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पटना सिटी में बंदरों के हमले से अब तक 4 लोगों की मौत, 100 से अधिक घायल

Updated at : 26 Mar 2025 8:07 AM (IST)
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पटना सिटी में बंदरों के हमले से अब तक 4 लोगों की मौत, 100 से अधिक घायल

Monkey Attacks in Patna: एसडीओ, पटना सिटी, ने कहा कि विभिन्न मोहल्लों में आतंक का कारण बन रहे बंदरों को पकड़ कर जैविक उद्यान में डालने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा गया है.

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Monkey Attacks in Patna: पटना. बिहार की राजधानी पटना में बंदरों के आतंक से लगभग एक दर्जन मोहल्लों में घरों में रह रहे लोग पिंजरे में कैद हो रहे हैं. छत से लेकर बालकनी तक लोहे के जाल से घिर गया है. पटना सिटी इलाके में बंदरों के हमले से अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 100 से अधिक लोग जख्मी भी हुए हैं. गुरू गोविंद सिंहजी के 350वें प्रकाश पर्व के पहले वन विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा गया था, पर हकीकत यह है कि अब बंदरों की संख्या पांच गुणी बढ़ गई है. बंदरों की बढ़ती संख्या ने कई मोहल्लों में लोगों को छत पर चढ़ना मुश्किल कर रखा है. वहीं सब्जी मंडी से फल, सब्जी या अन्य खाद्य पदार्थ लेकर लौटना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

बांकीपुर से अजीमाबाद अंचल तक फैला है बंदरों का आतंक

पटना नगर निगम के बांकीपुर और अजीमाबाद अंचल के एक दर्जन से अधिक मोहल्लों में इन बंदरों का आतंक है. अशोक राजपथ से गंगा तट के बीच के मोहल्लों से लेकर पटना साहिब स्टेशन के आसपास के मोहल्लों में भी बंदरों का आतंक कायम हो चुका है. दिनों दिन बंदरों की बढ़ती संख्या के कारण सिटीवासियों के अलावा देश-विदेश से आनेवाले श्रद्धालुओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. एसडीओ, पटना सिटी, ने कहा कि विभिन्न मोहल्लों में आतंक का कारण बन रहे बंदरों को पकड़ कर जैविक उद्यान में डालने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा गया है.

गुरुगुद्वारा आनेवाले श्रद्धालु भी हो रहे बंदरों का शिकार

बंदरों के कारण गुरुगुद्वारा आनेवाले श्रद्धालु भी सहमे रहते हैं. पलक झपकते डब्बा गायब की तर्ज पर बंदर सामान झपट कर रफूचक्कर हो जाते हैं और लोग खड़े रह जाते हैं. कुछ वर्षों पहले बंदर ने मच्छरहट्टा मंडी में एक कारोबारी से रुपए का बंडल झपट लिया था. आए दिन बाल लीला गुरुगुद्वारा और तख्त साहिब के आसपास बाहर से आनेवाले श्रद्धालु भी बंदरों के शिकार हो रहे हैं. यहां ज्यादातर घरों में छतों पर लोहे की जाल लगायी गयी है. खासकर बड़े इमारतों में बंदरों का प्रकोप ज्यादा है. जहां बॉलकनी और लिफ्ट स्पेश के पास बंदर पहुंच जाते हैं और बरामदा में पड़े सामानों को बर्बाद कर देते हैं. इन बंदरों से खोमचेवाले भी काफी तबाह हैं. कई बार छीना झपटी में लोग घायल भी हो जाते हैं.

भय में जी रहे महिलाएं और बच्चे

बंदरों के आतंक के कारण क्षेत्र में एक महिला की मौत हो गयी थी. पन्द्रह वर्ष पूर्व हरिमंदिर गली में छत पर कपड़ा डालने गयी महिला बंदर के भय से नीचे कूद गयी गयी थी. जिससे उसकी मौत हो गयी थी. वर्ष 2015 में मिरचाई गली में बंदर ने ईंट गिरा दिया था, जिससे एक पुजारी की मौत हो गई थी. रामबाग में भी बंदर ने छत पर रखा ईंट गली में गिरा दिया था, जिससे सड़क पर कपड़ों की गठरी बांध रहा एक कर्मचारी की सिर फटने से मौत हो गयी थी. वहीं बंदरों के भय से भागने के क्रम में कई लोग छत से गिरकर हड्डी तुड़वा चुके हैं. सिटी चौक के आसपास के इलाकों में बंदरों के भय से महिलाएं और बच्चों ने छत पर जाना छोड़ दिया है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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