बढ़ता जा रहा नवरात्र का उत्साह, श्रद्धा से की गई मां कुष्माण्डा की पूजा

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Oct 2024 4:53 PM

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श्रद्धा से की गई मां कुष्माण्डा की पूजा

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आज होगी देवी के पांचवें स्वरुप स्कंदमाता की पूजा कर भक्त मांगेंगे मन्नतें

महाआरती के लिए पूजन पंडालों में सुबह शाम जुट रही श्रद्धालुओं की भीड़

पूर्णिया. मंदिरों व पूजन पंडालों में मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धा भाव से की और सुख समृद्धि की कामना की. कई जगह बाल भक्तों ने भी मां के प्रति श्रद्धा दिखाई और मां की ज्योति जलायी. दुर्गा पूजा को लेकर पंडालों व मंदिरों में दिन भर पूजा-अर्चना को लेकर तांता लगने लगा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु दुर्गा पाठ कार्यक्रम में सम्मिलित हो रहे है. दूसरी तरफ संध्या में महाआरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते है. शारदीय नवरात्र को लेकर जिले का पूरा वातावरण भक्ति में हो गया है. सोमवार को देवी दुर्गा के पांचवें स्वरुप स्कंदमाता की पूजा होगी. रविवार को शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मंदिरों में मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की गई. सुबह से ही मंदिरों व पूजन पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था. श्रद्धालुओं ने नारियल चुनरी व श्रृंगार भेंट करके सुख समृद्धि की कामना की. सुबह की आरती में श्रद्धालुओं ने शिरकत करके मां के दरबार में हाजिरी लगायीऔर दुर्गा स्वरूप मां की प्रतिमा पर पीले रंग के फूल चढ़ाकर पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की. शहर के सिटी काली मंदिर, पूरणदेवी मंदिर, गुप्त काली मंदिर समेत विभिन्न देवी मंदिरों में भी पूजन-दर्शन के लिए लोगों की कतार लगी दिखी. इन मंदिरों में श्रद्धालु प्रथम नवरात्र से ही सुबह व सांय पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं. इस पर्व को लेकर शहर से गांव तक लोगों में विशेष उत्साह है.

आज होगी पांचवें स्वरुप की पूजा

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है. इस हिसाब से सोमवार को शारदीय नवरात्र का पांचवा दिन है और इस दिन मां दुर्गा के पांचवे रूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता हैं जिस कारण इन्हें स्कंदमाता भी कहा जाता है. बालरूप में भगवान स्कंद इनकी गोद में विराजमान होते हैं. यह मान्यता है कि स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए इनकी उपासना करने वाला भी कांतिमय हो जाता है. पंडितों के मुताबिक स्कंदमाता की पूजा पीले वस्त्र पहनकर करना शुभ होता है. पूजा में घी का दीप जलाने, मां को फल-फूल आदि चढ़ाने के बाद पांच प्रकार के मिष्ठान और केले का भोग लगा कर आरती का विधान बताया गया है.

फोटो-6 पूर्णिया 3- मंदिर में पूजा के लिए पहुंचीं महिलाएं.

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नोट- फोटो रात में जायेगा.

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