2014 में जीता भरोसा, 2026 में मिला ताज, सम्राट चौधरी कैसे बने नीतीश कुमार के भरोसेमंद

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सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार

Samrat Choudhary: सम्राट चौधरी बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए हैं. उनकी इस बड़ी राजनीतिक छलांग में नीतीश कुमार का भरोसा अहम रहा. राजद से भाजपा तक कई दलों का सफर तय करने वाले सम्राट ने लंबे संघर्ष, रणनीति और संगठन कौशल के दम पर यह मुकाम हासिल किया है.

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Samrat Choudhary: बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने वाले सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. उनके मुख्यमंत्री बनने में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन सबसे अहम माना जा रहा है. यह भरोसा अचानक नहीं बना, बल्कि कई सालों की राजनीति और रिश्तों का नतीजा है. सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार के पुराने और मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं. जब नीतीश कुमार ने समता पार्टी बनाई थी, तब शकुनी चौधरी उनके करीबी साथियों में थे. दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक संबंध रहे हैं. इसी पुराने रिश्ते ने भी सम्राट के लिए रास्ता आसान किया.

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कभी नीतीश कुमार के विरोध में खुलकर बोले थे सम्राट

सम्राट चौधरी कभी नीतीश कुमार के विरोध में खुलकर बयान दे चुके थे. उन्होंने एक समय कहा था कि नीतीश को हटाए बिना मुरेठा नहीं खोलेंगे. लेकिन समय के साथ राजनीति बदली और दोनों के बीच भरोसा मजबूत हुआ. यह भरोसा 2024 में डिप्टी सीएम बनने के बाद नहीं, बल्कि 2014 में ही बन गया था.

2014 में क्या हुआ था

2014 में जब नीतीश कुमार भाजपा से अलग होकर अकेले पड़ गए थे, तब सम्राट चौधरी ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया था. उन्होंने लालू यादव की पार्टी राजद में टूट कराई और कई विधायकों को अलग कर दिया. उस समय यह कदम नीतीश कुमार के लिए राहत लेकर आया. इसी दौर में सम्राट, नीतीश के साथ हेलिकॉप्टर से अपनी विधानसभा परबत्ता भी गए थे.

करियर की शुरुआत राजद से की

57 वर्षीय सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन कई दलों से होकर गुजरा है. उन्होंने शुरुआत राजद से की थी. राबड़ी देवी सरकार में वह मंत्री भी बने, लेकिन उम्र विवाद के कारण पद छोड़ना पड़ा. बाद में वह दो बार राजद के टिकट पर विधायक बने.

2014 में उन्होंने राजद छोड़ा और पिता के साथ जदयू में शामिल हो गए. फिर 2015 में जब नीतीश और लालू साथ आए, तो सम्राट जीतनराम मांझी की पार्टी हम में चले गए. वहां चुनाव में हार मिली. कुछ समय बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा. दिलचस्प बात यह रही कि कभी उनके विरोधी रहे सुशील मोदी ही उन्हें भाजपा में लेकर आए.

2017 में भाजपा में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी की राजनीति ने तेजी पकड़ी. पार्टी ने उन्हें ओबीसी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया. पहले प्रदेश उपाध्यक्ष, फिर विधान परिषद सदस्य और बाद में पंचायती राज मंत्री बनाया गया.

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कैसे बीजेपी आलाकमान को प्रभावित किया

2022 में भाजपा ने उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया. उनके आक्रामक अंदाज ने पार्टी नेतृत्व को प्रभावित किया. इसके बाद उन्हें बिहार भाजपा अध्यक्ष बनाया गया. 2024 में नीतीश कुमार जब फिर एनडीए में लौटे, तब सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया.

अब करीब दो साल के भीतर सम्राट चौधरी ने डिप्टी सीएम से मुख्यमंत्री तक का सफर तय कर लिया है. उनकी यह सफलता राजनीतिक धैर्य, रणनीति और सही समय पर सही फैसलों का परिणाम मानी जा रही है. बिहार की राजनीति में यह एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है.

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