Street Singers of Patna: मशहूर होने के लिए मुंबई जाना जरूरी नहीं! पटना के घाटों पर गाकर स्टार बने ये युवा; अब होटलों व विदेशों से आ रहे बुलावा

Street Singers of Patna: राजधानी की शामों में अब सुरों का नया रंग घुल रहा है. बनारस के घाटों की तर्ज पर पटना के एनआइटी घाट और मरीन ड्राइव पर स्ट्रीट सिंगिंग का कल्चर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सोशल मीडिया के दौर में इन युवा कलाकारों को न केवल जनता का प्यार मिल रहा है, बल्कि इनके हुनर की गूंज अब बड़े होटलों से लेकर सात समंदर पार तक सुनाई देने लगी है.
Street Singers of Patna: बनारस के घाटों पर शाम ढलते ही संगीत की जो लहरें उठती थीं, अब वैसी ही कुछ रौनक पटना के गंगा घाटों, मरीन ड्राइव व स्ट्रीट जोन में दिखने लगी है. राजधानी में सिंगिंग कल्चर एक नए ट्रेंड के रूप में उभरा है, जहां युवा कलाकार खुले आसमान के नीचे अपनी प्रतिभा बिखेर रहे हैं. सोशल मीडिया पर इन कलाकारों के वीडियो वायरल होने के बाद अब एनआइटी घाट व मरीन ड्राइव जैसे इलाकों में शाम को संगीत प्रेमियों की भारी भीड़उमड़ रही है. यह महज शौक नहीं, बल्कि शहर के युवाओं के लिए अपनी पहचान बनाने का एक बड़ा मंच बन चुका है.
पटना के इन स्ट्रीट सिंगर्स को अब न केवल स्थानीय स्तर पर प्यार मिल रहा है, बल्कि इन्हें बड़े आयोजनों और होटलों से भी बुलावा आने लगा है. कोई अपने भीतर के दर्द को गीतों के जरिए बाहर निकाल रहा है, तो कोई बॉलीवुड के बड़े मुकाम तक पहुंचने के लिए घंटों पसीना बहा रहा है. इन कलाकारों के लिए जनता की तालियां ही सबसे बड़ी कमाई हैं. स्ट्रीट सिंगिंग के इस बढ़ते क्रेज ने पटना की शामों को और भी खुशनुमा और जीवंत बना दिया है. पेश है इस नए बदलाव के नायकों की कुछ अनकही कहानियों पर कवर स्टोरी.
अभय आनंद: एनआइटी घाट पर बटोर रहे प्यार और चॉकलेट्स
खगड़िया के सन्हौली गांव से ताल्लुक रखने वाले अभय आनंद आज पटना के एनआइटी घाट की पहचान बन चुके हैं. एक संयुक्त परिवार से आने वाले अभय ने दूसरी कक्षा से ही गाना शुरू कर दिया था, जब दोस्तों ने उनकी गुनगुनाहट सुनकर उन्हें स्कूल की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया. संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद, उन्होंने खुद के अभ्यास से अपनी आवाज को तराशा है. अभय ने अपने सफर की शुरुआत मरीन ड्राइव पर एक सिंगर चायवाला के पास गाकर की थी, लेकिन स्टॉल बंद होने के बाद उन्होंने एनआइटी घाट को अपना मंच बनाया.
अभय बताते हैं कि घाट पर गाते समय लोगों का व्यवहार बहुत ही प्यारा होता है. कई बार लोग खुश होकर उन्हें उपहार और चॉकलेट्स भी देते हैं. हालांकि, यहां गाने से कोई बंधी-बंधाई कमाई नहीं होती, लेकिन लोगों का प्यार उन्हें छोटे-मोटे इवेंट्स दिलाने में मदद करता है. अभय का दिन घर के कामों और रियाज के बीच बीतता है, और शाम होते ही वे अपनी मंजिल यानी घाट की ओर निकल पड़तेहैं. उनका सबसे बड़ा सपना सोनू निगम के साथ मंच साझा करना है. वे कहते हैं, लोग अच्छा बोलें या बुरा, मुझे खुद पर भरोसा है और मैं मेहनत करना नहीं छोड़ूंगा.
रचित थिरानी: डर पर जीत पाकर बने फ्राइडे स्टार
पटना के ही रहने वाले रचित थिरानी की संगीत यात्रा एक अधूरे प्रेम प्रसंग और व्यक्तिगत दर्द से शुरू हुई. साल 2017 के आसपास जब वे मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, तब उन्होंने पाया कि गाने से उनका मन हल्का होता है. रचित ने बिना किसी गुरु के खुद ही घंटों अभ्यास कर अपनी गायकी को निखारा. पटना के घाटों पर आने का उनका मुख्य उद्देश्य भीड़ के सामने अपने डर को खत्म करना था. वे मानते हैं कि अगर लोग गलत काम करने में शर्म नहीं करते, तो उन्हें अपना हुनर दिखाने में हिचकिचाहट क्यों होनी चाहिए?
