पुश्तैनी जमीन बनी मुसीबत, बिहार के इस जिले में अटक सकता है लगभग 100000 किसानों का पैसा
सांकेतिक फोटो
PM Samman Nidhi: सहरसा जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के करीब 1 लाख लाभार्थियों पर योजना से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है. पुश्तैनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों का फार्मर कार्ड रजिस्ट्रेशन अटक गया है. इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना मुश्किल होगा.
PM Samman Nidhi: सहरसा जिले में अभी करीब 228185 किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं. यह जिला फार्मर रजिस्ट्रेशन के मामले में स्थिति काफी पीछे है. प्रशासन और कृषि विभाग की कोशिशों के बावजूद अब तक केवल 128659 किसानों का ही निबंधन हो पाया है. बड़ी संख्या में किसानों के पास अपने नाम से जमीन की जमाबंदी नहीं होने के कारण रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ रही है.
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अब तक 60 फीसदी काम हुआ
सहरसा जिले के अधिकतर किसान पुश्तैनी जमीन पर खेती कर रहे हैं. जमीन पूर्वजों के नाम दर्ज है और वर्तमान पीढ़ी फॅमिली ट्री के आधार पर योजना का लाभ ले रही है.सरकार के नए निर्देशों के अनुसार किसान रजिस्ट्रेशन के लिए अपने नाम की जमाबंदी जरूरी है. इससे निबंधन प्रक्रिया में रुकावट पैदा हो रही है.इसी वजह से अब तक लगभग 60 प्रतिशत किसानों का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है.
फार्मर रजिस्ट्रेशन अटक रहा
सरकार ने फार्मर कार्ड को अनिवार्य कर दिया है. इसके लिए ई-केवाईसी और किसान रजिस्ट्रेशन जरूरी है. ई-केवाईसी तो आसानी से हो रही है, लेकिन जमीन अपने नाम पर न होने से फार्मर रजिस्ट्रेशन अटक जा रहा है. पुश्तैनी जमीन का बंटवारा और अलग-अलग नाम से जमाबंदी कराना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसे तय समय में पूरा करना किसानों के लिए मुश्किल है.
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क्या बोले जिला कृषि पदाधिकारी
अगर सरकार ने नियमों में ढील नहीं दी, तो जिले के करीब 99 हजार से अधिक किसान न सिर्फ किसान सम्मान निधि, बल्कि अन्य कृषि योजनाओं से भी वंचित हो सकते हैं. जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार के अनुसार ने बताया कि प्रशासन किसानों का फार्मर कार्ड बनवाने में जुटा है. समय रहते समाधान नहीं निकला तो बड़ी संख्या में किसान सरकारी लाभ से बाहर हो जाएंगे.
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