'CM हाउस से तय होती थी अपहरण की डील', लालू यादव के साले का सनसनीखेज खुलासा

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 13 Feb 2025 4:21 PM

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लालू यादव और सुभाष यादव

Lalu Yadav : सुभाष यादव जो राबड़ी देवी के भाई हैं, उन्होंने दावा किया है कि राजद के शासनकाल में मुख्यमंत्री आवास से किडनैपिंग केस में डील हुआ करती थी. एक अपहरण केस का जिक्र करते हुए उन्होंने बड़ा खुलासा किया है.

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Lalu Yadav : बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के साले सुभाष यादव ने राजद के शासनकाल पर बड़ा खुलासा किया है. प्रभात खबर से बात करते हुए उन्होंने कहा, “उस दौर में बिहार में जो अपहरण हुआ करता था उसमें बंधक को छुड़ाने के लिए दी जाने वाली फिरौती की डील लालू यादव करवाते थे.” सुभाष यादव ने एक अपहरण केस का जिक्र करते हुए कहा, “नेपाल से लोग आ रहे थे, तो बॉडर इलाके में एक किडनैपिंग हुई थी. इसका आरोप जाकिर हुसैन पर लगा था. वो अभी भी जिंदा है. इस किडनैपिंग को लेकर मोहम्मद शहाबुद्दीन और लालू यादव ने फोन किया था और अपहृत छोड़ने को कहा. लेकिन उसने ये किडनैपिंग नहीं की थी. कोई दूसरा आदमी था. फिर शहाबुद्दीन और लालू यादव ने इसको लेकर बात किया. सीएम हाउस में डील हुआ और फिर उसे व्यक्ति को सकुशल लौटाया गया.”

लालू यादव का बंधुआ मजदूर नहीं है दूसरा समाज

सुभाष यादव ने आगे कहा कि जब-जब लालू यादव बराबर अपने बेटे के बारे में बयान देते हैं और उसका हाल और बुरा हो जाता है. लोकसभा चुनाव में लालू यादव सभी सीटों पर जीतने का दावा कर रहे थे लेकिन 4 सीट पर रुक गए. उपचुनाव में सभी सीट हार गए. राजद उस सीट पर भी हार गई जिस पर लालू यादव प्रचार करने गए थे. सुभाष यादव ने आगे कहा कि लालू के कहने पर यादव और मुस्लिम समाज तो वोट देगा लेकिन दूसरा समाज उनका बंधुआ मजदूर नहीं है जो बात मान लेगा.

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रिश्ता बिगड़ने पर क्या बोले सुभाष

सुभाष यादव ने कहा, “बिहार में झूठ बोल के बताया गया कि सुभाष यादव चोर है. नाम बिगाड़ दिया गया. लालू यादव और राबड़ी देवी ने मेरा नाम ख़राब करवाया.” उन्होंने आगे कहा, “दोनों बेटा जवान हो रहा था, बेटी का शादी-विवाह हो रहा था. इसलिए, अब हमलोग की कोई जरूरत नहीं रह गई थी. उनको डर था, चार-पांच आदमी भड़काते रहते थे. इस वजह से हमारा रिश्ता बिगड़ गया. पिछले 21 वर्षों से हम कभी नहीं मिले हैं. किसी भी तरफ से मिलने की पहल नहीं हुई है.”

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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