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PM Awas Yojana: प्रधानमंत्री आवास योजना में बिहार के हजारों परिवारों को लगा बड़ा झटका, एक ही झटके में हो गए लिस्ट से बाहर

Updated at : 06 Jun 2025 1:15 PM (IST)
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PM Awas Yojana

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PM Awas Yojana: बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत घर पाने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों लोगों को बड़ा झटका लगा है. पात्रता जांच में 14 हजार से अधिक आवेदकों को अयोग्य करार दे दिया गया, जिससे उनका पक्का घर पाने का सपना टूट गया.

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PM Awas Yojana: बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के तहत मकान पाने का सपना देख रहे हजारों जरूरतमंदों को बड़ा झटका लगा है. ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराए गए हालिया सत्यापन में राज्य भर के करीब 14 हजार लाभार्थियों को अपात्र करार दिया गया है. इन नामों को लाभुक सूची से हटाए जाने के बाद राज्य का कुल आवास निर्माण लक्ष्य 12.55 लाख से घटकर 12.41 लाख रह गया है.

जांच में उजागर हुई पात्रता की गड़बड़ियां

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2018 में हुए सर्वे के आधार पर जो प्रारंभिक लाभुक सूची बनी थी, उसमें शामिल कई आवेदक अब योजना के योग्य नहीं रह गए हैं. कई के पास पहले से पक्का मकान था, तो कुछ अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले चुके थे. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने गलत दस्तावेजों के आधार पर नाम जुड़वाए थे. विभाग ने इन्हें सूची से बाहर करते हुए जिलों को नए सिरे से लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं.

जिलों को मिला सख्त आदेश, तेजी से करें निर्माण

लाभुक सूची से नाम हटाए जाने के बाद अब राज्य के विभिन्न जिलों में नया वर्कप्लान तैयार किया जा रहा है. ग्रामीण विकास विभाग ने डीएम और बीडीओ स्तर पर निर्माण की निगरानी को सख्त करने का आदेश दिया है ताकि समयसीमा के भीतर काम पूरा हो सके.

PMAY-G की शुरुआत और लक्ष्य

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) की शुरुआत 1 अप्रैल 2016 को हुई थी. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बेघर या कच्चे-टूटे मकानों में रह रहे लोगों को पक्का घर उपलब्ध कराना है. योजना के तहत एक 25 वर्ग मीटर का घर बनवाने के लिए अनुदान सीधे लाभार्थी के आधार लिंक्ड खाते में DBT के जरिये भेजा जाता है.

अब तक 2 करोड़ से ज्यादा घर बन चुके हैं

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 27 सितंबर 2022 तक इस योजना के तहत 2.00 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है. जबकि कुल लक्ष्य 2.72 करोड़ है. लाभार्थियों की पहचान SECC-2011 डाटा और ग्राम सभा के अनुमोदन से होती है.

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बिहार में लाभुकों के अयोग्य होने से योजना के ग्राउंड इम्पैक्ट पर असर पड़ने की आशंका है. अब प्रशासन को बचे हुए लाभार्थियों के लिए निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करना होगा, ताकि 2024 तक ‘सभी के लिए पक्का घर’ का लक्ष्य पूरा किया जा सके.

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Anshuman Parashar

लेखक के बारे में

By Anshuman Parashar

अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.

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