सहरसा मिड डे मील कांड में पटना हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, जहरीले कीड़े वाला खाना खाने से 189 बच्चे हुए थे बीमार

Bihar News: सहरसा के मिड डे मील कांड में 189 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट में देरी पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने आरएफएसएल भागलपुर के निदेशक को तलब किया है और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है.
Bihar News: बिहार के सहरसा जिले में मिड डे मील खाने के बाद 189 स्कूली बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट में हो रही देरी पर गंभीर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है.
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की पीठ ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की सेहत खतरे में पड़ने के बावजूद खाद्य नमूनों की समय पर जांच नहीं होना बेहद गंभीर मामला है. कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को मामले में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
सरकार के हलफनामे से संतुष्ट नहीं दिखी अदालत
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार सरकार के एमडीएम/पीएम पोषण निदेशालय द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया. अदालत ने सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श कर नया और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर तथ्यात्मक और अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जाए.
आरएफएसएल भागलपुर के निदेशक को किया तलब
अदालत ने मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल), भागलपुर के निदेशक को पक्षकार बनाने का आदेश दिया है. साथ ही उन्हें अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया गया है. कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि घटना के कई दिन बाद भी खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी है.
जांच में देरी करने वाले आईओ पर कार्रवाई
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच के दौरान नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने में देरी हुई थी. सहरसा के पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट को जानकारी दी कि इस लापरवाही के लिए संबंधित अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) को निलंबित कर दिया गया है. अदालत ने इस कार्रवाई से संबंधित पूरी रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है.
महिषी प्रखंड के स्कूलों की व्यवस्था पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई कि महिषी प्रखंड के 68 विद्यालयों में विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से भोजन तैयार कराया जाता है, जबकि 58 विद्यालयों में एजेंसियों के जरिए मिड डे मील संचालित किया जाता है. कोर्ट ने खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, खाद्य विश्लेषक और संबंधित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से भी रिपोर्ट तलब की है.
क्या है पूरा मामला?
सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, बलुआहा में मिड डे मील खाने के बाद 150 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए थे. बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की थी. घटना के बाद सभी बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 100 से अधिक बच्चों को सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया था. बाद में कुल 189 बच्चों के प्रभावित होने की पुष्टि हुई.
भोजन में सांप का बच्चा या जहरीला कीड़ा गिरने की आशंका
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आशंका जताई थी कि भोजन में सांप का बच्चा या कोई जहरीला कीड़ा गिर गया था, जिसके कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी. प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करते हुए भोजन के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे थे. साथ ही संबंधित प्रधानाध्यापक को निलंबित कर प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी.
सभी बच्चे स्वस्थ, 18 जून को होगी अगली सुनवाई
सहरसा के जिलाधिकारी ने अदालत को बताया कि प्रभावित सभी 189 बच्चों का इलाज कराया गया और स्वस्थ होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
गौरतलब है कि बिहार में करीब 68,795 विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए मध्यान्ह भोजन योजना संचालित की जा रही है. मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
Also Read: खान सर के दो लोगों को पुलिस ने उठाया, फायरिंग वाले वीडियो ने पलटा पूरा मामला? जांच में आया नया मोड़
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By अभिनंदन पांडेय
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










