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पर्याप्त मात्रा में बिजली देने का दावा कर रहा विभाग

पूर्णिया : ट्रांसमिशन लास एक लाइलाज बीमारी की तरह है. इसके सुधार के दावे भले ही किये जाते हों, पर इस पर नियंत्रण बहुत हद तक संभव नहीं. अधिकारी भी मानते हैं कि पावर लॉस को जीरो नहीं किया जा सकता पर कोशिशें जरूर की जा सकती हैं. जानकारों का कहना है कि इस वजह […]

पूर्णिया : ट्रांसमिशन लास एक लाइलाज बीमारी की तरह है. इसके सुधार के दावे भले ही किये जाते हों, पर इस पर नियंत्रण बहुत हद तक संभव नहीं. अधिकारी भी मानते हैं कि पावर लॉस को जीरो नहीं किया जा सकता पर कोशिशें जरूर की जा सकती हैं. जानकारों का कहना है कि इस वजह से भी पूर्णिया में बिजली की कटौती और ट्रिपिंग की समस्या लगातार बनी हुई है.

विभागीय जानकारों के मुताबिक जैसे ही किसी ग्रिड से 33 हजार के पावर को कंडक्टर के जरिये 11 हजार में कन्वर्ट कर छोड़ा जाता है वहीं से ट्रांसमिशन लॉस शुरू हो जाता है. ग्रिड के तकनीकी अधिकारी बताते हैं कि उपलब्ध संसाधनों से इस लॉस को स्थानीय स्तर पर रोकने की कोशिश की जाती है पर इसमें बहुत कामयाबी नहीं मिल पाती, क्योंकि आधुनिक तकनीक और उपकरणों का यहां सर्वथा अभाव है. यही वजह है कि इसे लाइलाज बीमारी भी माना जाता है. जानकारों ने बताया कि एक तरफ यदि ग्रिड से ट्रांसमिशन लास होता है तो सप्लाइ में भी पावर की क्षति होती है. इस क्षति का अंदाजा उपभोक्ताओं के मीटर से लगाया जा सकता है.
दरअसल अधिकारी यह देखते हैं कि सप्लाइ यदि 6 यूनिट हो रही है और मीटर 5 यूनिट दर्शा रहा है तो एक यूनिट कहां जा रहा है. काफी छानबीन के बाद पता चलता है कि इस बीच तार फंसा कर कोई बिजली की चोरी कर रहा है. हालांकि अब एेसा बहुत होता नहीं पर इस तरह के ऊर्जा क्षरण के लिए भी विद्युत विभाग अभियान चलाता है और फाइन के साथ मुकदमे भी किये जाते हैं. विभागीय जानकारों की मानें तो ग्रिड से चलने वाली बिजली कही जर्जर तार तो कहीं पेड़ की टहनियों के संपर्क में आकर भी लॉस हो जाती है. दरअसल शहर का मौजूदा सप्लाइ सिस्टम व्यवस्था के अभाव में अक्सर दगा दे जाता है.
लॉस से रहती है बिजली की किल्लत
आम उपभोक्ताओं को पता नहीं कि ट्रांसमिशन लास भी बाधित विद्युतापूर्ति की एक बड़ी वजह है. जानकारों का कहना है कि यदि ट्रांसमिशन लास न हो तो जितनी बिजली का आवंटन होता है वह पूरी की पूरी मिलेगी जिससे बिजली की किल्लत कभी नहीं होगी. अक्सर होता भी यही है. पता चलता है कि पूर्णिया को 30 मेगावाट बिजली मिल रही है और फिर भी बिजली की किल्लत बनी रह जाती है. हालांकि विभाग के अधिकारी अपने तइ उपभोक्ताओं को संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं पर वे भी जानते हैं कि पूर्णिया को मिलने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा ट्रांसमिशन लास के चक्रव्यूह में फंस जाता है.
नहीं हो सकी है प्री मॉनसून की तैयारी
उर्जा क्षरण को रोकने के लिए प्री मॉनसून की तैयारी का प्रावधान है. इसके तहत बरसात आने से पहले सिस्टम को दुरूस्त रखने और ट्रांसमिशन लास के बचाव के उपाय किए जाते हैं. नियमित रुप से न तो एलटी लाइन के कंडक्टर बदले जाते हैं औऱ न ही इंसुलेटरो के रख रखाव के प्रति बहुत सावधानी बरती जाती है. पिन इंसुलेटरो की भी अमूमन यही स्थिति बतायी जा रही है. जानकारों का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूसन एवं कामर्शियल लॉस के कारण भी बिजली की आपूर्ति बाधित हो जाती है. जानकारों की मानें तो अक्सर तार हिट हो जाता है या फिर कहीं लूज कॉन्टेक्ट रह जाता है तो वैसी स्थिति में पावर लॉस होता है और इसके कारण बिजली की आपूर्ति बाधित हो जाती है.
आंकड़े बोलते हैं
60 मेगावाट बिजली पूर्णिया की स्थायी जरूरत है
89 मेगावाट तक बिजली की अभी हो रही सप्लाई
120 मेगावाट बिजली सप्लाई की हो रही तैयारी
कहते हैं अधिकारी
ट्रांसमिशन लॉस से बचाव के लिए जगह-जगह ट्री-कटिंग की गई है. ट्री-कटिंग का काम अभी लगातार चल रहा है. बिजली की कटिंग-ट्रिपिंग की समस्या से पूर्णिया को शीघ्र निजात मिलेगी.
सीताराम पासवान, कार्यपालक अभियंता, विद्युत विभाग
Prabhat Khabar Digital Desk
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