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Tuesday, February 27, 2024

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बिहार में पॉक्सो एक्ट के कांडों की हर दिन होगी समीक्षा, सभी जिलों को निर्देश जारी

इतना ही नहीं जिलों को भेजे गये निर्देश में यह भी कहा गया है कि अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में भी दैनिक रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाये. इस रिपोर्ट को जिला प्रशासन के माध्यम से गृह विभाग को भेजना होगा. गृह विभाग ने इस बाबत सभी जिलों को विस्तृत निर्देश भेजा है.

पटना. बिहार में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज कांडों के निष्पादन की अब दैनिक रिपोर्ट बनेगी. इन मामलों से जुड़े कांडों में कितने लोगों को सजा मिली, कितने कांड लंबित हैं और कितने कांडों का निष्पादन हुआ, इसकी रिपोर्ट रोज बनायी जाएगी. इसके अलावा जघन्य अपराधों के लिए चलाए जाने वाले स्पीडी ट्रायल और आर्म्स एक्ट से जुड़े कांडों की भी समीक्षा करने को कहा गया है. इतना ही नहीं जिलों को भेजे गये निर्देश में यह भी कहा गया है कि अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में भी दैनिक रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाये. इस रिपोर्ट को जिला प्रशासन के माध्यम से गृह विभाग को भेजना होगा. गृह विभाग ने इस बाबत सभी जिलों को विस्तृत निर्देश भेजा है.

विभाग ने भेजा फार्मेट, सजा-रिहाई की भी समीक्षा

गृह विभाग ने निर्देश के साथ अभियोजन से जुड़े कांडों की समीक्षा के लिए तय फार्मेट भी भेजा है. इसमें अभियोजकों का नाम, माह के प्रथम दिन लंबित कांड, माह में प्राप्त कांड, माह में निष्पादित कांड, सजा की संख्या, रिहाई की संख्या और माह के अंत में लंबित कांड आदि से जुड़ा विवरण देना होगा. लंबित कांडों के विभिन्न चरणों की भी समीक्षा करने को कहा गया है. इसमें कोर्ट में अभियुक्तों की उपिस्थति और साक्ष्य की स्थिति भी देखी जाएगी.

समन, वारंट एवं कुर्की-जब्ती की भी समीक्षा

सभी जिला पदाधिकारियों को समन, जमानतीय वारंट, गैर जमानतीय वारंट से जुड़े मामलों की समीक्षा करने और उसकी रिपोर्ट बनाने का निर्देश भी दिया गया है. इसमें हर माह समन-वारंट से जुड़े नये मामले, पुराने मामले और माह में निष्पादित किये गये मामलों की रिपोर्ट बनाई जाएगी. अगर कोर्ट में डाक्टर की गवाही या पोस्टमार्टम और इंज्यूरी रिपोर्ट लंबित रहने के मामले की समीक्षा करने को भी कहा गया है.

क्या है पॉक्सो एक्ट

देश में बच्चों और नाबालिगों के यौन-शोषण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार द्वारा Protection of Children Against Sexual Offence (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंस) नामक कानून बनाया गया, जिसे यौन अपराधों के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा संबंधी कानून के तौर पर भी जाना जाता है. इस कानून को यह सोच कर बनाया गया था कि इससे बाल यौन-शोषण की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके. ये एक्ट या अधिनियम महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2012 में बनाकर लागू किया गया था. इस कानून में बच्चों और नाबालिगों के साथ यौन-शोषण पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं बच्चों को यौन-शोषण, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी के खिलाफ असरदार तरीके से बचाव करने के प्रावधान किए गए हैं. इसमें बाल यौन-शोषण के वर्गीकरण के साथ आरोपितों को सजा के कड़े प्रावधानों की व्यवस्था है.

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किन आरोपों के बाद लगता है पोक्सो

सेक्शुअल हैरेसमेंट के केस में भारतीय दंड संहिता के तहत 90 दिनों के अंदर जांच पूरी होनी चाहिए. गिरफ्तारी के लिए कोई तय समय नहीं होती. हालांकि पॉक्सो में गिरफ्तार का ही नियम है और जमानत का कोई प्रावधान नहीं. लड़कियों पर ही नहीं लड़कों पर भी लागू होता है पोक्सो कानून में किये गये नये बदलावों के जरिए इस और कड़ा बनाया गया है. अब केवल नाबालिग लड़कियां ही नहीं बल्कि नाबालिग लड़के भी इसके दायरे में लाए गए हैं. पहले नाबालिग लड़कों के प्रति होने वाले यौन-अपराधों के लिए प्रभावी कानून नहीं था.

किस हरकत को माना गया अपराध

पोक्सो एक्ट में बच्चों के साथ यौन अपराधों में उनका यौन-शोषण, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी को शामिल किया गया है. इस कानून के तहत बच्चों और नाबालिगों के साथ अश्लील हरकत करना, उनके प्राइवेट पार्ट्स को छूना या अपने प्राइवेट पार्ट को टच करवाना, बच्चों को अश्लील फिल्म या पोर्नोग्राफिक कंटेंट दिखाना आता है. अगर किसी पर ये आरोप हों तो उस पर पॉक्सो एक्ट लागू होता है. बच्चों के शरीर को गलत इरादे से छूना या बच्चों के साथ गलत भावना से की गयी सभी हरकतें इस एक्ट में रेप की श्रेणी में रखी गई हैं. इन सभी को अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान भी है.

इसमें सजा का क्या है प्रावधान

  • पॉक्सो एक्ट 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रति यौन-अपराधों के प्रति बच्चों को संरक्षण प्रदान करता है.

  • 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रति सभी यौन-अपराध पॉक्सो अधिनियम के तहत हैंडल किए जाते हैं.

  • पोक्सो एक्ट के तहत बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों को मुख्यत दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है.

  • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रति दुराचार पर आजीवन कारावास एवं मृत्युदंड का प्रावधान है.

  • 16 वर्ष तक के नाबालिक बच्चों के प्रति यौन आरोप सिद्ध होने पर न्यूनतम 10 वर्ष कड़ी कैद का प्रावधान है.

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