-टोटो पर बच्चा ढोने पर पाबंदी के खिलाफ किया प्रदर्शन

Updated at : 02 Apr 2025 6:41 PM (IST)
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ऑटो-टोटो पर बच्चा ढोने पर पाबंदी के खिलाफ किया प्रदर्शन

सड़कों पर उतरे ऑटो चालक व संचालक

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सरकार के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे ऑटो चालक व संचालक

प्रदर्शन करते हुए ऑटो-टोटो चालकों ने जमकर की नारेबाजी, दिया धरना

दी धमकी- अपना फैसला शीघ्र वापस ले सरकार वरना जाएंगे हड़ताल पर

पूर्णिया. ऑटो-टोटो पर बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने पर पाबंदी के सरकार के फैसले के खिलाफ बिहार स्टेट जिला ऑटो-टोटो चालक संघ के बैनर तले चालक और संचालक बुधवार को सड़कों पर उतर आए. ऑटो-टोटो के चालकों और संचालकों ने प्रदर्शन किया और धरने पर बैठकर सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. बाद में संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाध्यक्ष मो.जहांगीर उर्फ लड्डू के नेतृत्व में डीएम से मुलाकात कीऔर उन्हें मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जिसमें इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए हड़ताल पर जाने की धमकी दी गयी है . पिछले एक अप्रैल से लागू की गयी इस पाबंदी के खिलाफ जिले के तमाम ऑटो-टोटो चालक एवं संचालक बुधवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम के समीप इकट्ठा हुए. यहां तमाम लोगों ने सरकार के इस फैसले पर रोष जताया और कहा कि सरकार ने यह नियम लागू कर उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है. यहां इकट्ठा हुए ऑटो-टोटो चालक जिलाध्यक्ष मो.जहांगीर के नेतृत्व में स्टेडियम से निकल कर प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए गिरजा चौक, आर एन साव चौक होकर थाना चौक पहुंचे और धरना पर बैठ गये. इससे पहले सबने सरकार की पाबंदी पर कई सवाल खड़े किए. जिलाध्यक्ष मो जहांगीर ने कहा कि बड़े घराने के बच्चे अपने निजी वाहन से या बस से स्कूल पहुंच जाते हैं, जबकि ऑटो-टोटो में गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चे ही स्कूल आते-जाते हैं. सरकार के इस फैसले से गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चों का स्कूल जाना तो मुश्किल हो ही जाएगा, साथ-साथ आटो टोटो चालकों की रोजी-रोटी पर भी आफत आ जायेगी.

बंद होगा आय का जरिया, गरीब बच्चों पर होगा असर

इस अवसर पर ऑटो-टोटो चालकों और संचालकों ने साफ कहा कि इस फैसले से न केवल उनकी आय का जरिया बंद हो जाएगा बल्कि निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों का भी आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा. न्यूनतम आय वाले अभिभावकों के बच्चों का तो स्कूल जाना ही बंद हो जाएगा. चालकों ने इसका खुलासा करते हुए कहा कि ऑटो का किराया हर माह 800 से 1000 रुपये प्रति बच्चा है जबकि स्कूल बसों का किराया 3000 से 3500 रुपया प्रति बच्चा है. दूसरी बड़ी बात है कि गली मुहल्ले के ऐसे स्कूल जिनके पास खुद की बसें नहीं है और वहां मिडिल क्लास एवं ऑटो चालकों के बच्चे पढ़ने जाते हैं. सरकार के इस फैसले से उनके स्कूलों में भी ताला लग जाएगा.

फैसला वापस लेकर सही समाधान ढूंढ़े सरकार

जिला ऑटो-टोटो चालक संघ ने सरकार से यह फैसला वापस लेकर समस्या का सही समाधान ढूंढ़ने की मांग की है. जिलाध्यक्ष ने कहा शहर के अंदर ऑटो एवं ई रिक्शा के लिए रूट कलर कोडिंग के फैसले को लागू करने का फरमान जारी किया है जबकि उस अधिसूचना के अनुसार रूट कलर कोडिंग को लागू करने से पहले इस फैसले से उत्पन्न समस्याओं का समाधान करना जरूरी है. शहर के अंदर सभी ऑटो स्टैंडों का निर्माण, ई रिक्शा चार्जिंग प्वाइंट का निर्माण एवं जगह जगह पर सवारी चढ़ाने एवं उतरने के लिए जगह चिह्नित करने की बात की गयी थी लेकिन इसकी कोई पहल नहीं हो सकी. संघ के सदस्यों ने फैसला वापस लिए जाने की मांग मुखर होकर उठायी और यदि यह फरमान जल्द वायस नहीं लिया गया तो सभी ऑटो-टोटो चालक हड़ताल पर चले जायेंगे. इस मौके पर महासचिव विनोद चौधरी, सचिव प्रवेश खान, संयुक्त सचिव विजय कुमार मिश्रा, उपाध्यक्ष आफताब आलम, कोषाध्यक्ष दिलीप शर्मा सहित सैकड़ों ऑटो-टोटो चालक शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH CHANDRA

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