73 चिकित्सकों के भरोसे टिकी 17 लाख की आबादी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Apr 2019 6:50 AM

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मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों के वेतन के अलावे हर साल मुंगेर के स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च करती है. बावजूद मुंगेर वासियों को स्वास्थ्य सेवा का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा. जिसका सबसे बड़ा कारण चिकित्सकों की कमी है. मुंगेर में सदर अस्पताल सहित विभिन्न पीएचसी को मिला कर कुल […]

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मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों के वेतन के अलावे हर साल मुंगेर के स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च करती है. बावजूद मुंगेर वासियों को स्वास्थ्य सेवा का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा. जिसका सबसे बड़ा कारण चिकित्सकों की कमी है.

मुंगेर में सदर अस्पताल सहित विभिन्न पीएचसी को मिला कर कुल 154 चिकित्सकों का पद स्वीकृत है. किंतु वर्तमान समय में पूरे मुंगेर जिले में सिर्फ 73 चिकित्सक ही पदस्थापित हैं. जबकि 81 चिकित्सकों का पद वर्षों से रिक्त पड़ा हुआ है. यह स्वीकृत पद भी दशकों पुराना है. ऐसी स्थिति में वर्तमान समय में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा का लाभ मिलना मुश्किल हो रहा.
आधे से अधिक चिकित्सकों का पद है रिक्त. सदर अस्पताल, तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल सहित अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुल 154 चिकित्सकों का पद स्वीकृत कर रखा है. जिनमें से वर्तमान समय में कुल 81 चिकित्सकों का पद रक्त ही पड़ा हुआ है.
बांकी के 73 चिकित्सकों के जिम्मे जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं टिकी हुई है. उसमें भी सदर अस्पताल मुंगेर तथा अनुमंडलीय अस्पताल की स्थिति काफी दयनीय है. सदर अस्पताल में जहां 9 चिकित्सकों का पद रिक्त है, वहीं अनुमंडलीय अस्पताल तारापुर में 20 चिकित्सकों का पद रक्त है.
इसके अलावे कई अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक विहीन पड़े हुए हैं. जिसके कारण आम जनों का स्वास्थ्य सेवा भगवान भरोसे है. इतना ही नहीं सात प्रकार के कार्यक्रम पदाधिकारी भी पद रिक्त पड़ा हुआ है. जिसके कारण विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के संचालन में अक्सर उदासीनता पायी जाती है.
बढ़ती गयी आबादी, घटते गये चिकित्सक. अक्सर यह देखा जाता है कि आबादी के विस्तार के साथ-साथ सुख-सुविधा के इकाईओं को भी बढ़ाना पड़ता है, ताकि अतिरिक्त आबादी का बोझ पूर्व से उपलब्ध संसाधनों पर न पड़े. किंतु स्वास्थ्य विभाग में इसका साफ उल्टा कार्य हो रहा है.
यहां जिस वक्त चिकित्सकों का पद सृजित किया गया था. उस वक्त मुंगेर की आबादी 10 लाख के लगभग था. जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गयी, वैसे-वैसे मुंगेर जिला से कट कर जमुई, लखीसराय, बेगूसराय, खगड़िया व शेखपुरा अलग-अलग जिला बन गया. वर्तमान समय में मुंगेर जिला की आबादी लगभग 17 लाख तक पहुंच चुकी है.
बावजूद पूर्व के स्वीकृत चिकित्सकों को बढ़ाना तो दूर, यहां चिकित्सकों की संख्या आधे से भी कम हो गयी है. अब समझा जा सकता है कि जब 10 लाख के नीचे की आबादी के लिए 154 चिकित्सक हुआ करते थे, वहीं अब सिर्फ 73 चिकित्सकों के दम पर 17 लाख की आबादी के स्वास्थ्य सेवा को छोड़ दिया गया है. ऐसे में मुंगेर के खास कर गरीब तबके के लोग कितना स्वस्थ रह सकेंगे.
कहते हैं सीएस
सिविल सर्जन डॉ पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि जिले में रिक्त पड़े चिकित्सकों के पद को लेकर स्वास्थ्य सेवा में काफी दिक्कतें आती है. इसके लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग को लिखा जा चुका है.
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