कॉलेज में गुणवत्ता के साथ छात्र-छात्राओं को समान अवसर देना अहम : डॉ. प्रमोद भारतीय

लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी
– गोरेलाल मेहता कॉलेज में उच्च शिक्षण संस्थानों में लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी बनमनखी. गोरेलाल मेहता कॉलेज के पारिजात प्रांगण में गुरुवार को उच्च शिक्षण संस्थानों में लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद भारतीय ने कहा कि कॉलेज में पारिवारिक एवं समतामूलक वातावरण विकसित करना उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान उसके वातावरण और मूल्यों से होती है. कॉलेज में गुणवत्ता के साथ-साथ समानता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा छात्र-छात्राओं को समान अवसर प्रदान किए जा रहे हैं.उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी संगोष्ठियां विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना को सुदृढ़ करती हैं. कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी कौशल किशोर प्रसाद ने किया.इस अवसर पर डॉ. गिरिधारी हजारा, डॉ. रमीज अहमद, डॉ. चांदनी कुमारी, डॉ. रणविजय कुमार, डॉ. शारदा वंदना, आनंद सागर, डॉ. प्रणव प्रशांत, डॉ. काजल कुमारी, डॉ. अंकिता आनंद, डॉ. अर्पिता राय, प्रधान सहायक सह लेखापाल बाबुल कुमार शर्मा, सुबोध कुमार साह, किशोर कुमार, जीवछ कुमार, अमरनाथ कुमार, अनिल कुमार, अंजलि कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. ——————– आभासी दुनिया को वास्तविक जीवन में लागू करने से बचे युवा पीढ़ी: शैलेश प्रीतम मुख्य वक्ता बनमनखी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शैलेश प्रीतम ने कहा कि वर्तमान समय में लैंगिक संवेदनशीलता केवल शैक्षणिक विमर्श का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है. शिक्षण संस्थान केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक मूल्यों के विकास के प्रमुख केंद्र भी हैं.उन्होंने छात्र-छात्राओं से समानता, पारस्परिक सम्मान और जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया.एसडीपीओ ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी फिल्मों और सोशल मीडिया से अत्यधिक प्रभावित है, जिसके कारण कई बार वे आभासी दुनिया को वास्तविक जीवन में लागू करने की भूल कर बैठते हैं.उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने, अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने और भावनात्मक निर्णयों में सतर्कता बरतने की सलाह दी. साथ ही उन्होंने कानून की जानकारी को आवश्यक बताते हुए कहा कि अधिकारों और कर्तव्यों की समझ ही एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करती है. प्रत्येक कॉलेज में मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र जरूरी: प्रो. इन्तेखाबुर रहमान संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में भूपेंद्र नारायण मण्डल विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं जीएलएम कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. इन्तेखाबुर रहमान ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक समानता के मुद्दों पर अपने विचार रखे.उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को संवेदनशील और प्रभावशाली बनाने के लिए विद्यार्थियों की मानसिक एवं भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना अत्यंत आवश्यक है. प्रो. रहमान ने कहा कि बढ़ते प्रतिस्पर्धात्मक दबाव, संवादहीनता और सामाजिक भेदभाव के कारण युवाओं में अवसाद, चिंता और मानसिक तनाव की समस्याएं बढ़ रही हैं.उन्होंने प्रत्येक कॉलेज में मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों को समय पर उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके.उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षमता और प्रतिभा के स्तर पर महिला और पुरुष समान हैं तथा दोनों को समान अवसर मिलना चाहिए.
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