भीड़ से परेशान बिहार के लड़कों ने खोजा आइडिया, इस रास्ते प्रयागराज पहुंच किया कुम्भ स्नान
Published by : Ashish Jha Updated At : 18 Feb 2025 5:49 AM
Bihar boys
Kumbh: कुम्भ स्नान के लिए प्रयागराज जानेवालों के सामने भीड़ एक समस्या है. सड़क हो या रेल या फिर हवाई सफर ही क्यों न हो हर जगह-जाम ही जाम देखने को मिल रहा है. ऐसे में बिहार के बक्सर के रहनेवाले सात लड़कों ने प्रयागराज जाने का अनोखा प्लान बनाया. बिहार के कुछ लड़कों ने जाम से बचने के लिए बिहारी बुद्धि को अप्लाई किया और असंभव को संभव कर दिखाया. इन लोगों ने सड़क मार्ग में जाम से बचने के लिए नदी का रास्ता इख्तियार किया और नाव के सहारे बिहार के बक्सर से प्रयागराज अर्थात संगम तट पर जा पहुंचे.
Kumbh: पटना. बक्सर के कम्हरिया गांव के सात युवकों ने जाम से बचने के लिए मोटर चालित नाव से 550 किलोमीटर की यात्रा कर प्रयागराज तक का सफर तय किया. पेशेवर नाविकों से युक्त इस समूह ने 11 फरवरी को अपनी यात्रा शुरू की और 13 फरवरी को संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज पहुंचे. इन लोगों का दावा है कि इन लोगों ने 550 किलोमीटर की दूरी को मात्र 84 घंटे में तय करके दिखा दिया. इन लोगों का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है.
तीन दिनों में पहुंचे बक्सर से प्रयागराज
बक्सर जिले के रहनेवाले मनु चौधरी, सुमंत, संदीप, सुखदेव, आदू, रविन्द्र और रमेश ने प्रयागराज जाने का प्लान बनाया, लेकिन उनके मन में डर था कि बाय रोड या बाय ट्रेन जाएंगे तो परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में इन लोगों ने एक आइडिया खोजा. दोस्तों के बीच प्रस्ताव आया कि जाम से बचने के लिए क्यों ना नाव से प्रयागराज तक की यात्रा की जाये. सभी तैयार हुए और यात्रा की तारीख तय हुई. नाव से सफर तय कर 13 फरवरी की सुबह को प्रयागराज पहुंचे और संगम स्नान करने के बाद वहां से विदा हो गए. तीन दिनों के बाद अर्थात 16 फरवरी की रात 10:00 बजे तक अपने घर बक्सर पहुंच गए.
जाने से पहले किया जबरदस्त होमवर्क
मनु बताते हैं कि नाव से यात्रा पर निकलने से पहले इन लोगों ने जबरदस्त होमवर्क किया. ये लोग चाहते थे कि रास्ते में कहीं भी किसी तरह की परेशानी न हो. बीच रास्ते में कोई हादसा ना हो जाए. इसलिए सबसे पहले एक मजबूत नाव का चयन किया गया. उसमें एक के बदले दो मोटर लगाए गए. बीच रास्ते में अगर एक मोटर खराब हो जाता है, तो भी दूसरा मोटर लगाने से काम चलता रहेगा. इसके साथ ही नाव पर गैस चूल्हा और सिलेंडर रखा गया और राशन पानी के साथ-साथ सभी जरूरी सामान को रख लिया गया. बक्सर से प्रयागराज तक की यात्रा के दौरान कितना खर्च हुआ, इस बात का जवाब देते हुए सुमंत ने बताया कि लगभग 20000 रुपए खर्च हुए हैं.
भूल गये थे ये जरुरी सामान
सुमंत बताते हैं कि नाव यात्रा के दौरान नेविगेशन के लिए गूगल मैप्स का इस्तेमाल किया गया. यहीं कारण था कि गंगा नदी के जटिल मार्ग को सोचने समझने के बाद रात के अंधेरे में सुरक्षित मार्ग पर चलते रहे. यात्रा के दौरान दो व्यक्ति नाव चलाते थे, जबकि अन्य वहीं रहते थे. यात्रा के दौरान इन लोगों ने 20 लीटर पेट्रोल, सब्जियां, चावल, आटा और बिस्तर आदि की व्यवस्था की, लेकिन वे फोन पॉवर बैंक पैक करना भूल गए, जो एक छोटी सी परेशानी थी, जिसका जिक्र मनु ने हंसते हुए करते हैं. सुमंत कहते हैं, फिर भी, हमारी यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो गई.
गंगा नदी में सफर करना जटिल काम
लोगों से अपील करते हुए संदीप ने बताया कि जल मार्ग का रास्ता कोई आसान मार्ग नहीं है. अगर आप प्रोफेशनल तरीके से नाव चलाना नहीं जानते हैं, तो आपको नाव यात्रा करने से बचना चाहिए. हम सभी लोग तैराना जानते हैं. इसके बावजूद हमने सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा. वो कहते हैं, मोटर अधिक चलने के कारण इंजन गर्म हो जाया करता था जिसे आराम देने के लिए हर 5 से 7 किलोमीटर पर मशीन को बंद कर देते थे और नाव को खुद लग्गा के सहारे चलते थे.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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