पटना शहर में मिलेगा वार्ड वाइज मौसम का पूर्वानुमान, गया,नालंदा,राजगीर में लगेंगे ऑटोमेटिक Weather System

पटना में बहुत जल्दी वार्ड वाइज मौसम का पूर्वानुमान जारी किया जायेगा. इसके लिए शहरभर में ऑटोमेटिक वेदर सिस्टम स्थापित किया जायेगा. ये बातें आइएमडी पटना के सभागार में शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. महापात्रा ने बताया.
पटना. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ मृत्युंजय महापात्रा ने कहा है कि पटना में बहुत जल्दी वार्ड वाइज मौसम का पूर्वानुमान जारी किया जायेगा. इसके लिए शहरभर में ऑटोमेटिक वेदर सिस्टम स्थापित किया जायेगा. इसके लिए उच्च तकनीक युक्त मशीनरी का इस्तेमाल होगा. आइएमडी पटना के सभागार में शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ महापात्रा ने बताया कि पटना बड़ा शहर है. यहां वार्ड के हिसाब से तापमान, बारिश, ऊमस एवं अन्य मौसमी घटनाओं का पूर्वानुमान दिया जायेगा. इससे शहर के लोगों को मौसम की कठिनाई से बचने में सहूलियत होगी.
डॉ. महापात्रा ने बताया कि बिहार में मौसम पूर्वानुमान की सेवाओं के विस्तार की बड़ी योजना है. इस क्रम में बिहार के ऐतिहासिक स्थानों मसलन गया,नालंदा, राजगीर आदि जगहों पर मौसम का विशेष पूर्वानुमान देने की योजना है. यह समूची कवायद अधिकतम दो साल में पूरी हो जायेगी.
उन्होंने बताया कि बिहार में हम लोग दो किलोमीटर की रेंज में पूर्वानुमान जारी किया जायेगा. पूर्वानुमान में थंडर स्टोर्म और बज्रपात आदि की सूचनाएं भी दी जायेंगी. पटना सहित विभिन्न शहरों की एयर क्वालिटी और उसकी स्पीड की जानकारी भी साझा करने की योजना है. यह पूर्वानुमान पावर सेक्टर, हायड्रोलॉजी आदि के क्षेत्र के लिए भी उपयोगी होगा. बिहार में क्षेत्रवार बीमारियों का मौसम आधारित आकलन और प्रभावी किया जायेगा.
डॉ. महापात्रा के मुताबिक बिहार में कुछ और राडार सिस्टम लगाना है. इसके लिए आकलन जारी है. बताया कि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान की सटीकता अभी 70 फीसदी है. इसे बढ़ा कर अब 80 प्रतिशत करने का प्रयास है. मौसम से जुड़ी जानकारियां देने के लिएस विभाग जियोग्राफिक इंफोर्मेशन सिस्टम का उपयोग किया जायेगा.
डॉ. महापात्रा के मुताबिक बिहार में इस बार मॉनसून अपनी वापसी की निर्धारित तिथि 25 सितंबर के बाद तक सक्रिय रह सकता है. बिहार में सितंबर में अच्छी बारिश लगातार जारी रहेगी.
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बिहार क्लाइमेट चेंज के भंवर में है. भारी बारिश और ठनका की बढ़ती आवृति इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं. हालांकि, बिहार में आ रही मॉनसूनी बारिश में कमी को लेकर कहा कि अभी इसका अध्ययन होना बाकी है.
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बिहार में पिछले तीन से सौ साल में औसत तापमान में 0.1 से एक डिग्री तक पारा बढ़ा है.
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कोरोना काल में हवा की गुणवत्ता सुधरी थी. हालांकि, कोविड के विस्तार में मौसम का कोई योगदान नहीं था.
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बिहार सहित पूर्वी भारत में बारिश की मात्रा में घटने का ट्रेंड है.
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