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रामविलास पासवान की पहली बरसी पर चार महीने बाद मिले चाचा-भतीजा, लेकिन नहीं दिखी रिश्ते की गर्माहट

लोजपा के संस्थापक व भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री स्व रामविलास पासवान की पहली बरसी पर रविवार को श्रीकृष्णापुरी स्थित उनके आवास पर पूरा परिवार का जुटान हुआ.

By Prabhat Khabar Print Desk
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स्व. रामविलास पासवान जी की पहली बरसी पर  श्रद्धांजलि देते चिराग पासवान
स्व. रामविलास पासवान जी की पहली बरसी पर श्रद्धांजलि देते चिराग पासवान
प्रभात खबर

पटना. लोजपा के संस्थापक व भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री स्व रामविलास पासवान की पहली बरसी पर रविवार को श्रीकृष्णापुरी स्थित उनके आवास पर पूरा परिवार का जुटान हुआ. उनके पुत्र चिराग पासवान के आमंत्रण पर राज्यपाल, विधानसभाध्यक्ष, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति सहित कई केंद्रीय मंत्री, बिहार सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान पार्षद कार्यक्रम में पहुंचे और स्व पासवान के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि दी.

मगर सबकी नजरें स्व पासवान के छोटे भाई केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस पर टिकी रहीं. पारस दोपहर करीब एक बजे कार्यक्रम में पहुंचे और स्व पासवान के तैल चित्र पर मार्ल्यापण के बाद पूजन कार्यक्रम में भी शामिल हुए.

इस दौरान पारस ने भाभी व चिराग की मां रीना पासवान और चिराग ने चाचा पारस के पैर छूकर उनका आर्शीवाद लिया. लेकिन, चाचा-भतीजे के रिश्ते में पहले की तरह गर्मजोशी नहीं दिखी. दोनों के बीच कोई खास बात नहीं हुई.

पार्टी को लेकर चल रहे विवाद की छाया उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी. पूजन कार्यक्रम खत्म होने तक पशुपति एक कुर्सी पर बैठे रहे. फिर हाथ जोड़ कर विदा हो गये. चिराग के चचेरे भाई प्रिंस राज भी कार्यक्रम में नहीं दिखे.

पीएम मोदी ने ट्वीट कर रामविलास को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लंबा पत्र ट्वीट कर भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पहली बरसी पर उनको याद किया. उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह मेरे लिए बहुत भावुक दिन है.

मैं आज उन्हें न केवल अपने आत्मीय मित्र के रूप में याद कर रहा हूं, बल्कि भारतीय राजनीति उनके जाने से जो शून्य उत्पन्न हुआ है, उसे भी अनुभव कर रहा हूं. स्वतंत्र भारत के राजनीति इतिहास में पासवान जी का हमेशा अपना एक अलग स्थान रहेगा.

वे एक बहुत ही सामान्य पृष्ठभूमि से उठ कर शीर्ष तक पहुंचे, लेकिन हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे. मेरी जब भी उनसे मुलाकात होती थी, वह अपने जमीनी अनुभवों के आधार पर हमेशा गांव-गरीब, दलित-वंचित के हितों की चिंता प्रकट करते रहते थे.

Posted by Ashish Jha

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