आंवले के पेड़ की परिक्रमा कर श्रद्धा के साथ की गई भगवान विष्णु की पूजा

Published by : AKHILESH CHANDRA Updated At : 30 Oct 2025 5:24 PM

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अक्षय नवमी पर महिलाओं ने की सुख-शांति व समृद्धि की कामना

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अक्षय नवमी पर महिलाओं ने की सुख-शांति व समृद्धि की कामना

पूजन अनुष्ठान के बाद किया अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार दान

पूर्णिया. गुरुवार को अक्षय नवमी के अवसर पर आंवला पेड़ के नीचे सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की और आंवला पेड़ के नीचे ही बैठ कर महाप्रसाद ग्रहण किया. इस दौरान निर्धनों को भी भोजन कराया गया. महिलाओं ने इस अवसर पर विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा की तथा पीला धागे को आंवले में लपेटकर परिक्रमा भी लगायी. शहर के विभिन्न इलाकों में आंवला वृक्ष के नीचे सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाओं ने भगवान विष्णु से सुख शांति और समृद्धि की कामना की. इसी क्रम में शहर के रामबाग स्थित प्रोफेसर कॉलोनी में अक्षय नवमी का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जहां आंवला वृक्ष के नीचे खिचड़ी का भोग लगाकर पूजन-अनुष्ठान किया गया. यहां 115 वर्ष की वृद्ध महिला भी काफी आस्था के साथ आंवला के वृक्ष के नीचे विष्णु भगवान एवं माता लक्ष्मी का पूजन कर प्रसाद ग्रहण की. मान्यताओं के आलोक में महिलाओं ने आंवले के पेड़ का पूजन कर परिवार के लिए आगे सुख- समृद्धि की लिए प्रार्थना की और जय- तप करने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान भी किया.

यह मान्यता है कि आज के दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करते-करते एक साथ देवों के देव महादेव और भगवान विष्णु का पूजन करने का विचार किया और पृथ्वी पर आंवले की वृक्ष के नीचे एक साथ भगवान विष्णु और महादेव का पूजन कर तथा आंवले के पेड़ के नीचे खिचड़ी बनाकर दोनों देवों को माता लक्ष्मी ने भोजन कराया तब से आंवले के वृक्ष की पूजा एवं अच्छे नवमी का त्यौहार मनाया जाने लगा. वैसे, यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद शुभ दिन माना गया है. यही वजह है कि मान्यताओं का निर्वाह करते हुए श्रद्धालुओं द्वारा पूजा के दौरान पंडितों को चावल, दाल, आलू, आवंला, सोना, वस्त्र आदि के दान किए गये.

आंवला नवमी का महत्व

इस दिन दान और पूजन से अक्षय अनंत गुणा फल मिलता है. पद्म पुराण में कार्तिकेय से भगवान शिव ने कहा था कि आवंला वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है. ऐसे में यह वृक्ष विष्णु प्रिय है. व्रत के स्मरण से गोदान के बराबर का फल प्राप्त होता है. यह भी कहा जाता है कि अमर आंवले के वृक्ष को स्पर्श मात्र से ही दोगुणा तथा फल सेवन पर तीन गुणा फल प्राप्त होता है.

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