PU Election: प्रेसिडेंशियल डिबेट में 'सेंट्रल यूनिवर्सिटी' का मुद्दा रहा सबसे हॉट, गोली तक चली इसमें बात

पटना विश्वविद्यालय के तरफ से आयोजित प्रेसिडेंशियल डिबेट में सभी अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने अपनी बात रखी इसमें सबसे कॉमन मु्द्दा पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की मांग रही. साथ ही इस दौरान जदयू प्रत्याशी आनंद मोहन ने कहा मैं गोली- बम से डरने वाला नहीं हूं. किसने और क्या कहा..
पटना. पटना विश्वविद्यालय के तरफ से आज पटना साइंस कॉलेज में प्रेसिडेंशियल डिबेट आयोजन कराया गया था. इसमें छात्र संघ चुनाव के सभी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को बोलने के लिए मौका दिया गया था. सभी को अपनी बात रखने के लिए सात मिनट का समय दिया गया था. इस समय में ही सभी प्रत्याशियों ने अपनी बात छात्रों के सामने रखी.
पटना विश्वविद्यालय के तरफ से आयोजित प्रेसिडेंशियल डिबेट में अध्यक्ष पद के लिए सभी प्रत्याशियों ने अपनी एजेंडा को छात्रों से अवगत काराया. इस दौरान सभी प्रत्याशी जीत को लेकर जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे थे. सभी ने बताया वे जीत के बाद विश्वविद्यालय में क्या- क्या करेंगे. इसके अलावा छात्रों के हित में उनकी क्या प्रमुख मुद्दे हैं. वहीं, इस दौरान एक मुद्दा लगभग सभी प्रत्याशियों के जुबान पर था. वो था पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की. किसी ने इसे अपना प्रमुख बिंदु बताया तो किसी ने इसे लेकर सरकार की विफलता बताया. वहीं, किसी ने बताया ये छात्र संघ के अधिकार में नहीं आता है.
आइसा के ओर से अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी आदित्य रंजन ने यूनिवर्सिटी के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. छात्र संघ चुनाव को उन्होंने यूनिवर्सिटी केंद्रीत मुद्दों पर होने की बात कही. उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस चुनाव को गोलगप्पा और चाट के प्रलोभन से कराना चाहते हैं. लेकिन आइसा हमेशा से मुद्दों पर राजनीति करती रही है. इन मुद्दों को लेकर हमेशा संघर्ष भी करती रहती है. इस दौरान उन्होंने पीएचडी के समस्याओं को भी अवगत कराया और महिलाओं की सुरक्षा पर भी अपनी बात रखी.

जनअधिकार छात्र परिषद से प्रत्याशी दीपांकर प्रकाश ने छात्रों को संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की मांग की. इस दौरान उन्होंने गोलगप्पा चाट खिलाने वालों पर भी निशाना साधा. साथ ही छात्र संघ चुनाव में विधायक उतारने वालों पर हमला बोला. कहा ये छात्र चुनाव ही बना रहे. वहीं, अपनी एजेंडा रखते हुए छात्रों के लिए फ्री मेट्रो सेवा देने की बात कही.
इसके बाद जदयू से प्रत्याशी आनंद मोहन ने छात्रों के बीच अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने अपने पर हमले की बात कही. कहा आनंद मोहन डरने वाला नहीं है, चाहे गोली मारो या बम छात्र हित की बात हमेशा करता रहूंगा. इसके अलावा अपनी मुद्दों को बताते हुए कहा कि महिला छात्रावास के तरह ही लड़कों के लिए भी छात्रावास बनाए जाएंगे. कैंपस में फ्री wifi की सेवा बहाल की जाएगी. साथ ही स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को सरकार के तरफ से दिए जाने पर उसकी उपलब्धि बताई.

जदयू प्रत्याशी के बाद निर्दलीय प्रत्याशी मानसी झा ने सभा को संबोधित किया. इस दौरान मानसी ने खुद को साधारण परिवार से होने की बात कही. कहा जब भी यूनिवर्सिटी में संघर्ष की बात जब आती है उसमें मानसी का नाम जरूर रहता है. इसके अलावा पटना यूनिवर्सिटी के समस्याओं के मुद्दे को उठाया. साथ ही पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की बात कही. वहीं, इस दौरान मानसी ने जदयू प्रत्याशी आनंद मोहन को चैलेंज भी दे दिया.

ABVP की प्रत्याशी प्रगति राज ने विश्वविद्यालय में प्रोफेसरों की कमी की बात कही. इसके अलावा उन्होंने कहा कि ABVP के द्वारा ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद के लिए महिला उम्मीदवार उतारा गया है. अपनी एजेंडा को रखती हुए प्रगति ने कहा कि छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कैंपस में पढ़ाई का वातावरण होता है. अच्छी लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए. इस दौरान ABVP की प्रत्याशी ने मौजूदा राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए बोली कि आखिर सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग क्यों हो रही है ? इसका मतलब राज्य सरकार की विफलता है.

राजद प्रत्याशी साकेत कुमार ने कहा कि समाज में समाजवादी विचारधारा स्थापित करने की बात कही. इसके अलावा पूंजीपति द्वारा आम लोगों का शोषण किया जा रहा है. इस दौरान उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन लागू करने पर दो दशक का समय लग गया. लेकिन सुदामा कोटा जल्द ही लागू हो गया. जब बहुजन प्रतिनिधि की बात आती है तो लोग जातीयता का आरोप लगाया जाता है. इसके अलावा उन्होंने मंच से विश्वविद्यालय के समस्यायों को छात्रों के बीच रखा.

सबसे अंत में एनएसयूआई प्रत्याशी शाश्वत शेखर को मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं 7 साल से विश्वविद्यालय में संघर्ष कर रहा हूं. आज कल दूसरे प्रत्याशी कई तरह के आडंबर रच रहे हैं उनसे बचने की जरूरत है. सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर शाश्वत ने कहा छात्र संघ की लिमिटेड पावर है उसके अधीन ही कार्य किया जा सकता है. छात्रों की समस्या हमेशा से विश्वविद्यालय प्रशासन के पास उठाता रहा हूं. मुझे पता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया छात्रों के साथ कैसा होता है? घंटों दारवाजों पर बैठना पड़ता है. ये सब अब नहीं चलेगा. जीत के बाद उनको छात्र हित में काम करना होगा. मैं छात्र राजनीति एमपी- एमएलए बनने के लिए नहीं कर रहा हूं. मैं यही रहूंगा उनकी आवाज बनूंगा.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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