एशिया में रेडियोलॉजी का कभी सेंटर था PMCH, आज बिहार में नहीं है ब्लड कैंसर का इलाज, मरीज हो रहे रेफर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Nov 2022 9:36 AM
पटना मेडिकल कॉलेज का रेडियोलॉजी विभाग कभी एशिया में कैंसर के इलाज का प्रमुख सेंटर था, लेकिन आज पूरे बिहार में कैंसर समेत कई गंभीर रोगों के इलाज की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. बिहार के मरीजों को अब कई गंभीर रोगों के इलाज के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल की ओर रुख करना पड़ रहा है.
आनंद तिवारी, पटना. पटना मेडिकल कॉलेज का रेडियोलॉजी विभाग कभी एशिया में कैंसर के इलाज का प्रमुख सेंटर था, लेकिन आज पूरे बिहार में कैंसर समेत कई गंभीर रोगों के इलाज की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. बिहार के मरीजों को अब कई गंभीर रोगों के इलाज के लिए दिल्ली एम्स से लेकर मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल की ओर रुख करना पड़ रहा है.
ब्लड कैंसर, लिवर ट्रांसप्लांट, मिरगी का ऑपरेशन, पेशाब की थैली में टीबी का ऑपरेशन, स्टेम सेल से मानसिक रोग बच्चों का इलाज, आंख के कैंसर व ट्यूमर, लंग्स ट्रांसप्लांट और फेफड़ा ट्रांसप्लांट जैसी कई गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा अब तक पटना के एम्स, एनएमसीएच, आइजीआइएमएस व पीएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों में नहीं हो पायी है. मजबूरन मरीजों को दिल्ली, मुंबई, लखनऊ या चेन्नई जैसे शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
आइजीआइएमएस में करीब तीन साल पहले लिवर ट्रांसप्लांट शुरू किया गया था. इसके लिए यहां के गैस्ट्रो डिपार्टमेंट के अधिकतर डॉक्टर व कर्मियों को ट्रेनिंग के लिए दिल्ली भेजा गया. हालांकि, एक मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट हुआ, लेकिन संबंधित मरीज की मौत हो गयी.
ब्लड कैंसर और आंख के ट्यूमर के मरीजों का इलाज पटना के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं किया जाता है. इन दोनों बीमारियों के लिए डॉक्टर मरीज को सीधे मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल रेफर कर देते हैं.
पटना एम्स, पीएमसीएच व आइजीआइएमएस में बिल्डिंग व भवन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है. लेकिन, संसाधनों की कमी बनी हुई है. नतीजतन ब्लड जांच, एमआरआइ, सिटी स्कैन, एक्सरे आदिसभी तरह की जांच व इलाज में लंबी वेटिंग दी जा रही है.
मंदिरी इलाके की कुमारी ज्योति की छह वर्षीया बेटी खुशबू की बायीं आंख में ट्यूमर हो गया. ज्योति उसे पीएमसीएच, राजेंद्र नेत्रालय, पटना एम्स, एनएमसीएच सहित कई प्राइवेट अस्पतालों में लेकर गयी. डॉक्टरों ने कुछ दिन तो इलाज किया. लेकिन, जब ट्यूमर निकालने की बात सामने आयी, तो उसे मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल या फिर शंकर नेत्रालय, चेन्नई रेफर कर दिया गया. ज्योति अपनी बेटी को लेकर मुंबई चली गयी.
पटना सिटी की सुमन कुमारी को पेट में असहनीय दर्द शुरू हुआ. वह पटना के कई पेट रोग विशेषज्ञ से मिली. उन्होंने कई बार अल्ट्रासाउंड से लेकर एमआरआइ जांच करवायी, लेकिन बीमारी पकड़ में नहीं आयी. जब पेट का दर्द ठीक नहीं हुआ, तो वह दिल्ली चली गयी. दिल्ली एम्स के एक डॉक्टर से जांच करायी तो उन्होंने पेट के आंत में अल्सर बताया. बाद में सर्जरी के माध्यम से अल्सर निकाला गया.
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पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आइएस ठाकुर ने बताया कि अस्पताल को सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने का काम तेजी से चल रहा है. अगले साल फस्ट फेज का उद्घाटन भी हो जायेगा, जिसमें ब्लड कैंसर से लेकर कई बड़ी बीमारियों का इलाज अच्छे से किया जायेगा.
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आइजीआइएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने कहा कि लिवर व फेफड़ा ट्रांसप्लांट की सुविधा है. इसके लिए अलग से डॉक्टर इलाज कर रहे हैं. हालांकि, ब्रेन डेड व डोनर नहीं मिलने से यह सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है. इसके लिए जागरूकता अभियान सोटो के माध्यम से चलाया जा रहा है.
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पटना एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ सीएम सिंह ने वैसी बीमारी, जिसका इलाज यहां नहीं हो रहा उसको शुरू करने की दिशा में कार्यकिये जा रहे हैं.
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