रचित अब हर शुक्रवार शाम 6.30 बजे एनआइटी घाट पर परफॉर्म करते हैं. उनके चाहने वाले उनका इंतजार पहले से ही घाट पर करते हैं. रचित की खासियत यह है कि वे दर्शकों की फरमाइश पर गाने गाते हैं और लोगों की खुशी के लिए उन्होंने भोजपुरी गीत भी सीखे हैं. गायकी के साथ-साथ वे एक रैपर भी हैं और ‘मेरा देश’ जैसे सामाजिक मुद्दों पर रैप लिखते हैं. रचित का सपना एक इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट बनने के साथ-साथ बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगिंग करना और बिहार का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है. उनके लिए जनता का प्यार ही सबसे बड़ी दौलत है.
राजगुरु: कैफे सिंगिंग से दुबई के मंच तक का सफर
पटना के युवा लोकगायक राजगुरु ने साबित कर दिया है कि अगर जुनून हो तो सोशल मीडिया आपकी किस्मत बदल सकता है. साल 2009 में अपने पिता की प्रेरणा से संगीत शुरू करने वाले राजगुरु ने कोलकाता यात्रा के दौरान स्ट्रीट और कैफे सिंगिंग का आइडिया पाया था. उन्होंने होटल मौर्य व पाटलिपुत्र कॉन्टिनेंटल जैसे बड़े होटलों में परफॉर्म कर अपनी खास पहचान बनाई. बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड, यूपी, देहरादून सहित कई राज्यों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है.
राजगुरु के करियर में सबसे बड़ामोड़ तब आया जब इंस्टाग्राम पर उनका गाना सुनकर एक प्रवासी बिहारी ने उन्हें दुबई में प्रस्तुति देने का न्योता दिया. यह उनके लिए एक सपने जैसा था. वे न केवल लोकगीत गाते हैं, बल्कि भजनों में भी पारंगत हैं. महाराष्ट्र में बिहार दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुति देना उनके लिए सबसे यादगार पल रहा है. राजगुरु अब बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगर बनने की राह पर हैं और साथ ही वे बच्चों को संगीत की शिक्षा देना चाहते हैं ताकि आने वाली पीढ़ी को इस कला से जोड़ा जा सके. उनकी इस सफलता में उनके माता-पिता और दोस्तों का अटूट समर्थन रहा है.
समीर कुमार सिंह: हारमोनियम से शुरू हुई राह अब दिल्ली के मंचों तक पहुंची
आरा जैसे छोटे शहर की गलियों से निकलकर समीर ने आज संगीत की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है. एक इंडीपेंडेंट सिंगर व कंपोजर के रूप में समीर की पहचान अब सात समंदर पार तक पहुंच रही है. उनके इस सफर की नींव तीसरी कक्षा में पड़ी थी, जब 15 अगस्त के कार्यक्रम में उनके देशभक्ति गीत ने सबका दिल जीत लिया. बेटे के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानते हुए उनके पिता ने 5500 रुपये का हारमोनियम तोहफे में दिया, जो समीर के लिए महज एक वाद्ययंत्र नहीं, बल्कि उनकी सफलता की चाबी बन गया.
आरा जैसे भोजपुरी प्रधान क्षेत्र में रहने के बावजूद समीर ने हिंदी सुगम संगीत, सूफी और गजलों को अपना आधार बनाया. उन्होंने अपनी मेहनत और कमाई से घर पर ही एक आधुनिक प्रोफेशनल स्टूडियो तैयार किया. समीर बताते हैं कि वे अपनी टीम के साथ मिलकर आरा के रमना मैदान और अन्य इलाकों में वीडियो शूट करते हैं. इसके साथ ही, पटना के एनआइटी घाट व बनारस के घाटों पर भी उनकी प्रस्तुति को बड़ी संख्या में लोग सराहते हैं. समीर खुद को और बेहतर बनाने व संगीत की बारीकियों को सीखने के लिए दिल्ली शिफ्ट हो गए हैं. पिछले 10 वर्षों से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहे समीर अब बॉलीवुड प्लेबैक और स्वतंत्र संगीत निर्माण पर ध्यान दे रहे हैं. आज सोशल मीडिया पर समीर एक डिजिटल स्टार हैं.
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लेखक के बारे में
By हिमांशु देव
सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.
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