बिहार के 41 छात्रों को 28 लाख की स्कॉलरशिप, फिल्म निर्माण पर 4 करोड़ तक सब्सिडी

बिहार फिल्म निर्माण और मीडिया शिक्षा का नया केंद्र बन रहा है. नई नीति के तहत 41 छात्रों को 28 लाख की छात्रवृत्ति मिली, जिससे वे FTII पुणे और SRFTI कोलकाता में पढ़ रहे हैं. आर्यभट्ट विश्वविद्यालय में 5 महीने का मुफ्त कोर्स भी चल रहा है. 75% शूटिंग बिहार में करने पर 4 करोड़ तक सब्सिडी मिलती है. इसके लिए 350 कलाकारों ने पंजीकरण कराया है.
Patna News: (हिमांशु देव की रिपोर्ट) बिहार अब केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण और मीडिया शिक्षा के एक नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है. राज्य सरकार की नई फिल्म प्रोत्साहन नीति, मुफ्त प्रशिक्षण व छात्रवृत्ति योजनाओं से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में करियर बनाने के सुनहरे अवसर मिल रहे हैं. प्रतिभाओं को निखारने के लिए बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम द्वारा अब तक 41 प्रतिभाशाली छात्रों को 28 लाख रुपये की स्कॉलरशिप दी गई है, जिससे 22 छात्र एफटीआइआइ पुणे और 19 छात्र एसआरएफटीआइ कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फिल्म की बारीकियां सीख रहे हैं. इसके साथ ही, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में स्नातक पास युवाओं के लिए 5 महीने का मुफ्त फिल्म मेकिंग कोर्स भी चलाया जा रहा है.
52 में से 48 फिल्मों की शूटिंग बिहार में पूरी
सरकार की नयी व्यवस्था के तहत यदि कोई निर्माता अपनी फिल्म की 75 प्रतिशत शूटिंग बिहार में करता है, तो उसे अधिकतम चार करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है. इस नीति के तहत अब तक कुल 52 फिल्मों को शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है, जिनमें से 48 फिल्मों की शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी भी हो चुकी है. इससे स्थानीय होटलों, परिवहन व पर्यटन व्यवसाय को सीधा फायदा मिल रहा है.
350 से अधिक कलकारों ने कराया रजिस्ट्रेशन
फिल्म निर्माण को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किए गए डिजिटल पोर्टल पर अब तक 350 से अधिक स्थानीय कलाकारों और 11 से ज्यादा बड़े वेंडरों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. इस व्यवस्था से निर्माताओं को अभिनय, निर्देशन, कैमरा, स्टूडियो और सुरक्षा जैसी तमाम जरूरी सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही आसानी से उपलब्ध हो रही हैं.
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लेखक के बारे में
By निखिल अनुराग
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.
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