श्वांस संबंधी मामलों में 60 प्रतिशत से अधिक अस्थमा के मरीज

Edited by SATYENDRA SINHA
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जीवन जीने के लिए सबसे जरूरी है सांसें और सांस लेने के लिए हर व्यक्ति को स्वच्छ हवा चाहिए, लेकिन जिस तरीके से हमारा पर्यावरण प्रदूषित हुआ है उसके परिणाम एक-एक कर सामने आ रहे हैं.

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अस्थमा दिवस पर विशेष

दूषित वातावरण से बढ़ रही है दमा रोग की समस्या

पूर्णिया. जीवन जीने के लिए सबसे जरूरी है सांसें और सांस लेने के लिए हर व्यक्ति को स्वच्छ हवा चाहिए, लेकिन जिस तरीके से हमारा पर्यावरण प्रदूषित हुआ है उसके परिणाम एक-एक कर सामने आ रहे हैं. विशेष तौर पर विभिन्न माध्यमों से हो रहे वायु प्रदूषण ने सभी जीवों में श्वांस संबंधी परेशानियां बढ़ा दी हैं. इससे हमारा श्वसन तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इसने न सिर्फ अस्थमा रोग को बढ़ाने में अपना योगदान दिया है बल्कि दमा रोग से प्रभावित लोगों के जीवन में अटैक जैसे खतरे की संभावना को भी बढ़ा दी है. जिले में अगर अस्थमा मरीजों की बात की जाये तो जितने भी श्वसन से संबंधित मामले इलाज के लिए यहां आते हैं उनमें से करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में अस्थमा की शिकायत मिल रही है जो एक बड़ी चेतावनी है.

विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि यह संक्रामक रोग नहीं है बल्कि अधिकतर मामले आनुवांशिक पाए जाते हैं. इसकी शुरुआत एलर्जी से होती है यह किसी भी तरह की हो सकती है. धूल, धुआं, बदलता मौसम, स्वच्छता का अभाव आदि की वजह से लगातार छींक आना, आंखों से पानी गिरना इसकी प्रारंभिक अवस्था के लक्षण हैं. ये लक्षण अस्थमा रोग के लिए ट्रीगर का काम करते हैं. पूर्णिया में इन तमाम स्थितियों की संभावना दिखायी देती है. जिले के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यूबी सिंह का कहना है कि स्वच्छता में कमी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है. अमूमन बच्चों में इसके आरंभिक लक्षणों को लोग नजरअंदाज कर देते हैं जिसकी वजह से उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनमें अस्थमा रोग की परेशानी भी बढ़ती जाती है. अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन उचित उपचार और देखभाल के साथ इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है. अस्थमा से पीड़ित लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं. वर्तमान में वायु प्रदूषण की वजह से अस्थमा के मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. इस बीमारी से छोटे बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्ग और वृद्ध सभी प्रभावित हो रहे हैं. अस्थमा के प्रति जन जागरूकता एवं शिक्षा के लिए हर वर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है.

अस्थमा मरीजों के लिए सलाह

एलर्जी पैदा करने वाले कारणों से परहेज जरूरी छींक, खांसी, नाक और आंखों से पानी की शिकायत आते ही चिकित्सक से सलाह लेंवर्ष में एक बार इन्फ्लुएंजा और 5 साल में न्यूमोनिया वैक्सीन लगवा लेने से बढ़ती है सुरक्षा शरद गरम, धूल, दूषित हवा, धुंआ, धूम्रपान आदि से दूरीयात्रा के वक्त नाक पर मास्क लगाएं भोजन में विटामिन सी के श्रोत टमाटर, नींबू वगैरह का सेवन जरूरी

रहने, खाने पीने में हमेशा स्वच्छता का ख्याल रखेंविशेष परिस्थिति के लिए इन्हेलर रखें …………………….

बोले चिकित्सक

पूर्णिया में श्वसन संबंधी समस्याएं काफी ज्यादा हैं. अस्थमा और सीओपीडी दोनों में लगभग एक समान लक्षण दिखते हैं इसे पता लगाना थोड़ा कठिन है. जब भी श्वसन संबंधी रोग से प्रभावित मरीज आते हैं तो लक्षण के आधार पर उनसे रोग से संबंधित पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में भी जानकारी ली जाती है. इसके अलावा एक मशीन के द्वारा मरीज की फूंक से अस्थमा का पता लगाया जाता है. फिर उन्हें तत्काल दवा और खान पान, रहन सहन संबंधी एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है और निर्देश दिए जाते हैं कि उन्हें जिन चीजों से एलर्जी हो उससे दूरी बना लें. डॉ. यूबी सिंह, छाती रोग विशेषज्ञ

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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