श्रीनगर के खुट्टी धुनैली में दो दिवसीय संतमत सत्संग का भव्य समापन, संतों ने कहा— ‘सत्संग से ही संभव है मानव जीवन का कल्याण’

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संतमत सत्संग

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Santmat Satsang:पूर्णिया के श्रीनगर प्रखंड में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के समापन पर संतों की अमृतवाणी सुनने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. संतों ने कलयुग में ईश्वर भक्ति और सत्संग के महत्व को बताते हुए कहा कि यही मानव जीवन के कल्याण का एकमात्र मार्ग है.

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Santmat Satsang: पूर्णिया के श्रीनगर से शाहजहां की रिपोर्ट: पूर्णिया जिले के श्रीनगर प्रखंड अंतर्गत खुट्टी धुनैली पंचायत सरकार भवन परिसर में आयोजित दो दिवसीय भव्य संतमत सत्संग कार्यक्रम का बुधवार को विधि-विधान और महाप्रसाद (भंडारा) के साथ समापन हो गया. इस आध्यात्मिक समागम के अंतिम दिन सहरसा जिले के प्रसिद्ध बैद्यनाथपुर आश्रम और स्थानीय अमित धाम से पधारे उच्च कोटि के संतों ने अपनी मर्मस्पर्शी व ज्ञानवर्धक अमृतवाणी से मौजूद जनसमुदाय को निहाल कर दिया. सत्संग के आयोजन से पिछले दो दिनों से पूरा खुट्टी धुनैली और आसपास का इलाका पूरी तरह से भक्तिमय माहौल में सराबोर नजर आया.

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“जानकर भी पुण्य का भागी न बनना कलयुग का सबसे बड़ा दुर्भाग्य” — पूज्य संत

सत्संग के मुख्य मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महर्षि मेंहीं आश्रम (बैद्यनाथपुर, सहरसा) से पधारे महर्षि मेंही योगानंद जी महाराज, गुरु प्रसाद महाराज जी, सुभानंद जी महाराज एवं श्रीनगर अमित धाम के अमित आनंद जी महाराज ने संयुक्त रूप से आध्यात्मिक उपदेश दिए.

संतों ने जीवन के सत्य और उसके मर्म को समझाते हुए कहा:

  • कल्याण का मार्ग: प्रत्येक मनुष्य यह भली-भांति जानता है कि संतमत सत्संग में उपस्थित होने और सच्चे मन से ईश्वर की भक्ति में लीन होने से ही मानव जीवन का वास्तविक कल्याण और मोक्ष संभव है.
  • कलयुग का प्रभाव: यह कलयुग का दौर है, जहाँ इंसान जानबूझकर भी पुण्य कर्मों और सत्संग से दूरी बना लेता है, जो कि मानव जीवन का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है. इस भौतिकवादी युग में जो लोग ईश्वर की शरण में आकर पुण्य के भागी बनते हैं, वे बेहद सौभाग्यशाली हैं.

महाभंडारे का हुआ आयोजन; भक्तों ने समझे जीवन के वास्तविक मूल्य

सत्संग के समापन सत्र के बाद समस्त खुट्टी धुनैली ग्रामीणों और आयोजन समिति के सहयोग से एक भव्य महाभंडारे (लंगर) का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में पहुंचे महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया.

दो दिनों तक चले इस समागम में दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों ने संतों की वाणी के ज्ञान रूपी सागर में गोते लगाए. कई श्रद्धालुओं ने कहा कि संतों के विचारों को सुनकर उन्हें मानसिक शांति मिली है और उन्होंने जीवन को सदाचार, परोपकार और व्यसनमुक्ति के साथ जीने का संकल्प लिया है. आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध ग्रामीणों ने सराहनीय भूमिका निभाई.

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